Wednesday, April 15, 2026
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पहले कोरोना, अब बर्ड फ्लू से हाहाकार

  • पोल्ट्री फार्मों में शुरू की जांच, संक्रमण मिला तो बड़ी संख्या में मारे जाएंगे मुर्गे
  • बर्ड फ्लू के केस मिलने से चिकन कारोबारियों को लगा फटका

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पहले कोरोना की मार और अब बर्ड फ्लू ने कारोबार का बट्टा बैठा दिया। बर्ड फ्लू की वजह से माल न मिलने तथा जो एडवांस दिया गया है उसकी वजह से मेरठी चिकन मीट कारोबारियों को करीब पांच करोड़ का फटका लगा है। अभी कोरोना संक्रमण के चलते लगाए गए लंबे लॉक डाउन की वजह से ठीक से उबर भी नहीं पाए थे कि बर्ड फ्लू की आफत ने धंधे को अर्श से फर्श पर ला दिया।

दरअसल वर्तमान मौसम चिकन मीट के कारोबारियों के लिए सीजन लेकर आता है। हालांकि जहां तक खाने के शौकीनों की बात है तो डिमांड तो पूरे साल रहती है, लेकिन नए साल से और सर्दी का मौसम रहने तक चिकन मीट कारोबार के लिए सीजन होता है, लेकिन बर्ड फ्लू के आ जाने से कारोबारियों पर इस बार दोहरी मार पड़ी है। लॉक डाउन में हुए नुकसान और जो पेमेंट गयी थी उसका अभी हिसाब भी नहीं हुआ था कि बर्ड फ्लू के चक्कर में फिर से बड़ी पेमेंट फंस गयी है।

चिकन मीट कारोबारी मोहम्मद नईम ने बताया कि मुश्किल से एक सप्ताह के भीतर करीब पांच करोड़ का नुकसान तो करीब दर्जन भर बडेÞ चिकन मीट के कारोबारी है जिन्हें वह जानते हैं उन्हें हुआ है। इनके अलावा भी करीब दो दर्जन और ऐसे बडेÞ कारोबारी हैं जो चिकन की बड़ी गाड़ियां उतरवाते हैं।

मेरठ ही नहीं आसपास के जनपदों में भी उनकी सप्लाई है। चिकन की गाड़ी मंगवाने के लिए पहले एडवांस भेजना होता है। लॉक डाउन सरीखी कोई आफत आ जाए तो एडवांस गयी पेमेंट लंबे अरसे के लिए फंस भी जाती है। इस बार यदि बर्ड फ्लू लंबा चला तो कारोबारियों का उबरना बेहद मुश्किल होगा। मेरठ के देहात में बड़ी संख्या में पोल्ट्री फार्म चलाए जा रहे हैं।

करीब पांच सौ छोटे बडे पोल्ट्री फार्म पूरे जनपद में चल रहे हैं। हालांकि इनमें से ज्यादातर मेरठ की मार्केट में सप्लाई नहीं करते। माल तैयार होने पर आमतौर पर दिल्ली की गाजीपुर मंडी में माल भेजा जाता है। लेकिन गाजीपुर मंडी बंद होने और किसी पोल्ट्री फार्म में संक्रमण मिलता है तो मेरठ में भी बड़ी संख्या में मुर्गे खत्म किए जाएंगे। पशुपालन विभाग की टीमें हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

किसी भाव लेने को तैयार नहीं

चिकन मीट का कारोबार करने वालों का कहना है कि बर्ड फ्लू का मेरठ में फिलहाल कोई केस नहीं मिला है, लेकिन चिकन का मीट किसी भाव भी लोग लेने को तैयार नहीं है। खासकर पॉश इलाकों से जो लोग आमतौर पर डेली चिकन मीट लेने के लिए आते हैं उन्होंने आना बिलकुल बंद कर दिया है। भले ही दुकानदार कितनी ही सफाई दे, लेकिन किसी भी भाव चिकन लेने को तैयार नहीं।

मछली की बढ़ी डिमांड

दिल्ली रोड स्थित मछेरान और महताब की चिकन मीट मार्केट के कारोबारियों का कहना है कि चिकन की डिमांड एकाएक कम हो गयी है, लेकिन अब लोग फिश फ्राई या फिश कबाब की मांग कर रहे हैं। हालांकि ऐसा नहीं कि चिकन खाना एकदम बंद कर दिया हो, लेकिन जो भी चिकन बिक रहा है या मांगा जा रहा है वो सिर्फ उन दुकानदारों से मांगा जा रहा है जिन पर ग्राहक का भरोसा है। और अरसे से उनके यहां से खरीदते आए हैं।

