Wednesday, October 21, 2026
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Ahoi Ashtami 2026: कब है अहोई अष्टमी? जानें व्रत की तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करती हैं और अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करती हैं। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार, इस दिन माताएं दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को पूजा करने के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह पर्व करवा चौथ के कुछ दिन बाद और दीपावली से पहले आता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2026 में अहोई अष्टमी कब मनाई जाएगी, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और इस दिन किन धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है।

कब है अहोई अष्टमी 2026?

पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026, रविवार को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 2 नवंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा।

अहोई अष्टमी पर शाम के समय पूजा करने और तारों के दर्शन के बाद अर्घ्य देने की परंपरा है। इस वर्ष 1 नवंबर को शाम के समय अष्टमी तिथि रहने के कारण अहोई अष्टमी का व्रत रविवार, 1 नवंबर 2026 को रखा जाएगा।

इस दिन माताएं सुबह से व्रत रखकर अहोई माता की पूजा करती हैं और संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

अहोई अष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त

अहोई अष्टमी के दिन पूजा और तारों के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, व्रत से जुड़े प्रमुख समय इस प्रकार हैं:

अहोई अष्टमी व्रत: 1 नवंबर 2026, रविवार

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर, दोपहर 2:51 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त: 2 नवंबर, दोपहर 1:10 बजे

पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 4:59 बजे से 6:15 बजे तक

तारों के दर्शन का संभावित समय: शाम 5:22 बजे के आसपास

चंद्रोदय का संभावित समय: रात 11:05 बजे के आसपास

ध्यान दें कि पूजा और तारों के दर्शन का समय स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। व्रत रखने से पहले अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर लें।

अहोई अष्टमी की पूजा विधि

अहोई अष्टमी पर अहोई माता की पूजा श्रद्धा और विधि-विधान से की जाती है। इस दिन पूजा करते समय इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:

सुबह व्रत का संकल्प लें: स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और संतान की खुशहाली की कामना करते हुए व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थल तैयार करें: घर के पूजा स्थान की सफाई करें और अहोई माता की तस्वीर या चित्र स्थापित करें।

पूजन सामग्री अर्पित करें: अहोई माता को रोली, अक्षत, फूल और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।

व्रत कथा सुनें: पूजा के दौरान अहोई अष्टमी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद संतान की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

तारों को अर्घ्य दें: शाम को तारे दिखाई देने पर अपनी परंपरा के अनुसार अर्घ्य दें और बच्चों की लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।

व्रत का पारण करें: पूजा और तारों के दर्शन के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत खोलें। कुछ परिवारों में चंद्र दर्शन के बाद पारण करने की परंपरा भी है।

अहोई अष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व

अहोई अष्टमी का पर्व मातृत्व, संतान के प्रति प्रेम और परिवार की खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अहोई माता की पूजा और व्रत करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सफलता और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस पर्व को विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

इस दिन व्रत रखने के साथ अहोई माता की कथा सुनने, पूजा करने और तारों को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतान पर माता की कृपा बनी रहती है।

अहोई अष्टमी पर किन बातों का रखें ध्यान?

अहोई अष्टमी के दिन पूजा करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। शाम की पूजा में किसी तरह की जल्दबाजी से बचने के लिए पूजन सामग्री पहले से तैयार कर लें।

  • पूजा के दौरान अहोई माता की व्रत कथा जरूर पढ़ें या सुनें।
  • तारों को अर्घ्य देते समय संतान के अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करें।
  • व्रत और पारण के नियमों का पालन अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।

निर्जला व्रत रखने पर अपनी सेहत का विशेष ध्यान दें। यदि कोई बीमारी है, कमजोरी महसूस होती है या नियमित दवाएं लेते हैं, तो उपवास रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026, रविवार को रखा जाएगा। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा-अर्चना करके और तारों को अर्घ्य देकर अपनी संतान के स्वस्थ, सुखी और समृद्ध जीवन की कामना करेंगी।

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