Friday, March 20, 2026
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मेडा ने 38 साल बाद भी नहीं दिया पूरा मुआवजा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: वर्ष 1987 में मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने शहर के चारों तरफ लगभग 5000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। उस समय किसानों को भरोसा दिया गया था कि अधिग्रहण की गई जमीन का मूल प्रतिकर और अतिरिक्त प्रतिकर समय पर दिया जाएगा, लेकिन हकीकत ये है कि अधिग्रहण के 38 साल बाद भी बड़ी संख्या में किसान आज तक अपने हक से वंचित हैं।


राष्ट्रीय किसान भूमि रक्षक संघर्ष समिति के अध्यक्ष राममेहर सिंह ने कहा कि मेडा ने इस जमीन पर मेजर ध्यानचंद नगर, गंगानगर, गंगानगर एक्सटेंशन, शताब्दी नगर, लोहिया नगर और वेदव्यासपुरी जैसी बड़ी योजनाएं तो खड़ी कर दीं, लेकिन किसानों को पूरा मुआवजा देने में अब तक गंभीर लापरवाही दिखाई जा रही है। किसान लगातार प्राधिकरण के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। उनका आरोप है कि प्राधिकरण ने योजनाएं बनाकर करोड़ों की कमाई की, लेकिन जमीन देने वाले किसानों को ही न्याय नहीं मिल रहा। कई बार किसानों ने प्रदर्शन कर अपनी आवाज उठाई, ज्ञापन सौंपे, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई। किसान आज भी उसी प्रतिकार का इंतजार कर रहे हैं जिसका वादा मेडा ने अधिग्रहण के समय किया था। राष्ट्रीय किसान भूमि रक्षक संघर्ष समिति के अध्यक्ष का कहना है कि अगर जल्द ही उन्हें उनका हक नहीं मिला तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। किसान लगातार यही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर मेडा किसानों को कब तक छलता रहेगा?

पांच हजार एकड़ का मुआवजा डकार गया मेडा

मेडा पर किसानों के साथ बड़ा धोखा करने के आरोप लग रहे हैं। किसान यूनियन संघर्ष समिति के अध्यक्ष जसवीर सिंह ने कहा कि वर्ष 1987 में पुलिस बल लाकर जबरन जमीन अधिग्रहित कर ली गई, लेकिन आज तक उचित प्रतिकार नहीं दिया गया। उनका कहना है कि शताब्दी नगर की तर्ज पर तीनों योजनाओं का समझौता लागू हुआ था और 2 करोड़ 81 लाख रुपये तीनों योजनाओं के वितरण के लिए तय हुए थे, लेकिन कोरोना काल का बहाना बनाकर इसे रोक दिया। अब मेडा इसे दोबारा बोर्ड में रखने की बात कर रहा है, जो किसानों के साथ वादा खिलाफी है। किसान यूनियन संघर्ष समिति के अध्यक्ष ने बताया कि तीनों योजनाओं के प्रतिनिधि शासन को तीन बार ज्ञापन दे चुके हैं। इसके अलावा सांसद, पूर्व सांसद, ऊर्जा राज्यमंत्री, कैंट विधायक अमित अग्रवाल, सांसद जयंत चौधरी, राजकुमार सागवान, डीएम और कमिश्नर तक किसानों की व्यथा पहुंचाई गई, लेकिन किसी ने समाधान की पहल नहीं की। उन्होंने कहा कि किसानों में गहरा आक्रोश है और मायूसी बढ़ती जा रही है। उन्होंने मवाना रोड का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्तमान में जमीन की कीमत एक लाख रुपये गज है, जबकि किसानों को मात्र 15,600 रुपये गज के हिसाब से भुगतान किया गया, जबकि नियम स्पष्ट है कि देहात में बाजार दर का चार गुना और शहर में दोगुना मुआवजा दिया जाना चाहिए।

