Friday, March 6, 2026
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Jamiat Chief Madani: मदनी का बड़ा बयान, स्कूलों में जिहाद पढ़ाने की मांग, कांग्रेस पर भी कसा तंज

जनवाणी ब्यूरो।

नई दिल्ली: जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने एक कार्यक्रम में जिहाद, देश की सियासत और स्कूलों के पाठ्यक्रम जैसे मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिहाद की अवधारणा को देशभर के स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि इसके वास्तविक अर्थ और उद्देश्य को समझा जा सके। उन्होंने कांग्रेस के जनाधार पर भी सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि जिहाद का विरोध करने वाले लोग समाज में भ्रम फैलाने और आतंकवाद के नाम पर नफरत को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।

जिहाद लफ्ज के दुरुपयोग को लेकर चिंता

इससे पहले एक अन्य साक्षात्कार में भी मदनी ने जिहाद लफ्ज के दुरुपयोग को लेकर चिंता का इजहार किया था। मदनी ने कहा था कि गालियां देने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा था, ‘अगर अन्याय हो रहा है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना भी जिहाद है। वंदे मातरम को लेकर अपनी टिप्पणियों के बारे में एक सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी जबरदस्ती करवाई जा रही है। जगह-जगह कहा जा रहा है कि इसे बोलें ही बोलें। …ये तो आइडिया ऑफ इंडिया नहीं है।

जिहाद के असली अर्थ क्या

उन्होंने कहा कि जिहाद शब्द को इस्लाम से जोड़कर बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से गालियां दी जाती थी। यह सिलसिला लंबे समय तक जारी रहा। बकौल मदनी, ‘अब सरकारी स्तर पर मुसलमानों को गाली दी जा रही है। यह मान लिया गया है कि सभी मुसलमान ‘जिहादी’ और ‘फसादी’ हैं। ऐसे में यह मेरी जिम्मेदारी बन गई है कि मैं जिहाद के असली अर्थ समझाऊं।’

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से जुड़ी एक घटना का जिक्र

मदनी ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से जुड़ी एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, उस समय 90 फीसदी मौन बहुमत था, अब यह घटकर 60 फीसदी हो गया है। जमीयत प्रमुख ने सुप्रीम कोर्ट से जुड़े एक अन्य सवाल के जवाब में कहा, ‘आप मुझ पर यह कहने का आरोप लगा रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट गलत है… मैं केवल कोई व्यक्ति नहीं हूं, मैं एक ऐसे संगठन से जुड़ा हूं जो एक खास समुदाय से जुड़ा है। अगर मैं अपने समुदाय की भावनाओं को देश को नहीं बताऊंगा, तो ऐसा करना नाइंसाफी होगी।

मदनी ने कहा

उन्होंने कहा, ‘संविधान की अवधारणा बहुसंख्यकवाद के खिलाफ है। हालांकि, एक ऐसी जगह है, जहां हमें लगता है कि हमारी असुरक्षा की भावना को समझने के लिए आपका मुसलमान होना जरूरी है। बदले हुए परिदृश्यों की तरफ संकेत करते हुए जमीयत प्रमुख मदनी ने कहा, आज हमें एक ऐसी जगह पर खड़ा कर दिया गया है जहां हमें लगता है कि हमें हाशिये पर धकेला जा रहा है। मैं इस बात का सम्मान करता हूं कि आप मुझसे असहमत हो सकते हैं, लेकिन अगर मैं कुछ कहना चाहूं, तो नहीं कह सकता। देश के हालात को देखते हुए मैं चेतावनी देना चाहता हूं।

मौलाना मदनी आतंकवाद को लेकर क्या बोले

उन्होंने जिहाद को लेकर अपने पुराने बयान और उसके कारण उपजे विवाद को लेकर कहा, ‘मैंने जो कुछ भी कहा है उसका आतंकवाद और हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है। हम राष्ट्रीय विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर एकजुट हैं। जब हम इन मुद्दों पर सहमत होते हैं, तो उनके लिए लड़ना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मदनी ने सवाल किया, अगर कोई आतंकवादी इसे जिहाद कहता है, तो क्या हमें सहमत होना चाहिए कि यह जिहाद है और आतंकवादी को फायदा पहुंचाना चाहिए? या हमें उससे असहमत होना चाहिए और उसकी मान्यताओं पर चोट करनी चाहिए?’

मदनी ने किया सवाल

मदनी ने सवाल किया, क्या हम वही इस्तेमाल करेंगे जो पाकिस्तान करता है, या हम पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान को बेनकाब करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले 30 वर्षों से वे यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि पाकिस्तान द्वारा फैलाए जाने वाले भ्रम से बचना चाहिए, जो भारत के मुसलमानों को नुकसान पहुंचाता है।

हाल ही में उनके उस बयान पर भी विवाद हुआ था जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक जुल्म का अंत नहीं होता, जिहाद जारी रहना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान परिस्थितियाँ अत्यंत संवेदनशील हैं और एक विशेष समुदाय को कानूनी, सामाजिक और आर्थिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘लव जिहाद’, ‘भूमि जिहाद’, ‘शिक्षा जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर इस्लाम की पवित्र अवधारणा का अपमान किया जा रहा है।

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