Saturday, June 6, 2026
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है कोई जवाब, सड़क में गड्ढे या गड्ढों में सड़क

  • शहर की सड़कों में गड्ढे ही गड्ढे, कौन भरेगा? हालत बद से बदतर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गड्ढा मुक्त सड़कों के दावे की शहर की सड़कें पोल खोल रही है। कलक्ट्रेट से सटे आंबेडकर चौराहे से ईवी चौराहे पर जाने वाली रोड पर जगह-जगह गड्ढे हैं, लेकिन इन गड्ढों को नहीं भरा जा रहा है।

इन्हीं गड्ढों से होकर कमिश्नर व डीएम समेत तमाम अधिकारी यहीं से होकर गुजरते हैं। नगर आयुक्त मनीष बंसल का आवास भी कलक्ट्रेट के समीप है। इसी रोड से होकर उनका प्रतिदिन आवागमन नगर निगम आॅफिस में होता है, लेकिन सड़क के गड्ढे भरने की सुध किसी को नहीं है।

मुख्यमंत्री का सीधा आदेश होने से मुख्यमार्ग से लेकर शहर और गांवों को जोड़ने वाले मार्गों को गड्ढा मुक्त कराने की आपाधापी मची है। शासन के कोप से बचने को सड़कों के गड्ढों का लीपापोती कर काला करने का जो काम चल रहा है, उसे अभी से यह सवाल उठने लगे हैं कि गड्ढे कितने दिन बंद रहेंगे।

गड्ढा बंद कराने में मानक और गुणवत्ता की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अधिकारी भी शासन के कोप से बचने के लिए गुणवत्ता के बजाय सारा ध्यान इस पर केंद्रित किए हैं कि किसी तरह गड्ढे बंद हो जाए। ईव्ज चौराहे से अंबेडकर चौराहे तक जाने वाली रोड एक तरह से वीवीआईपी कही जाती है।

क्योंकि तमाम वीआईपी इसी पर रहते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) का शंकर आश्रम स्थित आॅफिस भी इसी रोड पर हैं, लेकिन इसको लेकर जनप्रतिनिधियों ने भी आंखें मूंद रखी है। यह हालत तो आरएसएस के आॅफिस जाने वाली रोड की हैं।

जिसकी एक फोन कॉल पर सड़क को दुबाना बनाया जा सकता है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही तो देखिये कि आरएसएस के आॅफिस में वीवीआईपी भी आते जाते रहते हैं, मगर इसके बाद भी क्षतिग्रस्त सड़क को ठीक नहीं कराया जा रहा है। शहर में जब भी प्रदेश के ऊर्जा मंत्री आते है।

तब वह भी शंकर आश्रम पर अवश्य जाते हैं, इसका खौफ भी अधिकारियों को नहीं हैं। यही वजह है कि वीवीआईपी रोड को नये स्तर से बनाना तो दूर मरम्मत तक नहीं की जा रही है। डीएम आवास के चारों तरफ एमडीए ने रोड बनाई थी, वो भी अब टूटने लगी हैं।

इसकी मरम्मत तो कर दी गई, लेकिन शंकर आश्रम से ईव्ज चौराहे व अंबेडकर चौराहे की तरफ जाने वाली सड़क की मरम्मत कौन करेंगा? यह बड़ा सवाल है। यह हालत तो वीवीआईपी सड़कों की हैं, बाकी शहर की हालत क्या होगी? इसी से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

बागपत रोड की भी हालत बद से बदतर

बागपत रोड पर जगह-जगह गड्ढे हैं। उसमें कह दिया जाता है कि यह पीडब्ल्यूडी की रोड है। पीडब्ल्यूडी ही इसकी मरम्मत करेगा। रोड किसी की भी हो, लेकिन जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फुटबाल चौराहे से लेकर मलियान ओवर ब्रिज तक सड़क की बुरी हालत हैं। इसकी मरम्मत भी नहीं की जा रही है।

आखिर शहर की सड़कों की दशा नहीं सुधारी जा रही है तो ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की हालत क्या होगी? नगर निगम व पीडब्ल्यूडी को संयुक्त रूप से शहर की सड़कों को सुधारने की दिशा में काम करना चाहिए। एमडीए भी जनता के हित के लिए काम करता हैं, लेकिन एमडीए भी शहर की एक सड़क नहीं बना पा रहा है। इस तरह से शहर की खराब सड़कों के लिए जवाबदेही किसकी हैं? आखिर लापरवाह अफसरों पर क्या जनप्रतिनिधि व सरकार में बैठे मंत्री कार्रवाई करेंगे?

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मेरठ-करनाल हाइवे में भी गड्ढे ही गड्ढे

मेरठ-करनाल हाइवे की हालत भी खराब है। जगह-जगह इसमें गड्ढे बन गए हैं, जिसके चलते दुर्घटना भी हो रही हैं। मगर नेशनल हाइवे अथॉरिटी को इसकी चिंता नहीं हैं। मिट्टी से गड्ढे भर दिये जाते हैं, जिसके चलते हाइवे पर धूल उड़ती रहती हैं। एनएचएआई इसको लेकर लापरवाह क्यों बना हुआ हैं।

नई सड़क बनाने में तो एनएचएआई रूचि लेता हैं, मगर मरम्मत करने में क्यों नहीं? इसको लेकर भी एनएचएआई को गंभीरता के साथ काम करना होगा। कहा जा रहा है कि नये सिरे से मेरठ-करनाल हाइवे का निर्माण किया जा रहा हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब तक नयी सड़क का निर्माण होता हैं, तब तक जनता को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सड़क की मरम्मत भी तो की जानी चाहिए।

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