न्याय नहीं मिला तो हो सकता है टकराव

किसान नेता ने चेतावनी दी कि 90% जमीन पर कब्जा और बिक्री हो चुकी है, लेकिन किसानों को उनका हक नहीं मिला। अब किसान चुप नहीं बैठेंगे। शासन और प्राधिकरण की वादाखिलाफी से किसानों का सब्र टूट चुका है और अगर न्याय नहीं मिला तो टकराव की स्थिति भी बन सकती है।

किसानों के जज्बात से खेल रहा मेडा

भाकियू जिलाध्यक्ष डॉ. अनुराग चौधरी ने कहा कि किसान 90 का दशक नहीं भूल सकते। उस समय जबरन जमीन कब्जाई गई, आज वही जमीनें अरबों की हो चुकी हैं, लेकिन किसानों को कौड़ियों के दाम दिए गए। ग्राम नंगलाताशी जैसे इलाकों में न अस्पताल, न कॉलेज, न खेल स्थल और न ही चौपाल तक बनी। किसान आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि शताब्दी नगर, गंगानगर और वेदव्यास पुरी योजना के किसान आज भी मुआवजे के इंतजार में हैं। कई किसान इस संघर्ष में अपनी जान गंवा चुके हैं। उन्होंने कहा कि घोपला गांव का मुआवजा काशी से जोड़कर मात्र छह रुपये वर्ग गज तय किया गया, जबकि बराबरी के गांव रिठानी को उससे कई गुना ज्यादा मिला। यही कारण है कि किसान आज भी धरने पर बैठे हैं और आंदोलन की आग सुलग रही है। भाकियू जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अब मेडा अधिग्रहण न करके सीधे बैनामों के जरिए जमीनें हड़प रहा है। किसान कानूनी दांवपेच से बचने के लिए बैनामे कर देते हैं, लेकिन असल फायदा मेडा उठा रहा है।

समाधान वार्ता से पर सरकार खेल रही दोगला खेल

भाकियू जिलाध्यक्ष ने साफ कहा कि समाधान सिर्फ शासन, मेडा और किसानों की खुली वार्ता से ही संभव है। इसके लिए प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी को मेरठ भेजा जाए। लेकिन सरकार दोगला खेल खेल रही है-विपक्ष में नेता किसानों के साथ और सत्ता में आते ही भूल जाते हैं।
मानक के अनुरूप नहीं लगाई जा रही वाहनों की नंबर प्लेट

वाहन नंबर प्लेटों पर जाति बोधक शब्दों की भरमार दिखा रही पुलिस को ठेंगा

चौपहिया वाहनों पर मानक के विपरीत ब्लैक फिल्म के अलावा वाहनों की नंबर प्लेटों के साथ भी छेड़छाड़ वाहन स्वामी द्वारा की जा रही है। मानक को ठेंगा दिखाते हुए नंबर प्लेटों पर जाति बोधक शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं, दोपहिया वाहनों की बैक और फ्रंट नंबर प्लेट को तो आॅनलाइन चालान से बचने के लिए मोड़ा जा रहा है। इस ओर ट्रैफिक पुलिस का ध्यान नहीं है। इसलिए मानकों को ठेंगा दिखाकर नंबर प्लेट के साथ वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं।

केंद्र सरकार के सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वाहन स्वामी की पहचान तथा धोखाधड़ी से निपटने के लिए वाहनों के पंजीकरण का प्रावधान किया गया है। इसके लिए जनपद स्तर पर संभागीय परिवहन विभाग में वाहन के रजिस्ट्रेशन के समय नंबर प्लेट दी जाती है। पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर की हॉलमार्क लगी यूनिक नंबर प्लेट रजिस्ट्रेशन के बाद मिलती है। नंबर प्लेट के जरिए वाहन व उसके स्वामी से संबंधित पूरा डाटा मिल जाता है। इसकी जरूरत हिट एंड रन के मामलों या किसी पुराने वाहन की प्रामाणिकता की पुष्टि करते समय या अतरराज्यीय परिवहन के लिए एनओसी प्राप्त करते समय होती है। वहीं, दूसरी ओर सरकार ने वाहनों की श्रेणी के आधार पर नंबर प्लेट के लिए भी मानक निश्चित किए हैं। लेकिन इन मानकों की धज्जियां जनपद में खुलेआम उड़ रही हैं। नंबर प्लेटों पर जाति बोधक शब्दों की भरमार है। जाति बोधक शब्दों वाहन मालिक की जाति का सहज अंदाजा लगा जा सकता है। अगर देखा जाए तो यह जहां नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ की श्रेणी में आता है, वहीं जातिवाद को बढ़ावा भी दिया जाता है। साथ ही, वाहन चेकिंग के समय अगर पुलिस का दारोगा या सिपाही वाहन चालक की जाति का होता है तो इसका लाभ कई बार वाहन मालिक के साथ ढिलाई बरते जाने के रूप में मिल जाता है। जनपद के देहात क्षेत्र सरधना, मवाना, किला परीक्षितगढ़, किठौर, खरखौदा, रोहटा आदि क्षेत्रों में नंबर प्लेटों के साथ छेड़छाड़ अधिक नजर आएगी।

