Friday, May 1, 2026
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Meerut News: जिले में अपराधी ही नहीं, पुलिस भी है बेकाबू

  • कई मामलों में तो पुलिस का रवैया अपराधियों जैसा, पिछले कुछ दिनों में घटित मामले हैं इसकी बानगी जनवाणी संवाददाता |

    मेरठ: जिले को क्या हो गया है? ये अपने आप में बड़ा प्रश्न खड़ा कर रहा है। लंबे समय से यहां अपराध और अपराधी तो बेकाबू थे ही, अब पुलिसकर्मी भी बेकाबू होकर चोरी, छिनैती और वसूली जैसे अपराध करने लगे हैं। ये कोई इक्का-दुक्का केस नहीं, बल्कि निरंतर ऐसे मामले आ रहे हैं। कई मामलों में तो पुलिस का रवैया अपराधियों जैसा हो गया है। इसकी बानगी पिछले कुछ दिनों में घटित मामले हैं। निर्भीक तरीके से पुलिस वाले अपराध करते सामने आए हैं। आखिर करें भी क्यों ना, जब अदृश्य हाथ उनकी रक्षा कर रहा हो।

पुलिस वालों को ऐसा अपराध करते पहले नहीं देखा गया। दुस्साहस देखिए, परतापुर थाना क्षेत्र की कताई मिल चौकी इंचार्ज रितुराज ने बदमाशों से बरामद गोल्ड चेन को बदलकर मालखाने में नकली चेन जमा करा दी। एक्शन हुआ तो सोने की चेन सौंप दी। इस बेहद गंभीर मामले में चौकी इंचार्ज के खिलाफ अमानत में खयानत की धारा या अन्य धारा में चोरी का मुकदमा लिखा जाना चाहिए था। मगर चौकी प्रभारी को लाइन भेजकर इतिश्री कर ली गई।

दूसरी ओर, रेलवे रोड की केसरगंज चौकी इंचार्ज ने गली के गुंडों की तरह चाय के पैसे मांगने पर गरीब दुकानदार पर गर्म दूध फेंक कर उसको मरणावस्था में पहुंचा दिया। लेकिन चौकी प्रभारी के खिलाफ 24 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। अब मामले को दूसरा रूप देने के लिए चाय वाले को सट्टे की खाईबाड़ी करने की ओर मोड़ा जा रहा है। ऐसी निरंकुशता योगी शासन में शायद ही किसी अन्य जिले में देखने को मिले। ये सब आम पुलिसकर्मी नहीं, चौकियों के इंचार्ज बनकर बैठे जिम्मेदार पुलिस वालों की करतूस हैं। अब सोचने की बात यह है कि दायित्व सौंपने से पहले क्या इनका बैकग्राउंड चेक नहीं किया गया या इस पद को बहाल रखने की कोई आर्थिक चुनौती इन पर हावी है, जो एक-एक पैसा चोरी, छिनैती से जमा कर रहे हैं।

मुकदमे लिख जेल भेजना चाहिए था

चाहे वह सोने की चेन गायब करने का मामला हो या फिर चाय वाले पर खौलता दूध ऊपर डालने का मामला, महिलाओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने का किस्सा हो या डरा धमकाकर रिश्वत वसूलने का, सभी मामले जब प्रकाश में आ गए और पुलिस अफसरों ने निलंबन या लाइन हाजिर जैसी कार्रवाई कर दी तो इनमें मुकदमे भी लिखे जाने चाहिए और दोषी पुलिस वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए। पुलिस के ये कारनामे भी अपराधियों से कम नहीं।

जीरो टॉलरेंस नीति को पलीता लगा रही ‘खाकी’

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता जीरो टॉलरेंस की है, लेकिन जनपद में ‘खाकी’ द्वारा मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति को ही पलीता लगाया जा रहा है। थाने-चौकियों पर पीड़ित को न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती। ऐसे में आला पुलिस आॅफिस के कार्यालय पर पीड़ितों की भीड़ देखी जा सकती है। यह साफ संकेत है कि मुख्यमंत्री के आदेशों को पुलिस जैसे मातहत ठेंगे पर रख रहे हैं। पीड़ितों का थाने पर पहुंचना तो दूर उनके पास फटकना भी आसान नहीं है।

