जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: निर्देशक प्रियदर्शन की फिल्म ‘हैवान’ एक ऐसी साइकोलॉजिकल एक्शन क्राइम थ्रिलर है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत इसके दो दमदार कलाकार हैं। करीब 18 साल बाद अक्षय कुमार और सैफ अली खान एक साथ स्क्रीन पर नजर आ रहे हैं। एक तरफ अक्षय का खतरनाक और रहस्यमयी किरदार है, तो दूसरी तरफ सैफ एक दृष्टिबाधित व्यक्ति के रूप में अपनी समझ, हिम्मत और सूझबूझ से मुश्किल हालात का सामना करते दिखाई देते हैं।
निर्देशक: प्रियदर्शन
कलाकार: अक्षय कुमार, सैफ अली खान, बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, मोहनलाल, असरानी, शारिब हाशमी, पहल चौधरी
अवधि: 2 घंटे 44 मिनट
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐/5
अक्षय कुमार ने पैदा किया खौफ
फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज अक्षय कुमार हैं। उन्होंने परशुराम के किरदार को बेहद शांत लेकिन डरावने अंदाज में निभाया है। उनका विलेन सिर्फ गुस्से और ऊंची आवाज के सहारे खौफ पैदा नहीं करता, बल्कि उसकी शांति ही उसे ज्यादा खतरनाक बनाती है।
अक्षय के चेहरे के एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी उनके किरदार को रहस्यमयी बनाए रखते हैं। दर्शक लगातार यह सोचने पर मजबूर होता है कि परशुराम की अगली चाल क्या होगी। यही अनिश्चितता फिल्म में तनाव बनाए रखने में कामयाब होती है।
सैफ अली खान का संयम बना ताकत
सैफ अली खान श्याम के किरदार में प्रभावी नजर आते हैं। दृष्टिबाधित श्याम अचानक ऐसी परिस्थिति में फंस जाता है, जहां उसे अपनी आंखों के बजाय सुनने की क्षमता, आसपास की चीजों को महसूस करने की ताकत और अपनी समझ पर भरोसा करना पड़ता है।
सैफ ने किरदार की कमजोरी को जरूरत से ज्यादा दिखाने के बजाय उसकी हिम्मत और समझदारी को भी सामने रखा है। खासकर अक्षय कुमार के साथ उनके आमने-सामने के दृश्यों में सैफ का संयम और बारीक अभिनय फिल्म को मजबूती देता है।
अक्षय-सैफ की भिड़ंत है फिल्म की जान
‘हैवान’ की असली ताकत अक्षय कुमार और सैफ अली खान के बीच होने वाला टकराव है। यह सिर्फ नायक और खलनायक की शारीरिक लड़ाई नहीं है, बल्कि दोनों के बीच दिमागी खेल भी चलता है।
परशुराम के पास ताकत और आत्मविश्वास है, जबकि श्याम अपनी सूझबूझ और सहज बुद्धि के सहारे उसके सामने खड़ा होता है। यही अंतर दोनों के बीच होने वाले दृश्यों को रोमांचक बनाता है। दर्शक लगातार यह जानने के लिए उत्सुक रहता है कि अगली बाजी किसके हाथ लगेगी।
पहल चौधरी ने चौंकाया
पहल चौधरी फिल्म में एक बड़ा सरप्राइज साबित होती हैं। उन्होंने अपने किरदार को आत्मविश्वास के साथ निभाया है। उनके अभिनय में मासूमियत और सच्चाई दिखाई देती है, जो कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूत करती है। बड़े सितारों से सजी फिल्म में भी पहल अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहती हैं।
सपोर्टिंग कास्ट ने भी दिया साथ
बोमन ईरानी, सैयामी खेर और श्रिया पिलगांवकर अपने-अपने किरदारों में सहज नजर आते हैं। शारिब हाशमी पुलिस अधिकारी की भूमिका में कहानी के जांच वाले हिस्से को स्वाभाविक बनाते हैं।
दिवंगत अभिनेता असरानी की मौजूदगी भी भावुक कर देती है। पर्दे पर उनका आखिरी नजर आना फिल्म को एक अलग भावनात्मक महत्व देता है।
प्रियदर्शन का निर्देशन मजबूत
प्रियदर्शन अपनी 98वीं फिल्म में एक बार फिर कमर्शियल सिनेमा की समझ दिखाते हैं। फिल्म में एक्शन, रोमांच, तनाव, भावनाओं और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।
फिल्म की लंबाई 2 घंटे 44 मिनट है, लेकिन ज्यादातर हिस्सों में कहानी की गति बनी रहती है। खासकर अक्षय और सैफ के बीच टकराव वाले हिस्से दर्शक की दिलचस्पी बनाए रखते हैं।
बैकग्राउंड म्यूजिक और गाने
फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक इसके तनावपूर्ण माहौल को मजबूत करता है। टकराव वाले दृश्यों में संगीत सस्पेंस और रोमांच को और बढ़ाता है, जबकि कलाकारों के अभिनय पर हावी नहीं होता।
प्रीतम का संगीत भी कहानी के साथ जुड़ा हुआ महसूस होता है। ‘मेरे हीरो है वो’ भावनात्मक असर पैदा करता है, जबकि ‘रंगियारा’ फिल्म के सफर वाले हिस्सों में अच्छी तरह फिट बैठता है।
‘ओप्पम’ का हिंदी रूपांतरण
‘हैवान’ प्रियदर्शन की मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रूपांतरण है। मूल फिल्म देख चुके दर्शकों के लिए कहानी पूरी तरह नई नहीं होगी, लेकिन हिंदी संस्करण में इसे अलग प्रस्तुति और व्यावसायिक रंग देने की कोशिश की गई है।
फिल्म में मोहनलाल की स्पेशल अपीयरेंस भी खास आकर्षण है। मूल फिल्म में अपने किरदार से जुड़े मोहनलाल की मौजूदगी दोनों फिल्मों के बीच एक खूबसूरत कड़ी बनाती है।
Verdict: देखी जा सकती है ‘हैवान’
कुल मिलाकर ‘हैवान’ एक अच्छी साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत इसका अभिनय और अक्षय कुमार-सैफ अली खान का टकराव है। अक्षय ने बिना ज्यादा शोर किए खौफ पैदा किया है, जबकि सैफ ने अपने संयमित अभिनय से किरदार में गहराई जोड़ी है। पहल चौधरी भी प्रभावित करती हैं।
कहानी की जमीन भले ही पहले से जानी-पहचानी हो, लेकिन प्रियदर्शन का निर्देशन, कलाकारों का प्रदर्शन, तनावपूर्ण माहौल और अक्षय-सैफ की भिड़ंत फिल्म को थिएटर में देखने लायक बनाती है।