चालान से बचने को मोड़ी जाती है नंबर प्लेट

दोपहिया वाहनों की नंबर प्लेट बैक और फंट्र से अक्सर मुड़ी हुई नजर आएगी। वाहन चालक द्वारा ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आनलाइन चालान से बचा जा सके। दोपहिया वाहन के जाते समय अगर पुलिसकर्मी फ्रंट या बैक नंबर प्लेट का मोबाइल के जरिए आॅनलाइन चालान करेगा तो पहले से मुड़ी नंबर प्लेट होने के कारण वाहन का क्लीयर नंबर आएगा। अस्पष्टता के चलते वाहन स्वामी चालान से बच जाएगा।

नंबर प्लेट से संबंधित क्या हैं कानून

मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत मोटर चालित वाहनों के पास वैध आरटीओ पंजीकरण और लाइसेंस प्लेट नंबर होना अनिवार्य है। ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी से निपटा जा सके और वाहन मालिक से संबंधित स्पष्टता का पता चल जाए। नंबर प्लेट को लेकर नए नियम एक अक्टूबर 2020 से लागू हुए हैं। नए नियम के तहत वाहन नंबर प्लेटों पर क्षेत्रीय भाषाओं और गैर-मानक वर्णों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना गया है।

नंबर प्लेट के लिए निर्धारित मानक

केंद्रीय मोटर वाहन नियम के अंतर्गत नंबर प्लेट पर अक्षरों के आकार, मोटाई और अंतराल को निर्दिष्ट करने के लिए मानक निर्धारित किया गया है। ये मानदंड क्रमश: 65 मिमी, 10 मिमी और 10 मिमी हैं, जो दोपहिया और तिपहिया वाहनों को छोड़कर सभी मोटर वाहनों पर लागू होते हैं।

अस्थाई पंजीकरण से वाहन चलाने पर रोक

एक अक्टूबर 2020 से लागू नए मोटर वाहन अधिनियम के तहत कागज पर मुद्रित अस्थायी पंजीकरण संख्या के साथ नया मोटर वाहन चलाना अपराध माना गया है। ऐसा करने पर दंड का प्रावधान है। इसी तरह अस्थायी नंबर प्लेटों में पीले रंग की पृष्ठभूमि पर लाल अल्फा अंक होंगे, जो पिछली रंग योजना का स्थान लेंगे। क्षेत्रीय भाषाओं, राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा बेचे या नीलाम किए गए वीआईपी नंबरों तथा मूल अंग्रेजी अक्षरों और अरबी अंकों के अलावा किसी भी अन्य वर्ण का प्रयोग अब प्रतिबंधित है।

बीएसए-6 मानक के वाहन

बीएस-6 मानक वाले चार पहिया वाहनों की नंबर प्लेट पर एक सेमी की हरे रंग की परत होगी, जिसके साथ एक स्टिकर लगा होगा जो बताएगा कि वाहन डीजल, सीएनजी या पेट्रोल पर चलता है। डीजल वाहनों पर नारंगी रंग का स्टिकर होगा, जबकि सीएनजी और पेट्रोल वाहनों पर नीले रंग का स्टिकर होगा।

