जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सोमवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद निराशाजनक रहा। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के 100 दिन पूरे होने और वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े निवेशों में तेज बदलाव के कारण घरेलू बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इस दबाव का असर इतना व्यापक रहा कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक ही दिन में करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये घट गया।
बाजार में आज इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
कारोबार के अंत में दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 719.08 अंक यानी 0.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,524.26 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 243.71 अंक यानी 1.04 प्रतिशत फिसलकर 23,123.00 के स्तर पर पहुंच गया और 23,150 के अहम सपोर्ट स्तर से नीचे बंद हुआ।
बाजार में व्यापक बिकवाली के बीच कई बड़े शेयरों पर भी दबाव बना रहा। जियो फाइनेंशियल और इटरनल समेत कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में लगभग 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों को 4.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान कैसे हुआ?
विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट केवल एक दिन की नकारात्मक धारणा का परिणाम नहीं है। वैश्विक बाजारों में एआई ट्रेड से जुड़े निवेशों की आक्रामक अनवाइंडिंग (बड़े पैमाने पर बिकवाली) जारी है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा है।
इस वैश्विक दबाव के चलते निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है। नतीजतन, निफ्टी में हालिया समय में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है और सोमवार की बिकवाली ने निवेशकों की संपत्ति में लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये की कमी कर दी।
कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की निकासी से बढ़ी चिंता
भारतीय बाजार इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है।
1. भू-राजनीतिक तनाव और महंगा कच्चा तेल
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जहां ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए ऊंची तेल कीमतें महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ा सकती हैं।
2. विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली
दूसरी ओर, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक एफआईआई लगभग 28 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय शेयर बेच चुके हैं। इससे बाजार की तरलता पर दबाव बढ़ा है और निवेशकों के विश्वास को भी झटका लगा है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रह सकता है। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और वैश्विक टेक एवं एआई शेयरों में जारी उतार-चढ़ाव के कारण आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी अस्थिर रहने की संभावना है।
ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय सतर्कता बरतने, जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देने और दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

