Monday, March 16, 2026
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विश्वास की शक्ति

Amritvani 13

रात के ढाई बजे थे। एक सेठ को नींद नहीं आरही थी। वह घर में चक्कर पर चक्कर लगाये जा रहा था पर चैन नहीं पड़ रहा था। आखिर थक कर वह घर से नीचे उतर आया। अपनी कार निकाली और शहर की सड़कों पर निकल गया। रास्ते में एक मंदिर दिखा तो सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में जाकर भगवान के पास बैठता हूँ। प्रार्थना करता हूं तो शायद मन को शांति मिल जाये। वह सेठ मंदिर के अंदर गया तो देखा, एक दूसरा आदमी पहले से ही भगवान की मूर्ति के सामने बैठ था। उसका चेहरा उदास था परंतु आंखों में करूणा और आस दिख रही थी। सेठ ने पूछा-‘क्यों भाई इतनी रात को मन्दिर में क्या कर रहे हो?’ आदमी ने कहा- ‘मेरी पत्नी अस्पताल में है, सुबह यदि उसका आॅपरेशन नहीं हुआ तो वह मर जायेगी और मेरे पास आॅपरेशन के लिए पैसे नहीं हैं’। उसकी बात सुनकर सेठ ने, जेब में जितने रूपए थे वह उस आदमी को दे दिए। अब गरीब आदमी के चहरे पर चमक आ गई थी। सेठ ने अपना कार्ड उस आदमी को देते हुए कहा- इसमें मेरा फोन नबर और पता भी है। अगर और पैसों की जरूरत हो तो नि:संकोच बताना। उस गरीब आदमी ने कार्ड सेठ को वापिस देते हुए कहा-‘मेरे पास उसका पता है ’ इस पते की मुझे जरूरत नहीं है सेठजी। आश्चर्य से सेठ ने कहा-‘किसका पता है भाई’? उस गरीब आदमी ने कहा-‘जिसने रात को ढाई बजे आपको यहां भेजा उसका’। उस गरीब आदमी का परमात्मा पर इतना दृढ़ विश्वास था कि रात को ढाई बजे भी उसकी आवश्यकता अनुसार पैसे स्वयं उस तक पहुंच गए। परमात्मा जो हमारे पालनहार हैं। हमें भी उन पर इतना अटूट विश्वास रखना चाहिए।

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