गलत नंबर प्लेट पर 10 हजार तक जुर्माना

एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि वाहन की नंबर प्लेट का एक मानक निश्चित होता है। इस मानक के साथ कोई भी वाहन स्वामी छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। अगर वह बिना नंबर प्लेट के गाडी चलता है या फिर गलत नंबर प्लेट लगाता है तो उस पर 5000 रुपये तक का अर्थदंड किया जा सकता है। साथ ही, बार-बार इसका उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये के जुर्माना किया जा सकता है। जैकी की नृशंस हत्या में दो भाइयों को आजीवन कारावास
अदालत ने अभियुक्तों पर 72-72 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया

बहल से लव मैरिज करने पर भाइयों ने हत्याकांड को दिया था अंजाम

सरधना में ढाई साल पहले बहन द्वारा लव मैरिज करने से खफा भाइयों द्वारा जैकी (25) उर्फ पटवारी की गोली मारकर तथा चाकू से गर्दन काटकर नृशंस हत्या में अदालत ने हत्याभियुक्त दो भाइयों को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अभियुक्तों पर 70-70 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।

सरधना का चर्चित जैकी उर्फ पटवारी हत्याकांड

सरधना थाना पर मोहल्ला गढ़ी खटिकान निवासी उषा पत्नी ने मुकदमा दर्ज कराया था। उषा ने बताया था कि उनके ही मोहल्ले के अंशू व उसके भाई सागर पंवार उर्फ काला पुत्रगण राजकुमार ने घर में घुसकर उसके पुत्र जैकी उर्फ पटवारी की गोली मारकर हत्या गर्दन काटक हत्या कर दी। जब पुत्रवधू आंचल व बेटी ज्योति बचाने आई तो उन पर भी चाकू से हमला कर घायल कर दिया। पुलसि ने जैकी उर्फ पटवारी की हत्या का मामला आईपीसी की धारा-452, 302, 307, 324 के तहत दर्ज किया। विवेचना के दौरान हत्यारोपियों से आलाकत्ल बरामद किया गया। साथ ही, उनको गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसके बाद विवेचक ने 17 जून, 2022 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। एडीजीसी श्रीमती बबीता वर्मा ने बताया कि मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-10 अभय प्रताप सिंह ने पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध होने पर अंशू व सागर पंवार उर्फ काला आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड जमा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने अभियुक्तगण से वसूल की गई 50,000 रुपये की धनराशि वादी-पीड़िता को प्रदान किए जाने के आदेश दिए हैं।

जैकी ने ढाई माह पहले की थी लव मैरिज

जैकी उर्फ पटवारी ने अपने घर के पास रहने आचल से फरवरी 2022 में लव मैरिज की थी। लव मैरिज के बाद जैकी व आंचल अपने मोहल्ला खटिकान स्थित घर पर ही रह रहे थे। इससे मोहल्ले में राजकुमार के परिवार को तानों का सामना करना पड़ रहा था। सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल होने के चलते अंशू ने अपने भाई सागर पंवार उर्फ काला के साथ मिलकर 18 अप्रैल 2022 की सुबह घर में घुसकर जैकी उर्फ पटवारी की हत्या कर दी थी। जैकी को पहले सीने से सटाकर गोली मारी गई थी। फिर, गर्दन काटकर उसकी हत्या कर दी गई थी। बचाव में जब जैकी की पत्नी आंचल तथा बहन ज्योति आई थी तो उन पर भी चाकू से प्रहार कर घायल कर दिया गया था।

कोर्ट ने अभियुक्त को सुनाई ये सजा

४ धारा-302 सपठित धारा-34 आईपीसी-कठोर आजीवन कारावास एवं 50,000-50,000 रुपये अर्थदंड।

४ धारा-307/34 आईपीसी-10-10 वर्ष का कठोर कारावास तथा 10,000-10,000 रुपये अर्थदंड।

४ धारा-324 आईपीसी-दो-दो वर्ष का कठोर कारावास एवं 2,000-2,000 रुपये अर्थदंड।

४ धारा-452 आईपीसी-4-4 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5,000-5,000 रुपये अर्थदंड।

