नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट स्वागत और अभिनंदन है। घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को मजबूती का रुख देखने को मिला। सोमवार की गिरावट के बाद प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 418.98 अंक यानी 0.56 फीसदी की बढ़त के साथ 73,943.24 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 भी 123.85 अंक यानी 0.54 फीसदी चढ़कर 23,246.85 पर कारोबार करता दिखा।
वैश्विक और घरेलू दोनों कारकों का योगदान रहा
बाजार में इस तेजी के पीछे वैश्विक और घरेलू दोनों कारकों का योगदान रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब एक फीसदी की गिरावट से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई। वहीं इंडिगो और ट्रेंट जैसे प्रमुख शेयरों में लगभग दो फीसदी की तेजी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया भी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे मजबूत होकर 95.41 के स्तर पर पहुंच गया।
एशियाई बाजारों में भी मार्च के बाद की सबसे बड़ी गिरावट के बाद जोरदार वापसी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सुधार से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। एमएससीआई एशिया पैसिफिक इंडेक्स 1.3 फीसदी की बढ़त के साथ तीन दिनों की गिरावट के सिलसिले को समाप्त करने में सफल रहा।
बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, अमेरिकी बाजारों में चिप कंपनियों की बिकवाली थमने और तकनीकी शेयरों में आई मजबूती ने एशियाई बाजारों को सहारा दिया। डॉव जोन्स फ्यूचर्स 45.43 अंक बढ़कर 50,830.44 पर पहुंच गया, जबकि एसएंडपी 500 और नैस्डैक में क्रमशः 0.30 फीसदी और 0.86 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
तेजी के प्रमुख कारण
अजय बग्गा का कहना है कि अमेरिकी सेमीकंडक्टर शेयरों में सुधार से एआई आधारित कंपनियों को बल मिला है। इसके अलावा, स्पेसएक्स के आईपीओ को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश द्वारा ट्रंप प्रशासन के दौरान लगाए गए 100,000 डॉलर के एच-1बी वीजा शुल्क को रद्द किए जाने से भारतीय आईटी कंपनियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
भू-राजनीतिक राहत का असर
ईरान और इजराइल द्वारा सैन्य संघर्ष समाप्त करने की घोषणा और युद्धविराम प्रयासों को समर्थन मिलने से वैश्विक निवेशकों की चिंता कम हुई है। इसका सकारात्मक असर एशियाई शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया। हालांकि, बग्गा ने कहा कि पिछले छह कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार अन्य उभरते बाजारों की तुलना में कमजोर रहे हैं और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 36,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। इसके बावजूद उन्हें निकट भविष्य में बाजार में सुधार की उम्मीद है क्योंकि भारतीय बाजार फिलहाल ओवरसोल्ड स्थिति में हैं।
आरबीआई का समर्थन भी बना सहारा
बाजार को भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियों से भी समर्थन मिला है। आरबीआई ने एफसीएनआर(बी) से जुड़ी सुविधाओं को अधिसूचित किया है, जिससे 40 से 50 अरब डॉलर तक पूंजी प्रवाह आने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, दूरसंचार क्षेत्र में भी खरीदारी देखने को मिल सकती है, क्योंकि एक उच्च न्यायालय ने 2012 में लगाए गए पूर्वव्यापी स्पेक्ट्रम शुल्क को रद्द कर दिया है।
एशियाई बाजारों में शानदार तेजी
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला रहा और इसमें 4.99 फीसदी की तेज उछाल दर्ज की गई। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.73 फीसदी बढ़कर 65,155 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एसके हाइनिक्स के शेयर 8.1 फीसदी और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर 3.9 फीसदी चढ़े।
दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 1.15 फीसदी गिरकर 93.25 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि सोने की कीमत में 0.48 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
अन्य बाजारों का हाल
जापान का टॉपिक्स इंडेक्स 0.8 फीसदी मजबूत रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक 0.6 फीसदी गिर गया। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 0.3 फीसदी कमजोर हुआ, जबकि शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.2 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। यूरोप में यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स 0.4 फीसदी नीचे कारोबार करता दिखा।
हालिया गिरावट के बाद वैश्विक बाजारों में यह सुधार निवेशकों के लिए राहत लेकर आया है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और एआई सेक्टर में लौटती मजबूती ने बाजारों में नई ऊर्जा भर दी है।

