जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर पेश किए गए प्रस्ताव पर सोमवार को चर्चा होनी है। प्रस्ताव में वर्ष 2000 और 2024 में विधानसभा से पारित प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है। भाजपा ने पहले ही इस प्रस्ताव का विरोध करने की घोषणा की थी।
विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर 25 सितंबर को मुख्यमंत्री की ओर से पेश प्रस्ताव में लाए गए संशोधनों की सूची भी जारी की गई है। अब तक प्रस्ताव में आठ संशोधन पेश किए जा चुके हैं। इनमें चार संशोधन नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्यों, दो पीडीपी, एक कांग्रेस और एक निर्दलीय विधायक की ओर से लाए गए हैं। इन संशोधनों के बाद प्रस्ताव का दायरा और व्यापक होने की संभावना है।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जनता बिजली, पानी और सड़क जैसे बुनियादी मुद्दों पर सवाल उठाती है तो सरकार अनुच्छेद 370 और प्री-1953 व्यवस्था जैसे मुद्दों को सामने लाती है।
सुनील शर्मा ने कहा कि भाजपा जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन अनुच्छेद 370, दो झंडे या दो संविधान जैसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव का दावा
भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के खिलाफ 23 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव दिए जाने की बात कही। भाजपा का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष सदन का संचालन संविधान और संसदीय नियमों के अनुरूप नहीं कर रहे हैं।
हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि उन्हें अभी ऐसा कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के तहत यदि कोई प्रस्ताव प्राप्त होता है तो विधानसभा सचिवालय उसके गुण-दोष के आधार पर फैसला करेगा।
वेल में पहुंचे भाजपा विधायक, प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ीं
सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायक वेल में पहुंच गए और प्रस्ताव के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने प्रस्ताव को गैर-संवैधानिक बताते हुए उसकी प्रतियां भी फाड़ दीं।
भाजपा विधायकों ने ‘कुर्सी छोड़ो’, ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ जैसे नारे लगाए। इससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। इससे पहले शुक्रवार को भी प्रस्ताव को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ था और भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ी थीं।
प्रश्नकाल भी हुआ प्रभावित
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के कुछ विधायकों के सवाल सूचीबद्ध थे, लेकिन विरोध के कारण वे अपने सवाल सदन में नहीं रख सके। भाजपा विधायक वेल में प्रदर्शन करते रहे, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों की ओर से भी नारेबाजी की गई।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ नारे लगाए। इस पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक नाराज हो गए। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर सुनील शर्मा से माफी मांगने की मांग की।
इसके बाद सदन में एक बार फिर हंगामा शुरू हो गया। पूर्ण राज्य के दर्जे के प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और भाजपा विधायकों के बीच जारी टकराव के कारण विधानसभा की कार्यवाही के दौरान लगातार नारेबाजी और विरोध का माहौल बना हुआ है।