४ धारा-4/25 आर्म्स एक्ट-अंशू व सागर को 3-3 वर्ष का कारावास एवं 2,000-2,000 रुपये जुर्माना।

४ धारा- 3/25 आर्म्स एक्ट-अंशू को 5 वर्ष का कारावास एवं 3,000 रुपये जुर्माना। भूनी टोल प्लाजा पर पुलिस का पहरा, कंपनी का ठेका खत्म

टोल प्लाजा खाली, धड़ल्ले से गुजर रहे वाहन, जुर्माना के बाद कंपनी का ठेका हुआ निरस्त, ब्लैकलिस्टिड भी हुई

जनवाणी संवाददाता

सरूरपुर: भूनी टोल प्लाजा पर गोटका के फौजी कपिल के पर टोल कर्मियों द्वारा खंभे से बांधकर बर्बरता पूर्वक किए गए कायरतापूर्ण हमले के बाद विरोध में ग्रामीणों द्वारा सोमवार को टोल प्लाजा पर की गई तोड़फोड़ के बाद से टोल पुलिस प्रशासन के हवाले है। पिछले 24 घंटे से भी अधिक से टोल फ्री चल रहा है। जिसे लेकर वाहन चालकों को को राहत मिली है। दूसरे दिन भी टोल प्लाजा पर सन्नाटा पसरा रहा। घटना को लेकर 20 लाख का जुर्माना लगाने के बाद धर्म सिंह कंपनी का ठेका खत्म कर दिया गया। साथ ही कंपनी को काली सूची में डाल दिया गया।
टोल प्लाजा पर बीते सोमवार को दी गई तोड़फोड़ और बवाल के निशान साफ दिखाई दे रहे थे टूटे पड़े टोल नाके, कैमरे व सिस्टम सब ग्रामीणों के आक्रोश की गवाही दे रहे थे। धर्म सिंह एंड कंपनी का टोल लाइसेंस निरस्त होने और बीस लाख के जुर्माने के बाद से टोल फिलहाल एनएचएआई के हवाले है। टोल प्लाजा पर एनएचएआई के कुछ अधिकारी-कर्मचारी दिखाई दिए।

पहले बिट्टू ने किया था हमला

एसपी देहात राकेश मिश्रा के मुताबिक, टोल प्लाजा पर कपिल के ऊपर सबसे पहला हमला भी छुर गांव के रहने वाले इसी बिट्टू ने किया था। बाद में बिट्टू ने अपने भाई अंकित के साथ मिलकर कपिल के हाथ पकड़कर खंभे के पीछे बांधे और बाकी हमलावरों ने लाठी-डंडों से उनकी पिटाई की। कपिल चीखता रहा, लेकिन टोल प्लाजा के इन गुंडों का दिल नहीं पसीजा। बिट्टू के खिलाफ पहले से कई संगीन धाराओं में केस दर्ज हैं। बिट्टू टोल प्लाजा पर तैनात सुरक्षा कर्मियों का सूत्रधार भी बताया गया है। हमले में शामिल आरोपियों में से सात को जेल भेजा जा चुका है।

थाने पर पुलिस ने की आरोपियों की खातिरदारी

सोमवार को बवाल के वक्त मौके पर मौजूद एडीएम ई सत्यप्रकाश और एसपी देहात राकेश मिश्र के सामने जमीन पर बैठे हुए पूर्व विधायक संगीत सोम ने मैनेजर शंकर लाल की गिरफ्तारी की भी बात रखी थी। अधिकारियों ने उन्हें भरोसा भी दिलाया था, लेकिन वही मैनेजर शंकर लाल बुधवार की रात थाने पर मौजूद रहा और पुलिस उसकी खातिरदारी करती रही। इसे लेकर स्थानीय पुलिस की भूमिका कटघरे में है।

