जनवाणी ब्यूरो |
उत्तर प्रदेश: विश्व प्रसिद्ध ताजमहल इस समय बाढ़ के गंभीर खतरे की चपेट में आ गया है। यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है, और 45 वर्षों में पहली बार नदी का पानी ताजमहल की पीछे की सुरक्षा दीवारों तक पहुंच गया है। इससे पुरातात्विक विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
भारी बारिश और बैराज से छोड़ा गया पानी बना संकट
दिल्ली और हरियाणा में लगातार हो रही मूसलधार बारिश और हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी ने यमुना को उफान पर ला दिया है। अब इसका असर आगरा और मथुरा तक साफ दिखने लगा है। बल्केश्वर, फाउंड्री नगर और दयालबाग जैसे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा सबसे अधिक है।
कहां तक पहुंचा जलस्तर?
बाढ़ नियंत्रण प्रभारी एडीएम वित्त शुभांगी शुक्ला ने बताया कि पिछले 24 घंटे में यमुना का जलस्तर 4 इंच बढ़ा है। बाढ़ का चेतावनी स्तर 495 फीट है, और यमुना लगातार इसके करीब पहुंच रही है मध्यम बाढ़ का स्तर: 499 फीट, उच्च बाढ़ का स्तर: 508 फीट। शुक्रवार रात से जलस्तर में फिर से तेजी से वृद्धि हो रही है।
प्रशासन सतर्क
प्रशासन ने बाढ़ की संभावना को देखते हुए कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं। तटवर्ती इलाकों में बाढ़ चौकियां बना दी गई हैं। 40 से अधिक गांवों के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
ताजमहल को लेकर चिंताएं बढ़ीं
ताजमहल के आसपास जलस्तर बढ़ने से नींव और संरचना पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पुरातत्व विभाग निगरानी बढ़ा रहा है ताकि समय रहते बचाव के उपाय हो सकें।

