नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। देश में आज भी बड़ी संख्या में लोग अपने पारंपरिक हुनर के दम पर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। कोई लकड़ी का सामान बनाता है, तो कोई कपड़े सिलकर, जूते तैयार करके या मिट्टी के बर्तन बनाकर अपनी आजीविका चलाता है। इन कारीगरों को अपना काम बेहतर बनाने और कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत होती है।
इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना चला रही है। इस योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण, औजार खरीदने के लिए आर्थिक सहायता और अपना काम बढ़ाने के लिए रियायती ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराया जाता है।
अगर आप भी पारंपरिक कारीगरी से जुड़े हैं, तो इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है। आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ किन लोगों को मिल सकता है और इसके तहत क्या-क्या सुविधाएं दी जाती हैं।
किन लोगों को मिल सकता है पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से ये लोग शामिल हैं:
बढ़ई और नाव बनाने वाले कारीगर
अस्त्र बनाने वाले कारीगर
लोहार और हथौड़ा व टूलकिट बनाने वाले
ताला बनाने वाले और सुनार
कुम्हार और मूर्तिकार
मोची और जूते बनाने वाले कारीगर
राजमिस्त्री
टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले
पारंपरिक गुड़िया और खिलौने बनाने वाले
नाई और मालाकार
धोबी और दर्जी
पत्थर तराशने वाले और पत्थर तोड़ने वाले
मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले कारीगर
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को संबंधित पारंपरिक व्यवसाय में काम करने वाला पात्र कारीगर या शिल्पकार होना चाहिए। इसके अलावा, योजना के अन्य नियमों और शर्तों को भी पूरा करना जरूरी है।
औजार खरीदने के लिए मिलते हैं 15,000 रुपये
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को काम में इस्तेमाल होने वाले जरूरी औजार खरीदने के लिए 15,000 रुपये तक की टूलकिट प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इससे कारीगर अपने काम के लिए जरूरी उपकरण खरीद सकते हैं और काम की गुणवत्ता बेहतर बना सकते हैं।
इसके अलावा, योजना के तहत लाभार्थियों को कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान पात्र लाभार्थियों को प्रतिदिन 500 रुपये का स्टाइपेंड देने का प्रावधान है। इससे उन्हें अपना हुनर निखारने के साथ प्रशिक्षण अवधि में आर्थिक सहायता भी मिलती है।
कम ब्याज दर पर मिलता है लोन
अगर कोई कारीगर अपना कारोबार शुरू करना चाहता है या मौजूदा काम को आगे बढ़ाना चाहता है, तो प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत रियायती ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है।
योजना में पात्र लाभार्थियों को दो चरणों में लोन मिल सकता है:
पहला चरण: कारोबार शुरू करने या उसे बेहतर बनाने के लिए 18 महीने की अवधि के साथ 1 लाख रुपये तक का लोन।
दूसरा चरण: पात्रता और निर्धारित शर्तें पूरी करने पर 30 महीने की अवधि के साथ 2 लाख रुपये तक का अतिरिक्त लोन।
इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना, उनके हुनर को बढ़ावा देना और उन्हें अपने व्यवसाय का विस्तार करने में मदद करना है। आवेदन करने से पहले आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी जरूर जांच लें।

