नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सोशल मीडिया पर इन दिनों 80 के दशक की पुरानी तस्वीरों जैसा रेट्रो लुक काफी ट्रेंड में है। AI और फोटो एडिटिंग टूल्स की मदद से लोग अपनी मौजूदा तस्वीरों को विंटेज और 1980 के दशक के स्टाइल में बदल रहे हैं। लेकिन इस बढ़ते ट्रेंड पर अब साइबर अपराधियों की भी नजर है। ठग रेट्रो फोटो बनाने के लालच का इस्तेमाल लोगों को फर्जी ऐप और संदिग्ध लिंक तक पहुंचाने के लिए कर रहे हैं।
तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) ने लोगों को ऐसे फर्जी विज्ञापनों और फोटो एडिटिंग ऐप्स से सावधान रहने की सलाह दी है। ब्यूरो के मुताबिक, साइबर ठग फ्री या अनलिमिटेड रेट्रो फोटो एडिटिंग की सुविधा का लालच देकर यूजर्स को संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अनवेरिफाइड एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए उकसा रहे हैं।
कैसे हो रही है ठगी?
साइबर ठग सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आकर्षक विज्ञापन और मैसेज शेयर कर रहे हैं। इनमें दावा किया जाता है कि किसी खास ऐप की मदद से यूजर अपनी सामान्य फोटो को कुछ ही सेकंड में 1980 के दशक के रेट्रो लुक में बदल सकता है।
जैसे ही यूजर ऐसे किसी लिंक पर क्लिक करता है, उसे कई बार आधिकारिक ऐप स्टोर के बजाय किसी बाहरी वेबसाइट से APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है। यही इस तरह के फ्रॉड का सबसे बड़ा खतरा है।
एपीके इंस्टॉल करते ही बढ़ सकता है खतरा
संदिग्ध ऐप स्मार्टफोन में इंस्टॉल होने के बाद जरूरत से ज्यादा परमिशन मांग सकता है। इन परमिशन के जरिए साइबर अपराधी डिवाइस में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
इसमें SMS और OTP, कॉन्टैक्ट्स, नोटिफिकेशन, निजी जानकारी, डिवाइस से जुड़ा डेटा और बैंकिंग या वित्तीय जानकारी जैसी संवेदनशील चीजें शामिल हो सकती हैं।
यानी सिर्फ एक फोटो को रेट्रो लुक देने के लालच में डाउनलोड किया गया फर्जी ऐप आपके स्मार्टफोन में मौजूद कई महत्वपूर्ण जानकारियों को खतरे में डाल सकता है।
चोरी हुआ डेटा कैसे बन सकता है मुसीबत?
अगर साइबर अपराधियों के हाथ संवेदनशील जानकारी लग जाती है, तो उसका इस्तेमाल आगे वित्तीय धोखाधड़ी, अनधिकृत ट्रांजैक्शन, पहचान की चोरी और दूसरे साइबर अपराधों के लिए किया जा सकता है।
इसलिए किसी भी वायरल ट्रेंड से जुड़े ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके सोर्स, डेवलपर और मांगी जा रही परमिशन की अच्छी तरह जांच करना बेहद जरूरी है।
इन सावधानियों का रखें ध्यान
- अगर आप भी ऐसे साइबर फ्रॉड से बचना चाहते हैं, तो इन बातों का खास ध्यान रखें:
- SMS, WhatsApp या सोशल मीडिया पर मिले अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- अनवेरिफाइड वेबसाइट या किसी संदिग्ध सोर्स से APK फाइल डाउनलोड न करें।
- फोटो एडिटिंग ऐप को जरूरत से ज्यादा परमिशन देने से बचें।
- ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसके डेवलपर और सोर्स की जांच जरूर करें।
- अगर कोई ऐप बैंकिंग, OTP या दूसरी संवेदनशील जानकारी मांगता है, तो तुरंत सावधान हो जाएं।
- ट्रेंड के नाम पर मिलने वाले फ्री या अनलिमिटेड ऑफर्स पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
80s रेट्रो फोटो बनाते समय भी रहें सावधान
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रेट्रो फोटो बनाने का ट्रेंड अपने आप में कोई साइबर खतरा नहीं है। समस्या तब पैदा होती है, जब साइबर अपराधी किसी लोकप्रिय ट्रेंड का इस्तेमाल लोगों को फर्जी ऐप, संदिग्ध वेबसाइट या मालवेयर वाली APK फाइल डाउनलोड कराने के लिए करते हैं।
अगर आप भी अपनी फोटो को 1980 के दशक के रेट्रो लुक में बदलना चाहते हैं, तो किसी अनजान लिंक या सोशल मीडिया विज्ञापन से ऐप डाउनलोड करने के बजाय भरोसेमंद और आधिकारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें। एक फोटो को नया लुक देने के चक्कर में अपने स्मार्टफोन और निजी डेटा को जोखिम में डालना महंगा पड़ सकता है।

