जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: नवरात्रि शुरू होने से पहले शहर में होने वाले गरबा आयोजनों को लेकर विवाद शुरू हो गया है। हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाव मंच ने गरबा पंडाल संचालकों से आयोजनों का धार्मिक और पारंपरिक स्वरूप बनाए रखने की अपील की है। समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि प्रत्येक गरबा पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाए और सुबह-शाम आरती के बाद धार्मिक गीतों और भजनों पर गरबा कराया जाए।
समिति ने गरबा पंडालों में प्रवेश की व्यवस्था को लेकर भी कुछ मांगें रखी हैं। तिवारी ने कहा कि प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन कराया जाए। इसके बाद लोगों को पंचगव्य देकर प्रवेश देने की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि इससे गरबा आयोजनों को धार्मिक स्वरूप देने में मदद मिलेगी।
नौ दिनों तक मां की आराधना, गरबा भी नवरात्रि का हिस्सा
नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में घट स्थापना, पूजा, आरती और भजन के आयोजन होते हैं। शाम के समय गरबा और डांडिया भी नवरात्रि उत्सव का प्रमुख हिस्सा बन चुके हैं।
गरबा को मूल रूप से देवी की आराधना से जुड़ी लोक परंपरा माना जाता है। इसमें दीप या देवी के प्रतीक के चारों ओर समूह में नृत्य किया जाता है। समय के साथ शहरों में गरबा के बड़े सार्वजनिक आयोजन होने लगे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। ऐसे में आयोजन की सुरक्षा, प्रवेश व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं को लेकर अलग-अलग संगठन अपनी मांगें उठाते रहे हैं।
पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा और आरती की मांग
चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि गरबा केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मां की आराधना से जुड़ा आयोजन है। इसलिए प्रत्येक पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा विधिवत स्थापित की जानी चाहिए।
उन्होंने आयोजकों से सुबह और शाम मां की आरती कराने की अपील की। उनका कहना है कि आरती के बाद धार्मिक गीतों और भजनों पर गरबा कराया जाए, ताकि पूरे आयोजन में नवरात्रि के धार्मिक स्वरूप को प्राथमिकता दी जा सके।
प्रवेश द्वार पर वराह अवतार की प्रतिमा लगाने की अपील
समिति ने गरबा पंडालों के प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित करने की भी मांग की है। तिवारी के अनुसार, वराह भगवान विष्णु का अवतार है, जिसमें उन्होंने पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाया था।
उन्होंने कहा कि पंडाल में प्रवेश से पहले वराह प्रतिमा का पूजन कराया जाए और इसके बाद लोगों को पंचगव्य देने की व्यवस्था की जाए। पंचगव्य में गाय से प्राप्त पांच पदार्थ—दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र—शामिल होते हैं।
अश्लीलता और फूहड़ता पर भी जताई आपत्ति
गरबा आयोजनों में गीत-संगीत और नृत्य को लेकर भी समिति ने अपनी आपत्ति जताई है। तिवारी ने कहा कि नवरात्रि मां की आराधना का पर्व है, इसलिए गरबा आयोजनों में पारंपरिक स्वरूप को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने आयोजकों से धार्मिक गीतों और भजनों को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि कार्यक्रम में किसी भी तरह की अश्लीलता या फूहड़ता नहीं होनी चाहिए। समिति का कहना है कि पूरे आयोजन का माहौल नवरात्रि की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए।
नियम नहीं माने तो कार्रवाई की चेतावनी
हिंदू उत्सव समिति ने आयोजकों से इन व्यवस्थाओं को अपनाने की अपील करने के साथ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। तिवारी ने कहा कि पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने और नवरात्रि के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने पर जोर दिया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर समिति अपनी ओर से कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी।
नवरात्रि के दौरान शहर में बड़ी संख्या में सार्वजनिक गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में आयोजन शुरू होने से पहले समिति की मांगों ने गरबा पंडालों की व्यवस्थाओं, प्रवेश प्रक्रिया और कार्यक्रम के स्वरूप को लेकर बहस तेज कर दी है।
क्या है पंचगव्य?
पंचगव्य को परंपरागत रूप से गाय से प्राप्त पांच पदार्थों का मिश्रण माना जाता है। इसमें दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र शामिल होते हैं। धार्मिक परंपराओं में इसका इस्तेमाल शुद्धीकरण और पूजा से जुड़े विभिन्न अनुष्ठानों में किया जाता है।

