- एडीएम सिटी से कमलदत्त की दो टूक रस्म अदायगी नहीं भव्य यात्रा
- विवाद के चलते तीसरा पक्ष कैंट विधायक अमित अग्रवाल से मिलने पहुंचा
- पुलिस प्रशासन की व्यवस्था से ना, तैयार नहीं कोई भी पीछे हटने को
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सदर के बिल्लवेश्वर महादेव मंदिर से निकाली जाने वाजी जगन्नाथ रथयात्रा को लेकर महाभारत जारी है। इस मामले में अब भाजपा के कुछ बडेÞ नेता भी कूद गए हैं। मंदिर प्रांगण में रथयात्रा निकालने का प्रशासन के प्रस्ताव का जबरदस्त विरोध हो गया है। इसको लेकर भाजपा नेता कमलदत्त शर्मा ने गुरुवार को एडीएम सिटी से बात की। साथ ही यह भी बताया दिया कि हर हाल में रथयात्रा निकाली जाएगी। वहीं, दूसरी ओर भव्य रथयात्रा की पैरवी करने वालों का तर्क है कि साल 1987 में शहर में कर्फ्यू लगा होने के बाद भी दिनेश गोयल ने रथयात्रा निकाली थी
और इसकी कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ी थी तो फिर अब क्या परेशानी है। कुछ का कहना है कि रथयात्रा को लेकर तलवार भांज रहे दोनों खेमों को हाउस अरेस्ट कर दिया जाए और तीसरे पक्ष को मौका दिया जाए। माना जा रहा है कि इसके चलते गुट निरपेक्ष माने जा रहे मुकेश तेल वालों व अनिल बंटी के साथ दर्जन सदर के दर्जन भर लोग कैंट विधायक अमित अग्रवाल से मिलने पहुंचे थे। उन्हें एक प्रस्ताव पत्र भी सौंपा।
सोतीगंज की 20 दुकानों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
एसएसपी प्रभाकर चौधरी के कार्यकाल में बंद करायी गयी सोतीगंज के 20 कबाड़ियों की दुकानों के खोले जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा है। इससे पहले इन कबाड़ियों ने मेरठ पुलिस द्वारा उनके प्रतिष्ठान बंद करा जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में दस्तख दी थी। लंबी चली सुनवाई के बाद सोतीगंज के इन 20 कबाड़ियों को बजाए सीधी राहत देने के हाईकोर्ट ने गेंद मेरठ के पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के पाले में डाल दी थी। कोर्ट गए कबाड़ियों की दलील है कि उनका चोरी के वाहनों की काले धंधे से कुछ लेना देना नहीं।
वो जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं। कभी कोई मुकदमा उन पर दर्ज नहीं हुआ है। कानून के दायरे में रहकर कारोबार करते हैं। सूत्रों ने जानकारी दी है कि इस मामले में हाईकोर्ट व मेरठ के अधिकारियों की ओर से राहत ना मिलती देखकर कबाड़ियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट को पूरे मामले से अवगत कराया गया है। साथ ही यह भी जानकारी मिली है कि सुप्रीमकोर्ट की लड़ाई के लिए इन सभी 20 कबाड़ियों ने आपस में सहयोग भी किया है। इनकी आखिरी उम्मीद अब सप्रीम कोर्ट ही बाकी बची है।

