जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर की पशु डेरियों का गोबर नगर निगम के लिए चुनौती बना हुआ है। इस चुनौती को स्वीकार कर नगर आयुक्त मनीष बंसल ने बिग प्लान तैयार किया है। डेयरी संचालकों के सहयोग से ही यह गोबर निस्तारण किया जाएगा। नगर निगम शहर की प्रत्येक डेयरी से गोबर का कलेक्शन करेगा तथा निश्चित स्थान पर गोबर एकत्र कर उसका कंपोस्ट खाद तैयार कर किसानों को बेचा जाएगा।
इससे नगर निगम की आमदनी भी होगी। कुछ इसी तरह का प्लान नगर निगम ने तैयार किया है। हालांकि यह उम्मीद कम ही है कि डेयरी संचालक गोबर कलेक्शन के लिए निर्धारित किए जाने वाली धनराशि नगर निगम को प्रत्येक माह उपलब्ध कराएगी भी या फिर नहीं।
इसको लेकर संशय की स्थिति पैदा हो सकती हैं, लेकिन अब इस प्लान पर नगरायुक्त ने वर्क किया है तो उम्मीद भी जगी है कि कम से कम नालों में गोबर नहीं बहाया जाएगा। दरअसल, डेयरी संचालकों ने कैटल कॉलोनी की मांग की थी। इस मांग को नगर निगम पूरा नहीं कर पा रहा है।
यह मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है, जहां पर शहर की तमाम डेरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की मांग याचिकाकर्ता ने की है, लेकिन नगर निगम हो या फिर मेरठ विकास प्राधिकरण दोनों ही विभागों ने कैटल कॉलोनी के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर हाथ खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद ही नगर नगर आयुक्त मनीष बंसल ने डेयरी संचालकों के सहयोग से गोबर का निस्तारण करने का प्लान तैयार किया है।
यह पूरी योजना बना ली गई है। इसके अलावा भी इसमें तीन से चार विकल्प और भी विचाराधीन है। अब देखना यह है कि गोबर निस्तारण का प्लान नगर निगम का कितना सफल होता हैं या फिर नहीं। गोबर से केचुआ खाद, कंपोस्ट खाद तैयार किया जाएगा। इससे नगर निगम की आमदनी भी बढ़ेगी।
बड़ा सवाल: हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी डेयरी शहर से बाहर शिफ्ट क्यों नहीं?
पशु डेरियों को शहर से शिफ्ट करने के लिए हाईकोर्ट कई बार नगर निगम के अधिकारियों को फटकार भी लगा चुका हैं। हाईकोर्ट की तमाम सख्ती के बावजूद आखिर पशु डेरियों को शहर से शिफ्ट क्यों नहीं किया जा रहा है? कैटल कॉलोनी ही डेरियों के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं, लेकिन इस दिशा में नगर निगम व एमडीए कोई प्रयास कर रहा हैं। डेयरी संचालक भी चाहते है कि कैटल कॉलोनी उन्हें मुहैय्या कराई जाए।
क्योंकि इसका स्थाई समाधान यही हैं। इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। पिछले एक वर्ष से हाईकोर्ट के आदेश पर कैटल कॉलोनी के लिए कई विभाग कवायद कर रहे थे, लेकिन अचानक कैटल कॉलोनी से कदम पीछे खींच लिये गए तथा गोबर कलेक्शन करने पर सहमति बन गई। क्या यह डेरियों से निजात के लिए यह स्थाई समाधान हैं? यह बड़ा सवाल है।
निगम के अधिकारी भी मानते है कि गोबर कलेक्शन स्थाई समाधान नहीं हैं, लेकिन जमीन नहीं मिलने के कारण कैटल कॉलोनी विकसित नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट में तमाम शपथ पत्र एमडीए व नगर निगम ने दाखिल किये हैं, जिसमें कैटल कॉलोनी की बात तो की गई, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। शहर में दो हजार से ज्यादा पशु डेरिया हैं, जिसके लिए निगम को फुल प्लान तैयार करना होगा।
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना का कहना है कि गोबर कलेक्शन से काम नहीं चलेगा। क्योंकि डेयरी संचालक गोबर को नाले में बहाने से बाज आने वाले नहीं हैं। फिर इसके लिए पैसा कलेक्शन पर भी सवाल है। इसमें डेयरी संचालक भी कन्नी काट सकते हैं। केटल कॉलोनी ही शहर से बाहर विकसित की जानी चाहिए, तभी इसका स्थाई समाधान संभव हो सकता है।
गाजियाबाद में गोबर कलेक्शन किया जा रहा हैं, लेकिन मेरठ में तो दो हजार से ज्यादा पशुओं की डेरिया हैं। गली मोहल्लों में डेरिया बनी हुई है। यहां गोबर कलेक्शन संभव नहीं हो सकता। यह समस्या बनी रहेगी। इसके स्थाई समाधान की दिशा में नगर निगम अधिकारियों को प्लानिंग तैयार करनी चाहिए।

