- एसआईटी के गठन की मांग, आज भी न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे मेरठ समेत वेस्ट यूपी के वकील
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गाजियाबाद में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज के विरोध में वकील सोमवार को न्यायिक कार्यों से विरत रहे। वकीलों ने आज भी न्यायिक कार्य से विरत रहने का ऐलान किया है। युवा वकीलों ने एडीजी से एसआईटी गठित कर जांच की मांग की। पश्चिमी उत्तर प्रदेश युवा अधिवक्ता एसोसिएशन मेरठ ने एडीजी को ज्ञापन में कहा है कि गाजियाबाद में एक जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई के दौरान पीठासीन अधिकारी ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। पुलिस को बुलाकर निहत्थे वकीलों पर लाठीचार्ज करवा दिया। इसमें कई वकील गंभीर रूप से घायल हो गए। आरोप है कि न्यायिक अधिकारियों ने पुलिस-प्रशासन के साथ मिलकर सुनियोजित रूप से इस घटना को कराया।
वकीलों ने मांग की है कि लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई जाए, एसआईटी गठित कर इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए। वकीलों ने बताया कि एडीजी ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस मौके पर वीके शर्मा, राम कुमार शर्मा, विनोद काजीपुर, अशोक पंडित, जगदीश प्रसाद, अरविंद शर्मा, सल्लाउद्दीन, रवि कुमार, आलोक कुमार, यशोदा यादव, देवेंद्र शर्मा, राजीव गोयल, विनोद गुर्जर, सूर्यांश, आलोक, ज्योति, अर्जुन, अनुराग, दानिश, अमन आदि मौजूद रहे। वहीं, दूसरी ओर मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री अमित दीक्षित ने बताया कि आज मेरठ जिले सहित पश्चिम उत्तर प्रदेश के सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
सोमवार सुबह 10 बजे मेरठ बार एसोसिएशन की एक आमसभा की गई। जिसकी अध्यक्षता मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहिताश अग्रवाल एवं संचालन महामंत्री अमित दीक्षित द्वारा किया गया। बैठक में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व महामंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्तागण उपस्थित रहे। इनके अलावा जिला बार एसोसिएशन की एक आवश्यक बैठक 10:30 बजे महात्मा गांधी सभागार में की गई। जिसकी अध्यक्षता अध्यक्ष रविंद्र सिंह एवं संचालन महामंत्री पं. आनंद कश्यप द्वारा किया गया। सभा में जिला गाजियाबाद की न्यायालय में अधिवक्ताओं के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज कराया। जिसमें कई अधिवक्ता घायल हुए। उक्त प्रकरण की जिला बार एसोसिएशन द्वारा निंदा करते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष शिव किशोर गौड़ के द्वारा जारी पत्र के विरोध में न्याय कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव किया गया।