जुर्माना की राशि पीड़ित परिवार को मिले

नेशनल हाईवे अथॉरिटी यानि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा टोल कंपनी धर्म सिंह पर लगाए गए 20 लाख रुपये के जुर्माने को लेकर ग्रामीणों और परिवार वालों ने मांग की है कि यह राशि नेशनल हाईवे अथॉरिटी को फौजी के परिवार वालों को सम्मान में दे देनी चाहिए। ग्रामीणों ने इसके लिए क्षेत्रीय नेताओं से भी मांग रखी और फौजी के पिता कृष्णपाल व अन्य परिजनों ने भी मीडिया के माध्यम से परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी इस बात की मांग की है।

ग्रामीण बोले, एनकाउंटर क्यों नहीं किया

सेना के जवान कपिल के साथ हुऐ हमले का मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा है और लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के विरोध में सोमवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने भूनी टोल प्लाजा पर जमकर हंगामा करते हुए टोल पर तोड़फोड़ की थी। इसके बावजूद ग्रामीणों का आक्रोश शांत होता दिखाई नहीं दे रहा है। टोल बंद रहने से क्षेत्रीय लोगों ने फिलहाल राहत की सांस ली है। मंगलवार को भी कपिल के घर घटना का विरोध में परिजनों को तसल्ली दिलाने के लिए क्षेत्रीय नेताओं और ग्रामीणों का जमावड़ा लगा रहा। आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा कि वह पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है। कहा, जब यूपी पुलिस छोटे से क्रिमिनल के घर पर बुलडोजर चलाकर एनकाउंटर करती है तो इन टोल के गुंडों के खिलाफ पुलिस-प्रशासन ने ऐसा क्यों नहीं किया।

कपिल के घर नेताओं का लगा जमावड़ा

टोल कर्मियों के हमले में घायल जवान कपिल के घर लगातार पूर्व सैनिकों, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। मंगलवार को उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य मीनाक्षी भराला कपिल के घर पहुंचीं और परिजनों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। वहीं,रालोद के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष भी कपिल के परिवार से मिलने पहुंचे।

सोशल मीडिया पर फूटा नेताओं का गुस्सा

भूनी टोल प्लाजा पर फौजी पर किए गए जानलेवा हमले के मामले जहां देश भर में गूंज हुई है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी पिछले दो दिनों से इसकी कड़ी निंदा की जा रही है। इसी मामले को लेकर सोशल मीडिया पर जहां आम लोगों का गुस्सा फूटा है। वहीं नेताओं ने भी अपने अकाउंट पर पोस्ट करके खासी नाराजगी जाहिर की है। जिसमें डिंपल यादव, अखिलेश यादव के आलावा भाजपा सांसद, प्रदेश अध्यक्ष, रालोद के जयंत चौधरी, बागपत सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, सिवालखास विधायक गुलाम मोहम्मद व सपा नेताओं ने भी खासी नाराजगी जाहिर करते हुए घटना की कड़ी निंदा की।

जाट महासभा ने भी घटना पर जताया आक्रोश

सेना के जवान के साथ भूनी टोल प्लाजा पर हुई बर्बरता पूर्वक पिटाई और सरेआम गुंड़ागर्दी का जाट महासभा कड़ा विरोध करती है। एक बयान में जाट महासभा के जिलाध्यक्ष कर्नल एसपी सिंह ने कहा कि जिस तरह से राष्ट्र की सेवा में समर्पित एक वीर जवान के साथ मारपीट की गई, न वह केवल शर्मनाक है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। जाट महासभा राज्य सरकार से मांग करती है कि सभी दोषियों पर रासुका के तहत कार्रवाई हो पीड़ित जवान को हुए शारीरिक एवं मानसिक नुकसान की पूरी भरपाई की जाए।

टोल मैनेजर की गिरफ्तारी को भाकियू आज देगी धरना

टोल प्लाजा पर फौजी प्रकरण में जेल भेजे गए सात आरोपियों के अलावा एसपी देहात के सामने ग्रामीणों ने टोल के सुरक्षा इंचार्ज सोनू चौधरी और मैनेजर शंकर लाल की गिरफ्तारी की भी मांग रखी थी। हालांकि पुलिस अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को दिए गए आश्वासन के 24 घंटे से भी अधिक बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक दोनों पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इस मामले में को लेकर बजरंग दल के वरिष्ठ कार्यकर्ता अभिषेक चौहान ने कहा कि यदि दो दिनों के भीतर मैनेजर शंकरलाल और सोनू चौधरी गिरफ्तारी नहीं होती वह आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

