जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने बीएमसी चुनावों के परिणाम के बाद मराठी समाज और मराठी पहचान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से जाहिर किया। उन्होंने कहा कि भले ही चुनाव में उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं मिली हो, उनका संघर्ष मराठी भाषा, मराठी लोगों और समृद्ध महाराष्ट्र के लिए हमेशा जारी रहेगा।
राज ठाकरे ने अपने संदेश में सबसे पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शिवसेना के सभी निर्वाचित पार्षदों को बधाई दी और कहा, “यह चुनाव आसान नहीं था। यह पैसों और सत्ता की ताकत के खिलाफ शिवशक्ति की जंग थी, लेकिन हमारे कार्यकर्ताओं ने बेहतरीन संघर्ष किया, और उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।”
मराठी भाषा और पहचान के लिए संघर्ष
राज ठाकरे ने मनसे की कुछ कमियों को स्वीकार किया, लेकिन स्पष्ट किया कि चुनाव हारने का मतलब यह नहीं कि उनका संघर्ष समाप्त हो गया। उन्होंने कहा, “हमारा संघर्ष मराठी लोगों, मराठी भाषा, मराठी पहचान और समृद्ध महाराष्ट्र के लिए हमेशा जारी रहेगा। यह संघर्ष ही हमारी असली पहचान है। जो भी गलत हुआ, जो अधूरा रह गया, उसे हम मिलकर सुधारेंगे और आगे की रणनीति बनाएंगे।”
राज ठाकरे ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में सत्ता में बैठे लोग और उनके समर्थक हमेशा मराठी समाज को कमजोर करने की कोशिश करेंगे। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि मनसे और मराठी लोग एकजुट रहेंगे। उन्होंने पार्टी और संगठन को फिर से मजबूत करने का आह्वान किया और कहा, “चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन हमारा हर प्रयास मराठी के लिए है। अब हमें फिर से काम शुरू करना है और पार्टी को नई दिशा में ले जाना है।”
हार के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया दी
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने बीएमसी चुनाव में हार के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया दी और स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है… यह तब तक जारी रहेगी जब तक मराठी व्यक्ति को उसका उचित सम्मान नहीं मिलता।”
MNS का प्रदर्शन निराशाजनक
महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत निराशाजनक रहा। मनसे को 10 से अधिक प्रमुख शहरों में एक भी सीट नहीं मिली, जिनमें पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, पनवेल, वसई-विरार, उल्हास नगर, भिवंडी, नागपुर, सोलापुर, चंद्रपुर और जलगांव जैसे शहर शामिल हैं।
बीएमसी में मनसे को सिर्फ 6 सीटें मिलीं, जबकि ठाणे, नवी मुंबई और नासिक में एक-एक सीट पर पार्टी ने जीत दर्ज की। कल्याण में पार्टी केवल 5 सीटों तक सिमट गई।
यह भी उल्लेखनीय है कि 20 साल बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने चुनाव से ठीक पहले गठबंधन किया था, लेकिन इस गठबंधन का मनसे को कोई खास फायदा नहीं हुआ।

