Monday, May 25, 2026
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संभव है स्तन कैंसर से बचाव

रूबी

महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के बाद स्तन कैंसर की ही प्रमुखत: बहुतायत रहती है। आंकड़ों के अनुसार भारत में हर दसवीं महिला की स्तन कैंसर से मृत्यु होती है। उचित खान-पान तथा रहन-सहन के अभाव में महिलाओं में यह कैंसर बढ़ता ही जाता है। अत: इस जानलेवा बीमारी से बचने के लिए जानिए इसके कारण और निदान।

इस बात से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है कि वर्तमान युग में कैंसर जैसी घातक बीमारी से हजारों की संख्या में हर महीने लोगों की जानें जाती हैं। महिलाओं में गर्भाशय व स्तन कैंसर की संख्या अधिक देखने को मिलती है जिससे हर 10 महिलाओं में एक की मृत्यु प्रतिदिन होती है। स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसर में से एक है। इस प्रकार के कैंसर के विषय में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अनेक कारण बताए हैं।

स्तन व गर्भाशय के कैंसर का प्रमुख कारण हार्मोंस के कारण शरीर में आए बदलावों को बतलाया गया है। किशोरावस्था में जिन महिलाओं में एस्ट्रोजन नामक हारमोन अधिक होता है वही परिपक्व अवस्था में स्तन कैंसर की स्थिति हो सकती है। इन सभी प्रमुख कारणों को जानने के पश्चात हमें लगता है कि कैंसर का पता उसकी आरंभिक अवस्था में लगे तो समय पर उसका उपचार संभव है और पूर्णतया इससे मुक्ति भी मिल सकती है।

अत: पीड़िता को चाहिए कि वह आरंभिक अवस्था में ही चिकित्सक के पास जाए क्योंकि एक बार शरीर में कैंसर के फैल जाने के पश्चात चिकित्सक के लिए समस्यापूर्ण स्थिति बन जाती है। संभव है कि आगे इसका इलाज संभव न हो। केवल पीड़िता को ही नहीं वरन् एक स्वस्थ महिला को भी समय-समय पर अपने स्तनों की जांच अवश्य करनी चाहिए। आप स्वयं यह जान सकती हैं कि आपके स्तन स्वस्थ हैं या नहीं।

यह तो चिकित्सक द्वारा ही रोग का निरीक्षण कर पता लगाना संभव है कि कौन सी विधा द्वारा चिकित्सा दी जाए। यहां कुछ ऐसे तथ्य हैं जिनमें आम महिलाएं अनभिज्ञ हैं।

भोजन के प्रकार पर भी काफी निर्भर है कैंसर की रोकथाम

’ अगर आप संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेंगी तो जहां विभिन्न प्रकार की बीमारियों के आक्रमण से बची रहेंगी, वहीं दूसरी ओर आपका रूझान वसायुक्त भोजन एवं चबीर्युक्त आहार की ओर है तो आप निश्चित रूप से न केवल कैंसर वरन् विभिन्न प्रकार की घातक बीमारियों को निमंत्रण दे रही हैं। आप अपने आहार की ओर ध्यान देकर स्तन कैंसर जैसी भयंकर बीमारी की रोकथाम भी कर सकती हैं।

’ जिन महिलाओं के खानदान में ही स्तन कैंसर की बीमारी रही हो, उन्हें मदिरा सेवन से सदैव दूर रहना चाहिए। अधिक मात्रा में मदिरा सेवन कैंसर को शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने का निमंत्रण देता है।

’ चर्बीयुक्त मांस में ओमेगा-6 नामक फैटी ऐसिड रहता है। जो महिलाएं अधिक मांस अथवा चर्बीयुक्त मांस का सेवन करती हैं वे अपनी प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था खो बैठती हैं और कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से लड़ने में असमर्थ होती हैं।

’ ओमेगा-3 नामक फैटी ऐसिड, जो मछलियों में पाया जाता है, वह महिलाओं के लिए लाभदायक सिद्ध हुआ है। यदि शाकाहारी हैं तो उन्हें मछली के तेल वाली गोली लेनी चाहिए। यह कैंसर ‘सेल’ की वृद्धि शरीर में कम कर देती है। इसमें कैंसर विरोधी गुण बतलाये गये हैं।

’ अधिक रेशे वाले खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में अवश्य शामिल करें क्योंकि ये शरीर में एस्ट्रोजन नामक हारमोन्स की मात्रा कम कर देते हैं।

’ फूलगोभी व पत्तागोभी में कैंसर विरोधी तत्व पाये जाते हैं अत: इनका सेवन महिलाओं में लाभदायक सिद्ध हुआ है।

’ विटामिन-सी की प्रचुरता वाले पदार्थ और इसके साथ छोले, उड़द की दाल, मूंग की दाल, मक्की, काले चने आदि लें।

’ सोयाबीन में कैंसर विरोधी गुण देखने को मिलते हैं। चिकित्सकीय राय के अनुसार सोयाबीन का दूध, बड़ियां, आटा, सोया, पनीर अपने भोजन में अवश्य शामिल करें।

’ जिन महिलाओं में किशोरावस्था में एस्ट्रोजन नामक हारमोन्स की मात्रा शरीर में अधिेक देखी जाती है, उन्हें चिकित्सकीय राय के अनुसार उचित दवा लेकर रोका जा सकता है।

’ अत: सभी बातों को ध्यान में रखकर आप कैंसर जैसी घातक बीमारी को शरीर में प्रवेश होने से पूर्व सावधानियां रख कर इससे पूर्णत: निदान पा सकती हैं।

स्वयं जांच कैसे करें?

’ स्तन के आकार अर्थातदोनों के आकार में फर्क महसूस कर रही हों।

’ गोलाई आपको समान लग रही है या स्तन छोटे बड़े लग रहे हैं।

’ प्राकृतिक अवस्था में भी स्तनों की गोलाई छोटी-बड़ी हो सकती है।

’ स्तन की त्वचा, स्तनों की ऊपरी त्वचा शरीर के दूसरे स्थान जैसी नहीं है। कहीं सूखी है या लाल हो गयी है।

’ आप कोई गांठ महसूस कर रही हैं जो भले ही आरंभिक अवस्था में पीड़ादायक नहीं होती हो।

’ आपके निप्पल से कोई द्रव पदार्थ निकल रहा है। अगर ऐसा है तो किस रंग का है?

’ आप लेट कर या आईने के समक्ष खड़े हो कर अपने स्तनों की जांच कर सकती हैं। अगर आप कुछ गांठ सी महसूस करती हैं तो यह आवश्यक नहीं कि वह गांठ जिसे अंग्रेजी में ट्यूमर कहते हैं, वही हो।

ट्यूमर दो प्रकार के होते हैं

बिनाइन ट्यूमर : यह ट्यूमर कैंसर ग्रस्त नहीं होता। ये आम गांठ होती है, जिसे सर्जरी से निकाल दिया जाता है।

मैंलिग्नेंट ट्यूमर : इस प्रकार का ट्यूमर महिलाओं के लिए घातक होता है जिसे यथाशीघ्र ही उपचार करवाना चाहिए। यह धीरे-धीरे समस्त शरीर में फैल जाता है। यह शरीर में फैल जाए तो इसका इलाज मुश्किल हो जाता है। अत: आरंभिक अवस्था में चिकित्सकीय राय लें तथा चिकित्सक से इस विषय पर खुल कर चर्चा करें।

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