तोड़फोड़ के बाद भी वाहनों से कट रहा टोल

इरशाद चौधरी, जनवाणी, सरूरपुर

भूनी टोल प्लाजा पर सोमवार को फौजी कपिल से पर हुए हमले के विरोध में टोल पर की गई तोड़फोड़ और नाके उखाड़ फेंके गए। सीसीटीवी, कंप्यूटर सिस्टम, एलईडी, बूम सब तहस-नहस कर क्षतिग्रस्त कर दिए गए। टोल फ्री हो गया और वाहन धड़ल्ले से गुजरने शुरू हो गए। सभी को लग रहा कि वाहनों से कोई टोल शुल्क की कटौती नहीं हो रही, लेकिन ऐसा नहीं है। टोल सिस्टम पर ऊपर की तरफ लगे स्कैनर अब भी चालू हालत में है और लोगों के वाहनों के गुजरने पर तुरंत टोल काटने का मैसेज आ रहा है। कई वाहन चालकों ने मैसेज दिखाते हुए यह बताया कि उनका टोल लगातार कट रहा है।

दरअसल, जिस वक्त भीड़ ने हमला किया था तो ग्राउंड फ्लोर पर कैमरे, टोल नाके और कंप्यूटर सिस्टम आदि तोड़ दिए गए थे। जबकि टोल प्लाजा का पूरा सिस्टम जहां से आॅपरेट होता है। वह तीसरी मंजिल पर कंट्रोल रूम बना हुआ है। वहां तक भीड़ नहीं पहुंच पाई थी जिसके बाद से लगातार टोल का सिस्टम से सूचारू रूप से काम कर रहा है और लगातार वाहनों से स्पीड ब्रेकर पर स्पीड कम होते ही टोल डेबिट कर लेता है। हालांकि यहां से गुजरने वाले वाहन चालक और क्षेत्रीय लोगों को लग रहा है कि टोल फ्री चल रहा है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है, खुश होने की जरूरत नहीं है। टोल प्लाजा पर लगातार वाहनों से टोल कट आॅटोमेटिक कट रहा है। ये भी बता दें कि यह टोल प्लाजा पूरी तरह से आटोमेटिक है। केवल दो लेन मैन्युअल है, लेकिन उन मैन्युअल लाइन पर भी लगे स्कैनर काम कर रहे हैं और टोल लगातार कट रहा है। डायट परीक्षा में 31 मास्टर जी हो गए फेल

शेखर शर्मा, जनवाणी, मेरठ

जिले में बेसिक के स्कूलों में ऐसे टीचर बच्चों को पढ़ा रहे हैं जो मृतक आश्रित हैं। उसी कोटे में बेसिक शिक्षा के स्कूलों में ये सभी टीचर नियुक्त किए गए। एक शासनादेश के तहत ऐसे टीचरों के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन ऐसे 31 शिक्षकों ने आज तक भी डायट से प्रशिक्षण नहीं लिया है। जबकि साल 2009 में शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू किए जाने के बाद साल 2011 में प्रदेश सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून को लागू किया, जिसमें सभी शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण लेना अनिवार्य कर दिया गया। प्रदेश के मृतक कोटे में नियुक्त जिन टीचरों ने प्रशिक्षण नहीं लिया तो साल 2014 में प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव नितिश्वर कुमार ने अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षण लेने का शासनादेश जारी कर दिया।

