Wednesday, March 25, 2026
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अमेरिका के लिए घातक ट्रंप की नीतियां

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अमेरिकी इतिहास जब लिखा जाएगा तो लिखा जाएगा कि एक राष्ट्रपति ऐसे बने थे, जो दुनिया बदल डालने, अपनी उंगली पर नचाने की हनक पाले हुए थे, परंतु खुद भी मजाक के पात्र बन गए थे। आज डोनाल ट्रम्प अमेरिकी इतिहास के सबसे हास्यापद राष्ट्रपति के रूप में जाने जाते हैं, ट्रम्प सुबह पाकिस्तान के साथ होते हैं तो शाम को भारत के पक्ष में हो जाते हैं। कभी चाइना के राष्ट्रपति की तारीफों के पुल बांधने लगते हैं तो कभी रशिया के राष्ट्रपति के सम्मान में नारे लगाने लगते हैं। कभी भारत को मित्र बताते हैं तो कभी भारत को सबसे बड़ा दुश्मन…समझ नहीं आता कि ट्रम्प ऐसा क्यों कर रहे हैं।

जब से ट्रम्प दोबारा राष्ट्रपति बने हैं, तब से ऐसा कोई भी दिन नहीं गया जिस दिन उन्होंने भारत के खिलाफ गलत बयानी न किया हो। पहले 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया, और अब एच-1बी वीजा में सख्ती लगा दी है। ट्रम्प भली भांति जानते हैं कि दक्षिण एशिया में चीन की दादागिरी के सामने अगर कोई टिक सकता है तो वो केवल और केवल भारत है। अन्यथा दक्षिणी एशिया में चाइना अमेरिका की धज्जियाँ उड़ा देगा। ट्रम्प हर दिन भारतीय मीडिया में।ाए रहते हैं। आजकल अपनी वीजा पॉलिसी के लिए खबरों में हैं। हर दिन ट्रम्प भारत के खिलाफ निर्णय लेते हैं जिससे भारत के बाजार में हलचल हो भारतीय लोगों को परेशानी का कारण पड़ता है। ट्रम्प को भूलना नहीं चाहिए कि भारत एक संप्रभुता वाला राष्ट्र है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा को लेकर बड़ा ऐलान किया है। एच-1बी वीजा के लिए आवेदन शुल्क को बढ़ाकर 100000 डॉलर यानी लगभग 88 लाख रुपये कर दिया गया है। इस घोषणा के बाद अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों में हड़कंप मचा हुआ है। अमेरिका में एच-1बी वीजा धारकों की सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है, जिन्हें अब अपनी नौकरी पर खतरा नजर आ रहा है। असमंजस की स्थिति और बढ़ गई जब अमेरिकी दिग्गज कंपनियों ने कर्मचारियों को 21 सितम्बर तक हर हाल में अमेरिका वापस लौटने की सलाह दी। इस बीच वॉइट हाउस ने बयान जारी कर स्थिति को साफ किया है। वॉइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने शनिवार को स्पष्ट किया है कि हाल ही में घोषित 10000 डॉलर का एच1-बी वीजा शुल्क केवल नए वीजा आवेदनों पर लागू होगा। उन्होंने साफ कहा कि यह वार्षिक शुल्क नहीं है।
दरअसल ट्रंप की एच1-बी वीजा में व्यापक बदलाव की योजना ने भारतीय आईटी पेशेवरों और कंपनियों में यह आशंका पैदा कर दी है कि अमेरिका से बाहर रहने वाले वीजा होल्डर को वापस लौटने के लिए तत्काल समय सीमा का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को लेकर भारत में जबरदस्त हलचल हो गई है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स एच-1बी वीजा प्रोग्राम के तहत अमेरिका में नौकरी करने जाते हैं। देखा जाए तो इस कदम से भारतीय परिवारों के लिए मुश्किल पैदा हो सकती है।

एक बड़ी चिंता यह खड़ी हो गई है कि ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के बाद क्या भारत में ऐसे लोग जो अमेरिका जाकर काम करने की ख्वाहिश रखते हैं और सपना देखते हैं। उनका यह सपना टूट जाएगा क्योंकि कंपनियां किसी कर्मचारी के लिए इतनी बड़ी राशि का भुगतान करने के लिए शायद तैयार नहीं होगी। यह फैसला 21 सितंबर से लागू हो गया है। कहा जा रहा है कि अमेरिका के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर ही होगा। दो लाख से ज्यादा भारतीयों पर इसका सीधे तौर पर असर पड़ सकता है।

अमेरिकी आईटी कंपनियों में काम करने वालों पर असर पड़ेगा। अब अमेरिका में कम नौकरियों के अवसर होंगे। अमेरिकी यूनिवर्सिटी में मास्टर या पीएचडी करने वालों पर असर पड़ेगा। पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में सीमित अवसर होंगे. अगर आप पढ़ाई करने गए और वहां पर आप नौकरी का अवसर तलाशते हैं तो वो भी सीमित हो जाएंगे क्योंकि वरीयता होगी अमेरिका के लोगों को लिया जाए। भारतीय छात्रों और लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। अमेरिका में करियर की शुरुआत करने वालों को दिक्कत होगी। अमेरिका में अधिकर भारतीय आईटी क्षेत्र में कार्यरत होते हैं। यानी कि जो लोग जो आईटी प्रोफेशनल्स है या फिर दूसरी कंपनी में काम करते हैं, उनके लिए सबसे ज्यादा इसका असर पड़ने वाला है। मिड-लेवल और एंट्री लेवल कर्मचारियों को वीजा मिलने में मुश्किल आएगी। अमेरिकी कंपनियां नौकरियां दूसरे देशों से आउटसोर्स कर सकती हैं। यानी अब जो दूसरे देश है वहां पर भी इसका उनको अवसर मिलेगा, यानि भारतीयों को भारत के लोगों को इसका सीधा नुकसान हो रहा है। यह कदम केवल भारतीयों पर ही नहीं, बल्कि इसका असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी असर डालेगा, वहां की आर्थिक स्थिति पर असर होगा।

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