केस-1

प्रदेश सरकार की प्राथमिकता महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचार पर अंकुश की है। लेकिन ‘खाकी’ की कार्यप्रणाली कहानी कुछ अलग ही बयां कर रही है। इंचौली थाने की लावड़ चौकी प्रभारी गत सात मई को दो भाइयों के बीच बंटवारे की सूचना पर लावड़ में पहुंचते हैं, जहां उनकी हाथापाई होती है। इस पर पुलिसकर्मी दलित महिलाओं पर लाठियां फटकार देते हैं। सपा विधायक अतुल प्रधान के एसएसपी आॅफिस पर प्रदर्शन तथा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया एक्स पर ट्विट कर प्रदेश पुलिस को कटघरे में खड़ा करने के बाद पुलिस बैकफुट पर आती है। इसके बाद इंचौली थाना प्रभारी तथा लावड़ चौकी प्रभारी समेत पांच पुलिसर्मियों को लाइन हाजिर किया जाता है।

केस-2

लालकुर्ती थाना पुलिस तथा स्वॉट टीम नगर मवाना कोतवाली क्षेत्र के गांव सठला से 234 कारतूस के साथ बदमाशों को गिरफ्तार करती है। इसकी भनक मवाना थाना पुलिस तथा सठला चौकी प्रभारी को नहीं लगती। इसके बाद थाना प्रभारी व चौकी प्रभारी की संलिप्तता चेकिंग में कब्जे में ली एक बंदूक छोड़ने के लिए ढाई हजार रुपये लेने में पाई जाती है। डीआईजी कलानिधि नैथानी तक मामला पहुंचता है, तब जाकर थाना प्रभारी व चौकी प्रभारी को सस्पेंड किया जाता है।

केस-3

कताई मिल चौकी प्रभारी रितुराज गत शनिवार को दिल्ली के सरकारी कर्मचारी से लूटी गई सोने की चेन की जगह मालखाने में नकली चेन जमा कर देते हैं। मीडिया में मामला सुर्खियों में आता है तो बड़े साहब जांच के बाद चौकी प्रभारी को सस्पेंड करते हैं। साथ ही, मामले में एक और जांच बैठा देते हैं।

केस-4

कंकरखेड़ा थाना पर तैनात हेड कांस्टेबल उमेश सिंह द्वारा डरा-धमकाकर जेल भेजने तथा रिश्वत मामले की शिकायत पीड़ित एसएसपी से करता है। जिस पर हेड कांस्टेबल उमेश सिंह को सस्पेंड कर दिया जाता है। साथ ही, एएसपी ब्रह्मपुरी अंतरिक्ष जैन को मामले की जांच सौंप दी जाती है।

केस-5

रोहटा थाना की कल्याणपुर चौकी प्रभारी को विजिलेंस मेरठ की टीम बृहस्पतिवार को डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोचती है। साथ ही, उसके खिलाफ कंकरखेड़ा थाने में मुकदमा दर्ज कराती है। पुलिस वालों के अपराधियों की तरह सुलूक की ये कुछ बानगीभर हैं, ऐसा कोई न कोई रोजाना ही मामला सामने आ रहा है जिनमें खाकी अपराधियों की तरह काम कर रही है। लाचार और बेबस लोगों से रिश्वत, वसूली के लिए वह इस वक्त कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार बैठी है।

अब अगर कोई मामला पकड़ में आ गया तो कार्रवाई की जद में आ गए अन्यथा मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति की धज्जियां उड़ाने का अदृश्य आशीर्वाद मिला हुआ है ही। पीड़ित जनता बुरी तरह से पिस रही है। यह इस बात से भी साबित होता है कि कोई कुछ भी शिकायत करता रहे, कार्रवाई होगी ही नहीं। एक्शन तभी संभव है, जब कुछ बवाल हो जाए। हैरत की बात यह है कि बड़े पुलिस अफसर हर मामले को लेकर नजरें गड़ाए रहते हैं, फिर भी चौकी इंचार्ज या थानेदार दुस्साहसिक कारनामे करने से नहीं चूक रहे।

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