जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली के चलते तीन दिनों की तेजी के बाद बुधवार को शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 494.12 अंक टूटकर 78,779.21 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 142.2 अंक गिरकर 24,434.40 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दबाव के बीच रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे गिरकर 93.75 पर आ गया। यह लगातार तीसरा सत्र है जब रुपया कमजोर बना हुआ है।
एचसीएल टेक के नतीजों से निवेशक निराश
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में एचसीएल टेक के शेयरों में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के मार्च तिमाही के नतीजे निवेशकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके।
एचसीएल टेक ने वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही में 4,488 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 4.20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। हालांकि कंपनी प्रबंधन ने टैरिफ और विवेकाधीन खर्च में कमी के कारण मांग के माहौल को अस्थिर बताया है और वित्त वर्ष 2027 के लिए 1 से 4 प्रतिशत की सीमित वृद्धि का अनुमान दिया है।
इन कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट
टेक महिंद्रा, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), आईसीआईसीआई बैंक और एशियन पेंट्स के शेयर भी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। वहीं दूसरी ओर एनटीपीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, ट्रेंट और टाटा स्टील के शेयरों में मजबूती देखी गई।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख
एशियाई बाजारों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट में रहे, जबकि जापान का निक्केई 225 और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। अमेरिकी बाजार भी मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.28 प्रतिशत गिरकर 98.20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि शांति समझौते के बिना युद्धविराम समाप्त होता है, तो ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। इस बयान का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है।