ये कहना है डीएओ का

जिला पशु चिकित्सा अधिकारी अनिल कंसल का कहना है कि बर्ड फ्लू के केस दिल्ली में मिलना गंभीर बात है। उनकी ओर से पूरे शहर के चिकन कारोबारियों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। साथ ही वन विभाग के अधिकारियों से भी लगातार संपर्क बनाया हुआ है। हालात पर नजर रखे हैं।

बड़ा सवाल: मंडियां बंद तो कहां से आ रहा चिकन

बर्ड फ्लू के तेजी से फैल रहे संक्रमण के चलते जब दिल्ली गाजीपुर समेत हरियाणा व पंजाब आदि की सभी मंड़ियां बंद हैं जहां से मेरठ सहित दिल्ली एनसीआर के जनपदों में चिकन के ट्रक मंगवाए जाते हैं। जब वो बंद हैं तो फिर शहर में जो चिकन बेचा जा रहा है, वह कहां से आ रहा है।

वहीं इस सवाल पर कारोबारी भी कुछ कहना नहीं चाहते। उनका कहना है कि छोटे दुकानदार इधर-उधर से माल उठा रहे हैं, लेकिन साथ ही नसीहत भी देते हैं कि इस तरह की बातें मीडिया न करे तो बेहतर होगा। लोगों के पास काम धंधा है नहीं और छोटे दुकानदार जो गुजारा करने के लिए काम कर रहे हैं उनको तंग करने का काम न किया जाए। वैसे भी अभी मेरठ में कोई केस तो मिला नहीं है, लेकिन सवाल बना हुआ है कि जब तमाम मंडी बंद हैं तो मीट के लिए चिकन कहां से मंगाया जा रहा है।

ऐसे में सवाल उठता है कि हरियाणा और दूसरे राज्यों से शराब की तर्ज पर अब मीट के लिए चिकन की भी तस्करी की जा रही है। सरकार और कारोबारी कह रहे हैं गाजीपुर मंडी बंद है उसके बाद भी होटलों, ढाबों और ठेलों पर चिकन बिरयानी आसानी से मिल रही है। होटलों में भी चिकन के तमाम आइटम मिल रहे हैं। बाजार में कच्चा मीट लेने चले जाए तो भी आसानी से जिंदा चिकन मिल जाएगा।

जब मंडी पर ताले लगे हैं तो यह चिकन आ कहां से रहा है। इसका उत्तर अधिकारियों के पास नहीं है। जिला पशु चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि उनका विभाग केवल बर्ड फ्लू के संक्रमण को जांच करता है, चिकन कहां से आ रहा है। कौन लेकर आ रहा है। कैसे ला रहा है यहां देखना विभाग का काम नहीं। यदि कोई बीमार परिंदा है तो उसकी सूचना जरूर विभाग को दी जा सकती है।

वहीं, दूसरी ओर पता चला है कि देहात के इलाकों से जहां पोल्ट्री फार्म खोले गए हैं वहां से मीट के लिए चिकन मंगाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर बर्ड फ्लू के संक्रमण से डरे पोल्ट्री फार्म संचालक भी माल को जल्द से जल्द खत्म कर देना चाहते हैं।

चिकन गायब, मटन के नखरे

बाजार से जहां चिकन के आइटम गायब हो गए हैं। वहीं दूसरी ओर सर्दी के इस मौसम में डिमांड बढने की वजह से मटन के नखरे हो गए हैं। चिकन मीट को जहां लोग किसी भाव नहीं पूछ रहे हैं वहीं दूसरी ओर बर्ड फ्लू के खौफ के चलते अब नॉनवेज के शौकीनों की पहली पसंद मटन बना हुआ है।

हालांकि मटन के मुकाबले सस्ता होने की वजह से चिकन का मीट ज्यादा पसंद किया जाता था, लेकिन अब मटन की डिमांड बढ़ गयी है साथ ही मटन के रेट भी आसमान छू रहे हैं। चिकन जहां 80 रुपये मिल रहा है। वहां मटन के रेट 600 तक है।

इंसान से नहीं लगता संक्रमण

बर्ड फ्लू का संक्रमण जहां आपस मे परिंदों में तेजी से फैलता है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सकों का कहना है बर्ड फ्लू का संक्रमण इंसान से इंसान में नहीं फैलता, लेकिन यह बहुत घातक होता है। यह तेजी से मानव शरीर पर असर दिखाता है। इसलिए जब तक बर्ड फ्लू का खतरा है तो चिकन या तीतर सरीखे किसी भी पक्षी के मीट से परहेज रखना ही इससे बचाव का एक मात्र तरीका है।

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