कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि किसान मक्का फसल में एनपीके खाद, विशेष रूप से यूरिया (नाइट्रोजन) का अत्यधिक उपयोग करना नुकसानदायक हो सकता है। मक्का फसल में अधिक मात्रा में खाद डालने से फसल को उचित लाभ नहीं मिलता, बल्कि कई बार यह उपज में गिरावट का कारण भी बन जाता है।
अधिक खाद डालने से पौधों की असंतुलित बढ़वार होती है, जिससे दाने नहीं भरते। खेत में खाद की निक्षालन (लिंचिंग) (खाद का बहकर मिट्टी मे नीचे चले जाना) हो जाती है जिससे पौधों को लाभ नहीं मिल पाता। मिट्टी की उर्वरता घटती है और भूजल प्रदूषित होता है। फसल पर कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है। उत्पादन घटता है और लागत बढ़ती है। मक्का के लिए एनपीके(120:60:40 किग्रा/हेक्टेयर) खाद में पोषक तत्व की अनुशंसित मात्रा (प्रति हेक्टेयर) यूरिया (नाइट्रोजन-एन): यूरिया 250 किग्रा/हेक्टेयर (इससे 120 किग्रा नाइट्रोजन की पूर्ति होती है। डीएपी (फास्फोरस-प): डीएपी -130 किग्रा/हेक्टेयर (इससे 60 किग्रा फास्फोरस और 23 किग्रा नाइट्रोजन की पूर्ति होती है) एमओपी (पोटाश-के): एमओपी -65-70 किग्रा/हेक्टेयर (इससे 40 किग्रा पोटाश की पूर्ति होती है) अगर आप यूरिया के साथ डीएपी 46 प्रतिशत पी-205 18 प्रतिशत ए का उपयोग कर रहे हैं तो यूरिया की मात्रा 01 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 200 किग्रा/हेक्टेयर उपयोग करें। संतुलित खाद से पौधों की सही बढ़वार होती है और दाने भरते हैं। उपज ज्यादा और गुणवत्तापूर्ण होती है। मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण सुरक्षित रहता है। खर्च कम होता है, मुनाफा बढ़ता है। कीट और बीमारियों का खतरा कम होता है। नैनो यूरिया की 4-5एमएल का उपयोग ही करें। इसे पत्तियों पर छिड़काव के माध्यम से प्रयोग किया जाता है। नैनो यूरिया का प्रयोग करने से किसानों को 20-30 प्रतिशत तक पारंपरिक यूरिया की बचत होती है।
नैनो यूरिया को किसी भी कीटनाशक या फफूंदनाशक के साथ मिलाकर प्रयोग न करें। नैनो यूरिया का प्रयोग केवल अनुशंसित मात्रा में ही करें। धूप में छिड़काव न करें, सुबह या शाम का समय सबसे उपयुक्त होता है। किसान भाइयों से अनुरोध है कि खाद का अनुशंसित मात्रा में और सही समय पर उपयोग करें ताकि फसल बेहतर हो और लाभ अधिक मिले। अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि अधिकारी, केंद्र, या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।

