Monday, March 16, 2026
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लापरवाही का सिस्टम, नहीं बदली व्यवस्थाएं

  • बीते शुक्रवार को मेडिकल में हो चुका अग्निकांड
  • बाल-बाल बचा था गायनिक वार्ड का स्टॉफ

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एलएलआरएम कॉलेज की गायनिक वार्ड में आग लगने की घटना के बाद मेडिकल में कितनी व्यवस्थाएं बदली? इसको लेकर ‘जनवाणी’ ने वास्तविकता को जानने की कोशिश की। कई दिन आग लगने की घटना को बीत गए हैं, क्या मेडिकल कॉलेज का सरकारी सिस्टम अलर्ट हैं या फिर पुराने ढर्रे पर ही चल रहा हैं। लगत है सरकारी सिस्टम ने नहीं सुधरने की कसम खा ली हैं, तभी तो व्यवस्थाएं दूसरे वार्डों में भी वैसी ही है, जैसी पहले थी। अग्निशमन यंत्र तो लगे हैं, लेकिन एक्सपायर हैं। आग बुझाने के लिए क्या-क्या सिस्टम होने चाहिए, वो पर्याप्त नहीं हैं।

एलएलआरएम कॉलेज की तीसरी मंजिल पर स्थित गायनिक वार्ड में बीते शुक्रवार को बड़ा हादसा हुआ, जब ओटी में आग लग गई थी। गनीमत रही कि आग लगने की घटना में कोई जनहानि नहीं हुई जबकि करीब एक करोड़ कीमत के उपकरण व अन्य सामान जरूर जलकर राख हो गया था। वहीं इस अग्निकांड के बाद अभी भी मेडिकल में ऐसे कई वार्ड है जिनमें आग बुझाने के उपकरण तक नहीं है। रविवार को मेडिकल कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग का जायजा लेने पर जा सच सामने आया, वह चौंकाने वाला है। करीब 300 मीटर लंबी पुरानी बिल्डिंग के गलियार में एक भी अग्निशमन यंत्र मौजूद नहीं है। जबकि यहां निकास व प्रवेश के लिए केवल तीन रास्ते हैं।

पहला रास्ता पर्चा काउंटर पर है, जबकि दूसरा रेडियोलॉजी विभाग के सामने से और तीसरा लाल बिल्डिंग के सामने निकलता है। वहीं, पहली मंजिल पर स्थित महिला सर्जिकल वार्ड में कुल 64 बेड है, जो फुल है, लेकिन इस वार्ड में कहीं पर भी अग्निशमन यंत्र नजर नहीं आया। मौके पर मौजूद नर्सिंग स्टॉफ ने बताया कि एक सप्ताह पहले उनकी ओर से एप्लीकेशन दी गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी तरह दूसरी मंजिल पर स्थित बफर वार्ड में भी मरीज तो भर्ती नजर आए, लेकिन यहां भी कोई अग्निशमन यंत्र मौजूद नहीं था।

यही हाल तीसरी मंजिल पर बने महिला-पुरुष हड्डी वार्ड का भी है। इन दोनों वार्डों में कुल 51 बेड है। जिनमें से आधे से ज्यादा पर मरीज भर्ती है, लेकिन दोनों वार्डों के भीतर कोई अग्निशमन यंत्र मौजूद नहीं था। इसी तरह चौथी मंजिल पर स्थित टीबी वार्ड में मरीज तो भर्ती है मगर यदि यहां मामूली सी भी आग लग जाए तो उसे बुझाने के लिए कुछ नहीं है। ऐसा ही हाल इसी मंजिल पर बने लावारिस वार्ड का नजर आया। जहां 18 लावारिस मरीज भर्ती है, लेकिन यहां भी कोई अग्निशमन यंत्र नहीं है।

मामले को लेकर प्रमुख अधीक्षक डा. धीरज राज बालियान से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। जब कोई एप्लीकेशन आएगी तो देखा जाएगा। सवाल यह कि मेडिकल में हुए भीषण अग्निकांड में भले ही कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन हादसे के बाद भी मेडिकल प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी का ये बयान सवाल जरूर खड़ा करता है कि क्या अब भी किसी और हादसे का इंतजार है।

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