Wednesday, April 15, 2026
- Advertisement -

आज वसंत पंचमी पर बन रहा खास योग, जानिए पूजा का सही तरीका और शुभ समय

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन त्योहार 23 जनवरी 2026 को पड़ेगा। शास्त्रों के अनुसार, वसंत पंचमी ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। मान्यता है कि इसी दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था।

इस अवसर पर देशभर के मंदिरों, घरों और शिक्षण संस्थानों में विशेष रूप से सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। विद्यार्थी मां सरस्वती की आराधना कर उनसे बुद्धि, विवेक और सफलता का आशीर्वाद मांगते हैं। पूजा में पीले रंग की मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है और सरस्वती वंदना के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त की जाती है।

इस वर्ष वसंत पंचमी केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत शुभ मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन गजकेसरी योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं इस विशेष दिन का महत्व विस्तार से।

सरस्वती पूजन शुभ मुहूर्त

पहला शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक बना रहेगा।

दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट कर रहने वाला है।

तीसरा सुबह 09 बजकर 31 मिनट से 11:05 तक रहेगा।

वसंत पंचमी शुभ योग

इस साल वसंत पंचमी पर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का संयोग बन रहा है। यह दोपहर 2 बजकर 32 मिनट तक मान्य है। फिर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का प्रारंभ होगा। इस दौरान परिध और शिव योग भी बने रहेंगे, जिसमें पूजा करना अत्यंत शुभ होता है।

वसंत पंचमी पर ग्रहों का संयोग

वसंत पंचमी पर शनि की राशि मकर में ग्रहों का विशेष संयोग रहने वाला है। इस राशि में ग्रहों के राजा सूर्य, राजकुमार बुध, सेनापति मंगल और सौभाग्य के कारक शुक्र भी विराजमान रहने वाले हैं। यह सभी ज्योतिष के कल्याणकारी चतुर्ग्रही योग का निर्माण करेंगे।

पूजा विधि

वसंत पंचमी पर सबसे पहले एक चौकी लेकर उसपर देवी सरस्वती की तस्वीर स्थापित कर लें।

अब माता सरस्वती को पीले रंग व उनके श्रृंगार से जुड़ी चीजें पहनाएं।
इसके बाद देवी की पीले चंदन की टीका लगाएं और उन्हें पीले रंग की चुनरी अर्पित कर दें।

सरस्वती माता को अब पीले फूलों से बनी माला अर्पित करें।
अब आप केसरिया मीठे चावल या बेसन के लड्डू भोग के रूप में देवी के समक्ष रखें।

इस दौरान कुछ पीले फल और सिक्के भी पूजा में शामिल कर लें।
आप कुछ किताबें, संगीत उपकरण या शिक्षा से जुड़ी सामग्रियां भी पूजा स्थल के पास रख दें।

अब आप घी का दीप जलाकर ‘सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा।’ का जाप करें।

फिर सरस्वती ॐ सरस्वत्यै नमः मंत्र का नाम लेते हुए वसंत पंचमी से जुड़ी कथा का पाठ कर लें।

देवी को भोग लगातर सभी के साथ आरती करें।

अंत में आप प्रसाद बांट दें और कुछ पीली चीजें या कुछ शिक्षा से जुड़ी चीजों का बच्चों में दान करें।

वसंत पंचमी के दिन करें ये काम

वसंत पंचमी पर पीले चंदन का टिका लगाएं।

आप पीले रंग के वस्त्रों को अवश्य धारण करें।

पुस्तकें या पेन दान कर सकते हैं।

मां सरस्वती की पूजा करें।

सात्त्विक आहार का सेवन करें।

सरस्वती आरती

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण, वैभवशालिनि, त्रिभुवन विख्याता ।।जय..।।

चन्द्रवदनि, पद्मासिनि द्युति मंगलकारी।
सोहे हंस-सवारी, अतुल तेजधारी।। जय.।।

बायें कर में वीणा, दूजे कर माला।
शीश मुकुट-मणि सोहे, गले मोतियन माला ।।जय..।।

देव शरण में आये, उनका उद्धार किया।
पैठि मंथरा दासी, असुर-संहार किया।।जय..।।

वेद-ज्ञान-प्रदायिनी, बुद्धि-प्रकाश करो।।
मोहज्ञान तिमिर का सत्वर नाश करो।।जय..।।

धूप-दीप-फल-मेवा-पूजा स्वीकार करो।
ज्ञान-चक्षु दे माता, सब गुण-ज्ञान भरो।।जय..।।

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी, सुखकारी ज्ञान-भक्ति पावे।।जय..।।

