जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे ने दक्षिण एशिया में नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने कहा था कि पाकिस्तान गुपचुप तरीके से परमाणु परीक्षण कर रहा है, जिससे वैश्विक समुदाय में चिंता की लहर दौड़ गई। अब इस पर भारत ने भी कड़ा रुख अपनाया है और न केवल ट्रंप के बयान का समर्थन किया है, बल्कि पाकिस्तान पर ‘गुप्त और अवैध परमाणु गतिविधियों’ में शामिल होने का आरोप भी लगाया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान का ऐसा इतिहास रहा है जिसमें गुप्त परमाणु सौदे और तस्करी शामिल रही है। उन्होंने कहा —“गुप्त और अवैध परमाणु गतिविधियां पाकिस्तान के इतिहास से मेल खाती हैं, जो तस्करी, निर्यात नियंत्रण उल्लंघन, गुप्त साझेदारियों और ए.क्यू. खान नेटवर्क जैसी घटनाओं से जुड़ा रहा है।”
भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की परमाणु गतिविधियां क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वह इस मुद्दे पर कड़ी निगरानी और कार्रवाई करे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हफ्ते की शुरुआत में घोषणा की थी कि अमेरिका तीन दशकों बाद फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि -“रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान परीक्षण कर रहे हैं, इसलिए हमें भी अपने परीक्षण करने होंगे।”
पाकिस्तान ने इन आरोपों को किया खारिज
वहीं पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उसका आखिरी परमाणु परीक्षण 1998 में किया गया था और उसके बाद से कोई नया परीक्षण नहीं हुआ। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह एक जिम्मेदार परमाणु राष्ट्र है और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बोले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में बड़ा बयान देते हुए तीन दशक बाद परमाणु हथियारों के परीक्षण को फिर से शुरू करने की योजना को सही ठहराया। ट्रंप ने रविवार को बातचीत में कहा कि दुनिया के कई देश पहले से ही परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन वे इसे सार्वजनिक नहीं करते। उन्होंने विशेष रूप से रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान का नाम लेते हुए कहा -“रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन वे इसके बारे में बात नहीं करते। आप जानते हैं, हम एक खुला समाज हैं। हम अलग हैं। हम इसके बारे में बात करते हैं… हम परीक्षण करेंगे, क्योंकि वे परीक्षण करते हैं और दूसरे भी परीक्षण करते हैं।”

