नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की और शुरुआती कारोबार में ही शानदार तेजी दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों और पश्चिम एशिया से तनाव कम होने की खबरों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे बाजार में खरीदारी का माहौल बना।
मजबूत शुरुआत, सूचकांकों में बड़ी छलांग
बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 500 से अधिक अंकों की तेजी के साथ 77,413 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 150 अंकों से ज्यादा चढ़कर 24,150 के पार निकल गया। यह तेजी दर्शाती है कि बाजार में फिलहाल सकारात्मक धारणा बनी हुई है।
स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी खरीदारी
बड़ी कंपनियों के साथ-साथ छोटे और मझोले शेयरों में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में करीब 0.7% और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.6% की बढ़त दर्ज की गई, जो व्यापक बाजार की मजबूती को दर्शाता है।
इन शेयरों ने दिखाई तेजी
मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी ‘इटरनल’ के शेयर 4% से अधिक उछल गए। इसके अलावा मारुति सुजुकी, अदाणी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इन्फोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे दिग्गज शेयरों में भी 3% तक की तेजी देखी गई। वहीं, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फिनसर्व और एक्सिस बैंक के शेयरों में हल्की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल और एफआईआई की बिकवाली से चिंता
हालांकि बाजार में तेजी के बावजूद जोखिम पूरी तरह टला नहीं है। ब्रेंट क्रूड लगभग 111 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई करीब 99 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है, जो भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचे कच्चे तेल के दाम से महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक दबाव बन सकता है।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली भी जारी है। मंगलवार को एफआईआई ने करीब 2,104 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।
रुपया कमजोर, डॉलर की मांग बढ़ी
डॉलर के मुकाबले रुपया 11 पैसे गिरकर 94.79 पर आ गया। आयातकों की बढ़ती डॉलर मांग और विदेशी पूंजी निकासी इसका मुख्य कारण मानी जा रही है।
भू-राजनीतिक घटनाओं का असर
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद ने बाजार को सहारा दिया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधि रोकने के प्रस्ताव की खबर से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक माहौल को चर्चा में ला दिया है।

