Tuesday, June 2, 2026
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एलन मस्क से कौन डरता है?

Samvad 52

Ravinder Patwalमौजूदा भारतीय टेलिकॉम बाजार में जियो इन्फोकॉम, भारतीय मोबाइल और इंटरनेट बाजार का किंग है। लेकिन किंग को भारत सरकार के सेटेलाइट कम्युनिकेशन (सेटकॉम स्पेक्ट्रम) में विदेशी प्लेयर्स के लिए दरवाजे खोलने की खबर से भारत ही नहीं एशिया के दिग्गज, रिलायंस ग्रुप के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। सैटकॉम स्पेक्ट्रम के आवंटन को लेकर रिलायंस के सर्वेसर्वा, मुकेश अंबानी ने 10 अक्टूबर को टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी आॅफ इंडिया (ट्राई) की ओर से आवंटित किए जाने का विरोध करते हुए नीलामी की प्रक्रिया के तहत आवंटन का सवाल उठाया था। यह खींचतान अब प्राइवेट प्लेयर्स, एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक और भारत सरकार से होते-होते बाजार में सनसनी मचाने लगा है।

पिछले कुछ दिनों से ये गहमागहमी, दरअसल कल तब सार्वजनिक रूप से सामने आई, जब पीएम नरेंद्र मोदी दिल्ली में 8वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन के लिए पधारे थे, और इस समारोह के दौरान उन्होंने ग्लोबल डिजिटल टेक फ्रेमवर्क निर्मित किये जाने का आह्वान किया। लेकिन इसी मंच पर अन्य वक्ताओं में भारती एयरटेल के प्रमुख, सुनील मित्तल और जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन, आकाश अंबानी भी मौजूद थे, जिन्होंने भारतीय टेलिकॉम सेक्टर में सेटकॉम स्पेक्ट्रम के आवंटन की सरकारी नीति के खिलाफ अपनी आवाज मुखरता से व्यक्त कर भारतीय उद्योग जगत की नींद उड़ा दी। अब सरकार और ट्राई के लिए सांप-छुछुंदर वाली स्थिति बन चुकी है। सेटकॉम स्पेक्ट्रम के बारे में ट्राई की नीति अभी तक यही रही है कि इसके लिए नीलामी की निविदा आमंत्रित करने के बजाय आवंटन किया जा सकता है, जिसे लेकर एलन मस्क लगता है आश्वस्त थे कि उनकी कंपनी स्टारलिंक को भारत में एंट्री मिलने वाली है, लेकिन भारतीय बाजार के दोनों दिग्गजों की आपत्ति के बाद यह मामला विवादास्पद बन गया है।

हालांकि, कल दूरसंचार मंत्री, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बड़ी बहादुरी के साथ अपनी नीति का बचाव करते हुए कहा है कि अधिनियम में स्पष्ट किया गया था कि सैटकॉम स्पेक्ट्रम का आवंटन प्रशासनिक रूप से किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि स्पेक्ट्रम बिना किसी लागत के आएगा। वह लागत क्या होगी और उसका फॉमूर्ला क्या होगा, यह केवल ट्राई द्वारा तय किया जाएगा। इसके अलावा, दुनिया भर में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन प्रशासनिक रूप से किया जाता है। इसलिए, भारत कुछ अलग नहीं कर रहा है, जो हम नीलामी करके करेंगे। लेकिन 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए और आज इस खींचतान के बीच ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी का बयान आ गया है कि परामर्श प्रक्रिया अभी चल रही है और दूरसंचार नियामक कोई भी विचार-विमर्श करने से पहले सभी इनपुट पर विचार करेगा। बता दें कि नियामक की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब स्टारलिंक के सीईओ एलन मस्क और भारतीय दिग्गज सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को लेकर बड़े गतिरोध में उलझे हुए हैं।