मेरठ के अप्रशिक्षित शिक्षकों ने प्रशिक्षण नहीं लिया तो आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शर्मा ने बेशिक शिक्षा के शासन के अफसरों व सीएम योगी से शिकायत की, उसके क्रम में बेसिक शिक्षक परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने तत्कालीन बीएसए को आदेश किया। सचिव के आदेश के अनुपालन में तत्कालीन बीएसए ने 31 मई 16 को सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिए कि मृतक कोटे और दूसरे सभी अप्रशिक्षित टीचरों को प्रशिक्षण प्राप्त करने को भेजा जाए। ऐसे अप्रशिक्षित टीचरों में कई ऐसे भी पूर्ण प्रशिक्षण के बाद भी फेल हो गए थे। बाद में शासन के इस आदेश के विरोध स्वरूप मृतक आश्रित कोटे में लगे कई टीचर हाईकोर्ट में चले गए। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेश के खिलाफ उनकी ओर से याचिका दायर की गई।


जिसकी सुनवाई 4 जुलाई साल 2016 को हुई। इस सुनवाई में हाईकोर्ट ने 24 अगस्त साल 2016 तक के लिए यानि अगली सुनवाई होने तक बीएसए के आदेश को स्टे कर दिया। अगली सुनवाई होने तक उक्त स्टे स्वत: ही खत्म हो जाना था। कुलदीश शर्मा की मानें तो तब से आज तक वो अप्रशिक्षित टीचर हाईकोर्ट गए ही नहीं। इनमें 31 में बड़ी संख्या ऐसे टीचरों की है, जो पहले एक साल के प्रशिक्षण में फेल हो गए। जब वो फेल हो गए तो दोबारा प्रशिक्षण के लिए गए ही नहीं, जबकि डायट से इन्हें अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण लेना था। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि मृतक आश्रित कोटे में लगे जो टीचर फेल हो गए, उन्हें चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी माना जाए। तत्कालीन बीएसए का यहां से तबादला होने के बाद यह मामला भी वहीं दबकर रह गया।

शासनादेश के बावजूद मृतक आश्रित कोटे में लगे जिन 31 टीचरों या प्रशिक्षण नहीं लिया या फिर प्रशिक्षण के डॉयट की ओर से कराए गए टेस्ट में फेल हो गए। तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी इकबाल सिंह ने मृतक आश्रित कोटे में लगे ऐसे टीचरों की सूची भी जारी की जो जनवाणी के पास है। उसी सूची में ये नाम दर्ज हैं जिनमें अध्यापक अब्दुल वकार प्राथमिक विद्यालय कुढला, भरतवीर सहायक अध्यापक गगोल, जगन्नाथ सहायक अध्यापक कुढला, खलीकुर्रहमान किनानगर, ममता, किनानगर रजपुरा, सतीश चंद्र मीरपुर जखेड़ा जानी, अर्जुन सिंह मवी जानी, विनोद पचगांव जानी, राम अवतार खानपुर जानी, गजेन्द्र मीरपुर जखेड़ा, सतीश मीरपुर जखेड़ा जानी, सुखेन्द्र पाल भूपगढ़ी जानी, अनिल किशोरी जानी, जाकिया सुल्ताना रोहटा, अरुण कुमार मवाना खुर्द, कृष्ण वर्मा मवी माछरा, रामकुमार चौधरी खाईखेड़ी परीक्षितगढ़, ज्ञानेश्वर आसिफाबाद परीक्षितगढ़, उमेश अहमदपुरी परीक्षितगढ़, विद्याभूषण अहमदपुरी बढ़ला परीक्षितगढ़, त्रिलोक चंद मडौरा सरधना, अशोक त्यागी अलीपुर सरधना, उत्तम कुमार अलीपुर-2 सरधना, देवेन्द्र सिंह अक्कल पुर सरधना, अब्दुल साजिद लावड़ दौराला, रतन पाल बीहटा दौराला, सुशील कुमार बीहटा दौराला, जहीर पूर्वा कम्बोहगेट शहर मेरठ, हरीश चांदना शोभापुर नगर क्षेत्र, सतेन्द्र कुमार पठानपुर नगर क्षेत्र शामिल हैं। बीएसए इकबाल सिंह की ओर से जारी की गयी, इस सूची को लेकर बताया गया है कि उक्त में से ज्यादातर टीचर डायट के टेस्ट में फेल हैं और दोबारा प्रशिक्षण के लिए भी नहीं गए।

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