जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: दीपावली के बाद भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक भाई दूज का पर्व आज यानि 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) को मनाया मनाया जा रहा है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला यह पर्व यम द्वितीया के नाम से भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस दिन मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे और उनकी बहन ने उनका तिलक कर, आदर-सत्कार किया था। तब यमराज ने वचन दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
तिथि और शुभ मुहूर्त
द्वितीया तिथि प्रारंभ: 22 अक्टूबर, रात 8:16 बजे
द्वितीया तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर, रात 10:46 बजे
भाई दूज पर्व: 23 अक्टूबर (गुरुवार), उदया तिथि के अनुसार
तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त
समय: दोपहर 1:13 PM से 3:28 PM तक
अवधि: कुल 2 घंटे 15 मिनट
विशेष योगों का संयोग
इस बार भाई दूज पर तीन विशेष योगों का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो पर्व को और भी शुभफलदायी बना रहा है:
आयुष्मान योग – 23 अक्टूबर सुबह से 24 अक्टूबर सुबह 5 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग – 24 अक्टूबर, 4:51 AM से 6:28 AM तक
रवि योग – 24 अक्टूबर, 4:51 AM से 6:28 AM तक
इसके अतिरिक्त, विशाखा नक्षत्र और बाद में अनुराधा नक्षत्र भी इस दिन का महत्व बढ़ाते हैं।
भाई दूज का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, यमराज की बहन यमुना ने कई बार अपने भाई को अपने घर बुलाया लेकिन वे नहीं आए। एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज यमुना के घर पहुंचे। बहन ने उनका तिलक कर, स्वादिष्ट भोजन कराया और आदरपूर्वक सत्कार किया। प्रसन्न होकर यमराज ने वचन दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के हाथों तिलक करवाएगा, उसे यमलोक का भय नहीं रहेगा।
तभी से इस पर्व की परंपरा शुरू हुई। बहनें भाई के माथे पर तिलक कर, उसके दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना करती हैं, वहीं भाई बहनों को उपहार व सुरक्षा का वचन देते हैं।
कैसे मनाएं भाई दूज?
भाई को आमंत्रित करें और स्नान कर शुभ वस्त्र धारण करें
बहनें थाल में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई रखें
शुभ मुहूर्त में भाई को तिलक करें, आरती उतारें और मिठाई खिलाएं
भाई बहन को उपहार दें और उसके सुख-समृद्धि की कामना करें