मंगलवार सुबह इंडिया मोबाइल कांग्रेस में बोलते हुए भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने तर्क रखा कि शहरी ग्राहकों को सेवा देने की इच्छुक सैटेलाइट कंपनियों को टेलीकॉम आॅपरेटरों के समान नियामक ढांचे के तहत काम करना चाहिए, जबकि अन्य कंपनियां प्रशासनिक रूप से स्पेक्ट्रम ले सकती हैं। उन्होंने आगे कहा है, दुनिया भर की टेलिकॉम कंपनियां यूनिवर्सल सर्विसेज आॅब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) कार्यक्रम के जरिए सैटेलाइट सेवाओं को देश के सबसे दूरदराज के हिस्सों में ले जाएंगी और सीधे उन तक पहुंच बनाएंगी। हमें खुद को और उन सैटेलाइट कंपनियों को शहरी क्षेत्रों में आकर इलीट खुदरा ग्राहकों को सेवा देने की महत्वाकांक्षा है, उन्हें बाकी सभी की तरह दूरसंचार लाइसेंस लेने की जरूरत है, उन्हें भी उन्हीं शर्तों से बंधे रहना होगा।

बता दें कि पिछले हफ्ते तक भारती एयरटेल की सेटेलाइट स्पेक्ट्रम को लेकर आधिकारिक नीति वही थी जो भारत सरकार की है। लेकिन, इस बीच जियो और भारती एयरटेल में कुछ तो खिचड़ी पकी है, जिसके बाद दोनों दिग्गज एक सुर में अपनी आवाज उठाकर मौजूदा मोदी सरकार के लिए दुविधा की स्थिति खड़ी कर दी है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक, स्पेस एक्स और टेस्ला जैसी सबसे उन्नत कंपनियों के मालिक, और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क भी लगता है भारतीय टेलिकॉम सेक्टर में अपनी घुसपैठ बनाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं। ट्विटर पर अपने मालिकाने के बाद से एलन मस्क की भूमिका और कारगुजारियों को दुनिया देख रही है।

भारत ने तो कई बार एलन मस्क को टेस्ला कार का उत्पादन भारत में करने की दावत तक दे रखी है, जिसे एलन मस्क ने यह कहते हुए टाल दिया था कि वह पहले भारत में टेस्ला के बाजार की संभावनाओं के बारे में आश्वस्त होना चाहता है। जाहिर है, भारतीय प्रधानमंत्री को लगता होगा कि स्टारलिंक के भारतीय बाजार में आ जाने से एलन मस्क के लिए भारत का रास्ता खुल जाएगा। लेकिन उन्हें शायद घरेलू दिग्गजों की चिंताओं का ध्यान नहीं रहा। वैसे डेओलाइट ने भारतीय सेटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस मार्केट के बाजार को 2030 तक मात्र 1.3 बिलियन डॉलर तक ही आंका है, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं का कोई भरोसा नहीं, वे ब्रांड (मस्क) के नामपर संभवत: जल्द ही भारी हाइप खड़ी कर दें, और महंगी सेवाओं के बावजूद गर्वित उपभोक्ता का टैग लगाकर एयरटेल और जियो के लुभावने बाजार की हिस्सेदारी को चौपट न कर दें? सोशल मीडिया पर एलन मस्क और अंबानी समर्थक, विरोधी लॉबी खड़ी होने लगी है। कईयों का मानना है कि भारतीय टेलिकॉम सेक्टर अभी भी पूरी दुनिया में सबसे किफायती दरों पर अपनी सेवाएं प्रदान करने के कारण, स्टार लिंक को प्रवेश देने की कोई वजह नहीं है।

जियो और भारती एयरटेल का भारतीय टेलिकॉम सेक्टर पर लगभग पूर्ण कब्जा हो चुका है, और वे जब मन आता है अनाप-शनाप टैरिफ बढ़ाकर 100 करोड़ उपभोक्ताओं को हर माह बेदर्दी से लूट रहे हैं। इस लूट को संभव बनाने में भारत सरकार की सबसे बड़ी भूमिका है। सार्वजनिक क्षेत्र की स्वयं की वीएसएनएल को पिछले 10 वर्षों में 4जी के लिए तरसाकर तिल-तिल कर मार डालने के पीछे का उद्येश्य आज किसी से छिपा नहीं है। बीएसएनएल ही वह एकमात्र आॅपरेटर था जो डिफेन्स क्षेत्र से लेकर भारत के दूरदराज के क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को दूरसंचार और इंटरनेट की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध था। वीएसएससी सहित दर्जनों छोटे बड़े आॅपरेटर्स को खरीदकर आज एयरटेल और जियो ही आपस में एकजुट होकर अपने मुनाफे को लगातार बढ़ाते जाने के लिए खुल्ला छोड़ दिए गये हैं, और सरकार अब चाहे भी उनका कुछ भी कर पाने की स्थिति में नहीं है।

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