पहला शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक बना रहेगा।

दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट कर रहने वाला है।

तीसरा सुबह 09 बजकर 31 मिनट से 11:05 तक रहेगा।

वसंत पंचमी शुभ योग

इस साल वसंत पंचमी पर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का संयोग बन रहा है। यह दोपहर 2 बजकर 32 मिनट तक मान्य है। फिर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का प्रारंभ होगा। इस दौरान परिध और शिव योग भी बने रहेंगे, जिसमें पूजा करना अत्यंत शुभ होता है।

वसंत पंचमी पर ग्रहों का संयोग

वसंत पंचमी पर शनि की राशि मकर में ग्रहों का विशेष संयोग रहने वाला है। इस राशि में ग्रहों के राजा सूर्य, राजकुमार बुध, सेनापति मंगल और सौभाग्य के कारक शुक्र भी विराजमान रहने वाले हैं। यह सभी ज्योतिष के कल्याणकारी चतुर्ग्रही योग का निर्माण करेंगे।

पूजा विधि

वसंत पंचमी पर सबसे पहले एक चौकी लेकर उसपर देवी सरस्वती की तस्वीर स्थापित कर लें।

अब माता सरस्वती को पीले रंग व उनके श्रृंगार से जुड़ी चीजें पहनाएं।
इसके बाद देवी की पीले चंदन की टीका लगाएं और उन्हें पीले रंग की चुनरी अर्पित कर दें।

सरस्वती माता को अब पीले फूलों से बनी माला अर्पित करें।
अब आप केसरिया मीठे चावल या बेसन के लड्डू भोग के रूप में देवी के समक्ष रखें।

इस दौरान कुछ पीले फल और सिक्के भी पूजा में शामिल कर लें।
आप कुछ किताबें, संगीत उपकरण या शिक्षा से जुड़ी सामग्रियां भी पूजा स्थल के पास रख दें।

अब आप घी का दीप जलाकर ‘सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा।’ का जाप करें।

फिर सरस्वती ॐ सरस्वत्यै नमः मंत्र का नाम लेते हुए वसंत पंचमी से जुड़ी कथा का पाठ कर लें।

देवी को भोग लगातर सभी के साथ आरती करें।

अंत में आप प्रसाद बांट दें और कुछ पीली चीजें या कुछ शिक्षा से जुड़ी चीजों का बच्चों में दान करें।

वसंत पंचमी के दिन करें ये काम

वसंत पंचमी पर पीले चंदन का टिका लगाएं।

आप पीले रंग के वस्त्रों को अवश्य धारण करें।

पुस्तकें या पेन दान कर सकते हैं।

मां सरस्वती की पूजा करें।

सात्त्विक आहार का सेवन करें।

सरस्वती आरती

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण, वैभवशालिनि, त्रिभुवन विख्याता ।।जय..।।

चन्द्रवदनि, पद्मासिनि द्युति मंगलकारी।
सोहे हंस-सवारी, अतुल तेजधारी।। जय.।।

बायें कर में वीणा, दूजे कर माला।
शीश मुकुट-मणि सोहे, गले मोतियन माला ।।जय..।।

देव शरण में आये, उनका उद्धार किया।
पैठि मंथरा दासी, असुर-संहार किया।।जय..।।

वेद-ज्ञान-प्रदायिनी, बुद्धि-प्रकाश करो।।
मोहज्ञान तिमिर का सत्वर नाश करो।।जय..।।

धूप-दीप-फल-मेवा-पूजा स्वीकार करो।
ज्ञान-चक्षु दे माता, सब गुण-ज्ञान भरो।।जय..।।

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी, सुखकारी ज्ञान-भक्ति पावे।।जय..।।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती, PM मोदी समेत अन्य नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर...

वरुथिनी एकादशी का व्रत सौभाग्य, सुख और समृद्धि प्रदान करता है

पंडित-पूरन चंन्द जोशी वरुथनी एकादशी सोमवार 13 अप्रैल, वैशाख कृष्ण...
spot_imgspot_img