जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: संयुक्त परिवार के बिखरता ढांचे और भौतिकतावाद एवं सोशल मीडिया ने रिश्तों का खून कर दिया है। जीवनशैली तथा खानपान ने आग में घी डालने का काम कर रही है जिससे व्यक्ति हाइपरटेंशन समेत अन्य बीमारियों की जद में आकर धैर्य और सहनशीलता को तिलांजलि देकर कत्ल करने में गुरेज नहीं कर रहा। उसके इस एक गलत कदम से उसका घर-परिवार ताश के पत्तों की मानिंद बिखर रहा है। जब तक उसे होश आ रहा है, तब तक बहुत दे हो रही है। जनवाणी ने हत्या जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देने के पीछे के कारणों को तलाशने की कोशिश की। इसके लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय तथा मेरठ कॉलेज के समाजशास्त्र के विभागाध्यक्षों से उनका मंतव्य जाना। जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
सामाजिक रिश्तों का कम दबाव और बीमारियों से धैर्य खो रहे लोग
वर्तमान में व्यक्ति पर सामाजिक रिश्तों का दबाव कम हुआ है। सोशल मीडिया और मनोरंजन के साधन हिंसात्मक चीजें अधिक दिखा रहा है जिसका प्रभाव व्यक्ति पर पड़ रहा है। भारत की 30 प्रतिशत आबादी हाइपरटेंशन से ग्रस्त है। हाई बीपी वाले व्यक्ति में सहनशीलता लगभग शून्य हो जाती है। इसलिए व्यक्ति छोटी-सी बात पर आवेश में आकर ऐसा कार्य कर जाता है जिसका उसे बाद में पश्चाताप होता है। खानपान और जीवन शैली से व्यक्ति बीपी, शुगर, थाइराइड तथा अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहा है। संयुक्त परिवार एवं सामाजिक दबाव के चलते व्यक्ति पहले चाचा-ताऊ और अन्य नाते-रिश्तेदारों से डरता था, लेकिन अब एकांकी परिवार के चलते व्यक्ति शहर की ओर आ रहा है। देश में 33 करोड़ लोग शुगर के पेसेंट हैं। शुगर का पेसेंट शारीरिक रूप से खोखला हो जाता है, उसकी सहनशीलता और धैर्य खत्म हो जाता है। इसलिए यक्ति जल्द ही आवेश में आ जाता है। ऐसे में उसके द्वारा गलत कदम उठा लिया जाता है। इसके अलावा देश में वर्तमान में 45 करोड़ लोग विटामिन बी तथा 60 करोड़ विटामीन डी की कमी से जूझ रहे हैं। विटामिन बी व डी की कमी वाला व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है, उसका रात में नींद नहीं आती। जिस पर उसको जल्द ही गुस्सा आने लगता है। इस गुस्से में व्यक्ति कई बार अपराध कर बैठता है, गुस्सा जब खत्म होता है, तब उसको सही गलत का पता चलता है।
-प्रो. आलोक कुमार, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, कैंपस, चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय, मेरठ।
नैतिक शिक्षा पीछे छूटी और भौतिकतावाद में जकड़ा इंसान
पहले संयुक्त परिवार में व्यक्ति की जरूरतें अगर पूरी नहीं होती थी तो नाते-रिश्तेदारों के द्वारा मनोबल बढ़ाए जाने पर सहन करनी की शक्ति मिल जाती थी। साथ ही, संयुक्त परिवार में मितव्यता को महत्व दिया जाता था। इसलिए व्यक्ति थोड़े में गुजारा करना सीख जाता था। लेकिन अब संयुक्त परिवार खत्म हो गए हैं। इसलिए व्यक्ति ताऊ-चाचा, दादा-दादी और परिवार के अन्य लोगों से मिलने वाले संस्कार भी भूल गया। इन सबके बीच भौतिकतावाद तथा उपभोक्तावाद के पैर पसारने से वेस्टर्न एजुकेशन तथा तकनीकी शिक्षा प्रभाव बढ़ गया जिससे नैतिक शिक्षा कहीं पीछे छूट गई। बच्चों को सिर्फ एजुकेशन में आगे बढ़ने तथा दूसरे को पीछे छोड़ना सिखया जा रहा है। इसलिए सोशल वैल्यूज, सोशल नॉमर्स बिल्कुल