Tuesday, May 5, 2026
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शेयर मार्केट और आईपीओ में निवेश कराकर ठगे 19 लाख

  • फेसबुक पर कंपनी का प्रचार देखकर आया था लालच साइबर ठगों ने चालाकी से निवेश कराई रकम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: इन दिनों साइबर अपराध चरम पर है। नए-नए तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाकर साइबर ठग लोगों के लाखों-करोड़ों रुपये हजम कर रहे है। साइबर क्राइम थाना में रोजाना कोई ना कोई शिकायत लेकर पहुंचता है। इसी कड़ी में अब एक सरकारी बैंक कर्मचारी के साथ भी 19 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। जिससे साइबर अपराधियों ने शेयर मार्केट व आईपीओ में निवेश कराने के नाम पर अलग-अलग तीन बैंक खातों में 19 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। तहरीर के आधार पर साइबर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

थापर नगर निवासी भूषण ग्रोवर बैंक आॅफ बड़ौदा से रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी है। उन्होंने साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराए मुकदमे में बताया कि उन्होंने फेसबुक पर ब्रांडी वाईन नामक कंपनी का प्रचार देखा था। जिसपर विश्वास और लालच करते हुए उन्होंने विजिट किया। इसके बाद उनके पास साइबर ठगों के कॉल आने लगे और उन्होंने भूषण ग्रोवर को अपनी बातों में फंसाकर एक एप्लीकेशन डाउनलोड करा ली। जिसमें सबसे पहले 50 हजार रुपये निवेश कराए। इस दौरान शेयर बढ़ते हुए दिखाए गए और लालच देकर उनसे थोड़ी-थोड़ी रकम निवेश कराते हुए 19,01,500 रुपये तीन अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए।

पीड़ित ने बताया कि जब एप्लीकेशन में उनकी रकम 55 लाख रुपये दिखाने लगा, तो उन्होंने विड्रॉ करने की बात कही। जिसपर साइबर ठगों ने उन्हें साफ मना कर दिया और कहा कि जब तक यह रकम एक करोड़ रुपये तक नहीं हो जाती है, तब तक विड्रॉ नहीं कर सकते है। इसके बाद भूषण ग्रोवर ने उन्हें अपनी निवेश की गई रकम वापिस मांगी तो उन्होंने 4.5 लाख रुपये और भेजने की डिमांड की। इसपर भूषण ग्रोवर को अहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हो गई है।

उन्होंने बताया कि करीब 20 दिन तक शेयर मार्केट और आईपीओ में उनसे निवेश कराया गया। सात बार में 19 लाख रुपये भेजे गए। पीड़ित ने बताया कि जिनके खाते में रुपये जमा कराए गए है, जानकारी करने पर पता चला कि वह अहमदाबाद में है। साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक नेत्रपाल सिंह का कहना है कि मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच की जा रही है, जल्द से जल्द आरोपी का पता लगा लिया जाएगा।

180 दिन बाद भी कार्रवाई का इंतजार

मेरठ: मेरे बेटे की हत्या दारोगा के पुत्र ने ही की है। गगन के पिता देवेंद्र सिंह तेवतिया आरोप लगाकर रुआंसे हो गए। बुधवार को वह एसएसपी डा. विपिन ताडा से मिलने पुलिस आॅफिस पहुंचे थे। उनका आरोप है कि हत्या का आरोप एक दारोगा पुत्र पर है इसलिए उसको बचाने के लिए ही पुलिस ने हत्या की इस वारदात को आत्महत्या में बदल कर रख दिया है। गगन हत्याकांड में 180 दिन बाद भी पीड़ित परिवार न्याय से वंचित है। कई विवेचक बदले, लेकिन कोई निष्कर्ष निकलता दिखाई नहीं दिया। हर रोज एक पिता अपने बेटे को न्याय दिलाने की उम्मीद लेकर घर से निकलता है और शाम को बैरंग लौट जाता है। बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए उसके पिता दर-दर भटक रहे हैं और जिन्हें उन्होंने कसूरवार बताया है वो खुले घूम रहे हैं।

ये हुआ था

बीती 24 मई को मेडिकल थाना के साईं नगर चाणक्यपुरी शास्त्रीनगर निवासी देवेंद्र सिंह तेवतिया के 18 वर्षीय बेटे गगन तेवतिया की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गयी। परिजनों ने गगन के दो दोस्तों पर हत्या का शक जताते हुए मुकदमा दर्ज कराया। परिवार ने तर्क दिया कि बेटे को अगर आत्महत्या करनी थी तो वह दोस्तों को लेकर नहीं जाता। यह भी सवाल उठाया कि कोई आत्महत्या कर रहा हो तो पास मौजूद व्यक्ति चुपचाप खड़ा होकर कैसे देख सकता है। तत्कालीन थानाध्यक्ष संजय द्विवेदी ने विवेचना शुरू की, लेकिन उन्होंने दोनों युवकों को क्लीन चिट दे दी और अज्ञात में मुकदमा तरमीम कर दिया।

विवेचक बदले, नतीजा सिफर

विवेचक संजय द्विवेदी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद एसएसपी ने तत्कालीन इंस्पेक्टर लिसाड़ीगेट जितेंद्र सिंह को जांच सौंप दी। जांच चल ही रही थी कि उनको हटाकर परतापुर भेज दिया गया। देवेंद्र सिंह तेवतिया ने जांच फिर उनको ही दिलवा दी। पिछले दिनों उनको लाइन हाजिर कर दिया गया और जांच रुक गई। अब यह जांच इंस्पेक्टर परतापुर दिलीप सिंह बिष्ट कर रहे हैं।

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