जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर कहा है कि अब इस ऐतिहासिक कानून को सच्ची भावना के साथ लागू करने का समय आ गया है।
महिलाओं की भागीदारी पर जोर
अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तब ही संभव है, जब महिलाओं को आगे बढ़ने, निर्णय लेने और नेतृत्व करने के समान अवसर मिलें। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की मांग है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से महिला आरक्षण लागू करना बेहद जरूरी है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होगी।
PM writes a letter to Floor Leaders of all parties in Lok Sabha and Rajya Sabha on Nari Shakti Vandan Adhiniyam, requesting them for their support.
“From the 16th of April, a historic discussion related to the Nari Shakti Vandan Adhiniyam is set to take place in… pic.twitter.com/00W7DHASrH
— ANI (@ANI) April 12, 2026
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन की जरूरत
मौजूदा प्रावधानों के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, यह व्यवस्था 2027 की जनगणना और उसके बाद परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू हो सकती थी।
इस स्थिति में आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता। इसलिए 2029 के चुनावों से इसे लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन जरूरी माना जा रहा है।
संसद का विशेष सत्र बुलाया गया
सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा और जरूरी संशोधनों को पारित करने की संभावना है।
अगर संशोधन पारित होता है, तो लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर 816 तक पहुंच सकती हैं, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
भाजपा का तीन-लाइन व्हिप जारी
विशेष सत्र से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया है। पार्टी ने 16 से 18 अप्रैल के बीच लोकसभा और राज्यसभा में सभी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
निर्देशों के अनुसार, इस दौरान किसी भी सांसद को छुट्टी की अनुमति नहीं होगी और सभी को सदन में उपस्थित रहकर कार्यवाही में भाग लेना होगा।