खत्म हो गए। पेशंस कम हुआ है और ईगो बहुत हाई हो गया। ईगो को शांत करने के लिए परिवार का कोई बड़ा साथ नहीं है। वे जो चाहते हैं, वो उन्हें तुरंत मिलना चाहिए, न मिलने पर व्यक्ति आपराधिक घटनाओं को अंजाम तक दे देता है। सामाजिक नियंत्रण फॉर्मलवे और इन फॉर्मलवे के जरिए किया जाता है। फॉर्मलवे में कंट्रोल कानून तथा इनफार्मलवे में हमारा समाज और परिवार करता है। वर्तमान में इनफार्मलवे कंट्रोल कमजोर हुआ है। साथ ही, फॉर्मलवे कंट्रोल का भय खत्म हो गया। क्योंकि कानून जल्द से न्याय नहीं कर रहा है।
-प्रो. अजीत कुमार, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, मेरठ कॉलेज, मेरठ।
रिश्तों का खून
केस-1
परतापुर थाने के गांव रिठानी में 13 जून को ई-रिक्शा स्कॉर्पियो से टच होने पर ट्यूटर निरवैर सिंह लोहे के टेलीवर से पीट-पीटकर ई-रिक्शा चालक नरेश की हत्या कर देता है। निरवैर सिंह ऐसे समय धैर्य खोता है, जब स्कॉर्पियो में उसकी पत्नी तथा ढाई साल का बच्चा भी होता है। उसे अपनी पत्नी तथा मासूम बच्चे का भी ख्याल नहीं रहता। पुलिस निरवैर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज देती है।
केस-2
शहर के अतिरिक्त सुरक्षित गांधी बाग के पास खंडहर बिल्डिंग में रिक्शा चालक करतार सिंह आठ जून की रात में परिचित महिला मोनी के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी र्इंटों से पीट-पीटकर निर्मम हत्या कर देता है। इससे पहले एक-दूसरे से अंजान मोनी और करतार तीन महीने साथ रहते हैं, लेकिन करतार पल भर में इन रिश्तों का कत्ल कर देता है। पुलिस को इस केस की गुत्थी सुलझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
केस-3
जानीखुर्द थाना क्षेत्र के गांव नंगला कुम्भा में 10 जून को यूनुस, इब्राहिम व इसराल अपने परिवार के भतीजे मारुफ की चाकुओं से गोदकर उस समय हत्या कर देते हैं, जब उनके बीच मिट्टी उठाने को लेकर मामूली कहासुनी होती है। यह कहासुनी रिश्तों का कत्ल कर देती है। मारुफ की हत्या दो भाइयों के परिवार में ऐसी कड़वाहट घुल जाती है, जो शायद ही कभी दूर हो पाए।
केस-4
फलावदा थाना क्षेत्र में ग्राम महलका के समीप गत 10 मई की देर शाम रिटायर्ड फौजी मुकेश कुमार स्वेच्छा से टिंकू उर्फ पिंटू के साथ स्वेच्छा से दोस्त बनाकर शराब पीता है। ये दोस्ती पल भर में उस समय टूट जाती है, जब अत्यधिक नशा होने पर मुकेश कुमार पिंटू से घर छोड़ने के लिए कहता है। इसी बीच पिंटू डंडे के प्रहार से बिना किसी मोटिव के मुकेश कुमार की हत्या कर देता है।
केस-5
दौराला थाना क्षेत्र के गांव दादरी में राकेश देवी और उसका नाबालिग बेटा पांच जून की सुबह अपनी बेटी आस्था की गला दबाकर हत्या कर देती है। उसके बाद उसके भाई और भतीजे छह थानों की पुलिस को चकमा देकर शव को परतापुर थाना क्षेत्र के गांव महरौली के जंगल में लाते हैं। फिर, युवती का सिर कलम कर देते हैं। इसके बाद धड़ बहादुरपुर रजवाहे तथा सिर भोला झाला गंगनहर में फेंक देते हैं।
केस-6
लोहियानगर थाना क्षेत्र के गांव फफूंडा में गत छह जून को दो दोस्त गजेंद्र व विपिन के बीच शराब ठेके की कैंटीन में नशे में गाली-गलौज शुरू हो जाती है। फिर, उनमें मारपीट होती है। अंतत: विपिन सरिये से पीट-पीटकर गजेंद्र की हत्या कर देता है। गजेंद्र की हत्या भी छनिक आवेश का नतीजा होती है। हालांकि हत्यारोपी के सिर में भी गजेंद्र द्वारा किए गए प्रहार से गहरी चोट आती है।

