- गगोल तीर्थ पर हुई विशेष तैयारियां, छठ पूजा के दिन महिलाओं द्वारा 36 घंटे का निर्जला व्रत किया जाएगा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सूर्यदेव की उपासना, तपस्या व आस्था का प्रतीक तीन दिवसीय छठ पूजा का आरंभ आज से होने जा रहा है। सबसे पहले माता सीता ने छठ पर्व आरंभ किया था। जिसके बाद भारत काल में द्रोपदी द्वारा किया गया। यह पर्व सबसे पहले बिहार के गया जी में प्रारंभ हुआ था। छठ पूजा का व्रत आज सबसे पहले नहाय-खाय से शुरू होगा। जिसके पश्चात कल खरना, 7 नवंबर को अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य यानि कि मुख्य पूजा तथा मुख्य छठ पूजा के दिन महिलाओं द्वारा 36 घंटे का निर्जला व्रत किया जाएगा। जिसके बाद 8 नवंबर को चौथे दिन उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न किया जाएगा। इस दौरान मेरठ में भी हर साल गगोल तीर्थ स्थल पर विशेष पूजा अर्चना का आयोजन किया जाता है।
ये है गगोल तीर्थ का इतिहास
रामायण प्रसंगानुसार सत्ययुग में सप्त ऋषियों में श्रेष्ठ महर्षि विश्वामित्र महाराज द्वारा अडष्ट तीर्थ धामो पर यज्ञ किये गये। मगर राक्षस आकार अपनी माया, बल, छल और दल से यज्ञ को खंडित कर देते थे। इस बात से विश्वामित्र का मन दु:खी होता था। उसके कुछ समय पश्चात त्रेता युग प्रारम्भ हुआ और परमब्रह्म भगवान श्रीराम का अवतार हुआ। विश्वामित्र महाराज आयोध्या गये ओर वहां से परमब्रह्म श्री भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण को साथ लेकर गगोल आये। दोनों भाइयों द्वारा उन राक्षसो का वध किया गया।
वध करने के पश्चात विश्वामित्र ने यज्ञ करना प्रारम्भ किया इस दौरान जल की आवश्यकता पड़ी तो परम ब्रह्म भगवान राम ने अपने तीर से यहां पर जल की उत्पत्ति की, जिस कारण यहां का नाम विश्वामित्र तपो भूमि तीर्थ पड़ा। इसलिए इसमें स्नान करने से सभी की मनाकामनायें पूरी होती है व खाज, खुजली, चर्म रोग नष्ट होते हैं। इस तीर्थ की कायाकल्प करने वाले महाराज 1008 बाबा बुद्धदास खिचड़ी वालों ने सम्वत 2010 तक इसका विकास कराना प्रारम्भ किया। उनके बाद महाराज 1008 बाबा सेवादास ने किया। अब 108 महंत बाबा शिवदास महाराज द्वारा इस तीर्थ कि देखरेख की जा रही। बता दे कि यह सरोवर सात फीट गहरा है व आज भी खसरा खतौनी में ऋषि विश्वामित्र का नाम दर्ज है।
मंदिर परिसर की कुछ जमीन पर विवाद चल रहा है। जिस कारण यहां सुरक्षा के लिए लिहाज से 24 घंटे पीएसी बल तैनात रहता है। सरोवर का जीर्णोद्धार पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह द्वारा कराया गया था। उसके बाद पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर योगी आदित्यनाथ ने मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की व दूसरी बार सीएम बनने पर मुख्यमंत्री योगी ने डेढ़ करोड़ रुपये की राशि प्रदान की थी। वहीं, मंदिर परिसर के बाहर शहीद स्मारक भी बनाया गया है। जिसमें गगोल व आस पास के शहीदों के नाम अंकित है।
छठ पर उमड़ती है श्रद्धालुओं कि भीड़
गगोल तीर्थ के स्वामी शिव दास बताते है कि हैं छठ के पावन पर्व पर हजारों श्रद्धालु यहां विधि-विधान से छठ मैया की पूजा-अर्चना करने हापुड़, गाजियाबाद, बागपत, बड़ौत से आते है। इस दौरान छठ से एक दो दिन पहले ही श्रद्धालु आकर अपने-अपने स्थान का चयन कर ‘वेदियां’ बना लेते हैं, यानी कि अपने नाम लिख देते हैं, ताकि पूजा के दिन उसी स्थान पर बैठकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकें। इस बार भी छठ पूजा के लिये मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की गयी है। जिसमें श्रद्धालुओं के लिये रुकने से लेकर भोजन, शौचालय, साफ-सफाई की व्यवस्था की गई है। छठ पूजा के लिये बुधवार को नगर निगम की टीम सरोवर कि सफाई करेगी। इसके साथ ही मंदिर परिसर में कल से 8 नवंबर तक मेले का आयोजन किया जाएगा। जिसके लिये झूले व दुकाने सज चुकी है।

