Wednesday, April 15, 2026
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केंद्र सरकार के प्रस्ताव को किसान संगठनों ने ठुकराया, गतिरोध बढ़ा

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली:  कृषि कानूनों को लेकर आंदोलनरत किसानों और सरकार के बीच गतिरोध खत्म होता नहीं दिख रहा है। किसान संगठनों ने बुधवार शाम को संयुक्त प्रेस कांफ्रेन्स की। योगेंद्र यादव ने कहा कि किसान संगठन सरकार से वार्ता करने के लिए तैयार हैं, खुले मन से वार्ता की मेज पर आने के लिए सरकार का इंतजार कर रहे हैं। यादव ने कहा कि हम सरकार से आग्रह करते हैं जिन प्रस्तावों को हमने खारिज कर दिया है।  उसे नहीं दोहराएं बल्कि लिखित में ठोस प्रस्ताव के साथ आएं।

किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि हम गृहमंत्री अमित शाह को पहले ही बता चुके हैं कि प्रदर्शनकारी किसान संशोधनों को स्वीकार नहीं करेंगे। शिव कुमार कक्का ने कहा कि केंद्र को प्रदर्शनकारी किसानों के साथ वार्ता के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए। कक्का ने कहा कि सरकार को अपना हठी रवैया छोड़ देना चाहिए और किसानों की मांगों को मान लेना चाहिए। ऑल इंडिया किसान सभा के नेता हन्नन मोल्ला ने कहा कि सरकार हमें थकाना चाहती है ताकि किसानों का आंदोलन खत्म हो जाए।

सरकार और किसानों के बीच कब-कब बातचीत हुई

सबसे पहले अक्टूबर में पंजाब के किसान संगठनों के नेताओं के साथ 14 अक्टूबर को कृषि सचिव से वार्ता हुई थी। इसके बाद 13 नवंबर को यहां विज्ञान-भवन में केंद्रीय मंत्रियों के साथ उनकी वार्ता हुई, जिसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलमंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री सोमप्रकाश मौजूद थे।

सरकार के साथ तीसरे, चौथे और पांचवें दौर की वार्ताएं क्रमश: एक दिसंबर, तीन दिसंबर और पांच दिसंबर को विज्ञान भवन में ही हुईं, जिनमें तीनों मंत्री मौजूद थे। इसके बाद आठ दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद सरकार की ओर से किसान संगठनों के नेताओं को कानूनों में संशोधन समेत अन्य मसलों को लेकर सरकार की ओर से एक प्रस्ताव नौ दिसंबर को भेजा गया, जिसे उन्होंने नकार दिया दिया था।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल द्वारा किसान 20 दिसंबर को लिखे पत्र का जवाब देते हुए मोर्चा की तरफ से क्रांतिकारी किसान यूनियन पंजाब के डॉ. दर्शनपाल ने बुधवार को कहा कि आपने 9 दिसंबर 2020 को जो लिखित प्रस्ताव भेजे थे वो 5 दिसंबर की वार्ता में दिए गए उन मौखिक प्रस्तावों का दोहराव भर है, जिन्हें हम पहले ही खारिज कर चुके हैं।

हालांकि उन्होंने आगे पत्र में यह भी कहा है कि प्रदर्शनकारी किसान और किसान संगठन सरकार से वार्ता के लिए तैयार है और इंतजार कर रहे हैं कि सरकार कब खुले मन, खुले दिमाग और साफ नीयत से इस वार्ता की आगे बढ़ाए।

सिंघु बॉर्डर पर किसान मजदूर संघर्ष समिति के सरवन सिंह ने कहा- सरकार ने अपना रूख साफ कर दिया है कि वे कानूनों को वापस नहीं लेंगे। उन्होंने इस बारे में एक पत्र जारी किया है कि अगर किसान इन कानूनों में संशोधन चाहते हैं तो उन्हें चर्चा के लिए समय और तारीख देना चाहिए।

सरवन सिंह ने आगे कहा कि यह आगे लेकर जाने का रास्ता नहीं बल्कि किसानों को भटकाने की चाल है। एक सामान्य आदमी यह सोचेगा कि किसान किसान अड़े हुए हैं लेकिन हम किसान कानूनों में कोई संशोधन नहीं चाहते हैं। वह पूरी तरह से इसकी वापसी चाहते हैं।

केन्द्र की तरफ से लाए गए तीन नए कृषि सुधार संबंधी कानूनों के विरोध में हजारों की तादाद में राजधानी दिल्ली और इसके आसपास आकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने एक बार फिर सरकार से कानूनों की वापसी की मांग की है। किसान मजदूर संघर्ष समिति का कहना है कि वे कानूनों में किसी तरह का संशोधन नहीं बल्कि इसकी वापसी चाहते हैं।

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार जितना हठ दिखाएगी किसान संगठनों को उतना ही बल मिलेगा। कुछ लोग किसानों की एकता को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। नींबू का चौथा हिस्सा 10 क्विंटल दूध को फाड़ देता है। हमारे कई भाई नींबू का काम कर रहे हैं, ऐसा काम न करें।

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इन कानूनों को वापस लेने की मांग के पक्ष में करीब दो करोड़ लोगों के हस्ताक्षर एकत्र किए गए हैं। वेणुगोपाल ने बताया कि 24 दिसंबर को राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद इन हस्ताक्षरों वाले ज्ञापन को राष्ट्रपति को सौंपंगे और तीनों कानूनों को निरस्त करने की मांग करेंगे।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि भीषण सर्दी के बीच किसान पिछले 28 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। अब तक 44 किसानों की जान जा चुकी है। राहुल गांधी आज सुबह 10.45 बजे विजय चौक से राष्ट्रपति भवन के लिए रवाना होंगे। इस दौरान कांग्रेस सांसद और नेता मौजूद रहेंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा ने बुधवार को एक बार फिर साफ कर दिया है कि नए कृषि कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव किसानों को मंजूर नहीं है और वे तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करवाना चाहते हैं। हालांकि मोर्चा की ओर से सरकार को लिखे पत्र में कहा गया है कि सरकार अगर साफ नीयत से बातचीत को आगे बढ़ाना चाहे तो किसान संगठन वार्ता के लिए तैयार हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले करीब 40 किसान संगठनों के नेता देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसान की अगुवाई कर रहे हैं।

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिल कर कृषि कानूनों के खिलाफ इकट्ठा किए गए दो करोड़ हस्ताक्षर सौपेंगा। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दो करोड़ हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन सौंपेंगे जिसमें केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करने का आग्रह किया जाएगा।

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बयान में यह आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पहले कृषि विरोधी कानून बनाकर किसानों को दर्द दिया और अब उसके मंत्री अन्नदाताओं का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विरोधी कानूनों को लेकर चल रहे सतत विरोध को आगे बढ़ाने और मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने कानूनों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था।

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