जनवाणी ब्यूरो ।
नई दिल्ली: ईरान ने मंगलवार देर रात बासिज फोर्स के कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी और वरिष्ठ नेता अली लारीजानी की मौत की पुष्टि कर दी। इससे पहले इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने दावा किया था कि दोनों नेताओं को एक रात पहले मार गिराया गया।
बताया जा रहा है कि जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दोनों नेताओं की अहम भूमिका रही थी। उनकी मौत ऐसे समय पर हुई है, जब ईरान युद्ध जैसे हालात का सामना कर रहा है। इस्राइल और अमेरिका के जारी हमलों को इस्लामिक गणराज्य के लिए हाल के दशकों की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
अली लारीजानी को ईरान के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता था। अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद उनकी भूमिका और भी अहम मानी जाती थी। वह पूर्व में संसद अध्यक्ष, वरिष्ठ नीति सलाहकार और परमाणु वार्ताओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके थे।
वहीं, जनरल गुलामरेजा सुलेमानी पर अमेरिका, यूरोपीय संघ सहित कई देशों ने प्रतिबंध लगाए थे। उन पर लंबे समय से विरोध प्रदर्शनों को दबाने में शामिल होने के आरोप थे।
इस बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइली हमलों का उद्देश्य ईरान की सरकार को कमजोर करना है, ताकि वहां की जनता को अपनी स्थिति बदलने का मौका मिल सके।
गिदोन सार ने भी इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि इससे ईरानी नागरिकों की सुरक्षा बेहतर होगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लारीजानी पर अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर का इनाम था, लेकिन यह काम उन्होंने बिना किसी कीमत के कर दिया।

