Thursday, June 18, 2026
- Advertisement -

लियाकत अली व आइरिन की प्रेम कहानी का गवाह ‘कहकशां’

  • पाक के प्रथम प्रधानमंत्री ने किया था प्रेम विवाह मुजफ्फरनगर में उनकी यादों के निशा
  • नवाब करनाल का मुजफ्फरनगर में था जागीरदारा, यही से हुआ था राजनीतिक कॅरियर भी शुरू
  • गुलाम भारत में वित्त मंत्री रहे थे लियाकत अली खां, कायदे आजम जिन्ना के थे बेहद करीबी

मिर्जा गुलजार बेग |

मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर के कंपनी बाग के सामने स्थित पाक के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खां का बंगला ‘कहकशां’ उनकी तथा उनकी धर्मपत्नी आइरिन पंत जो बाद में राणा लियाकत अली खां की प्रेम कहानी की गवाह है। इस बंगले में लियाकत अली खां व आइरिन पंत काफी समय रहे, जिसमें उनकी यादें शेष हैं। हालांकि अब इस बंगले में एक स्कूल संचालित हो रहा है, परन्तु फिर भी यह बंगला मुजफ्फरनगर के लिए एक धरोहर है। ब्रिटिश दौर में यह बंगला राजनीतिज्ञों और अंग्रेजों की आवाजाही का साक्षी रहा है।

1947 में भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था, जिसके बाद 14 अगस्त 1947 को पाक के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली बनाए गए थे। लियाकत अली खां का मुजफ्फरनगर में जमीदारा था और उनका राजनीतिक कॅरियर भी मुजफ्फरनगर से ही शुरू हुआ था। 1926 में लियाकत अली खां को मुजफ्फरनगर विधान परिषद से सदस्य चुना गया था। बताते हैं कि जब लियाकत विधान परिषद सदस्य थे, तो वह लखनऊ में गये हुए थे, तो इसी दौरान उनकी मुलाकात आइरिन पंत से हुई थी, जो अपने विश्वविद्यालय में होने वाले कार्यक्रम के लिए कूपन बेच रही थी। लियाकत आइरिन से प्रभावित हुए थे और उन्होंने आइरिन के सभी कूपन इस शर्त पर खरीदे थे कि आइरिन यह कार्यक्रम उनके साथ बैठकर देखेगी, जिसे आइरिन ने कबूल कर लिया था। यही से दोनों की प्रेम कहानी शुरू हुई थी। वर्ष 1932 में दोनों ने शादी कर ली थी, जिसके बाद आइरिन पंत ने इस्लाम कबूल करते हुए अपना नाम बेगम राणा लियाकत अली खां रख लिया था।

38 10

पूर्व आईजी अवतार नारायण कौल ने अपनी किताब ‘जाने कहां गए वो दिन’ में लिखा है कि लियाकत अली खां ने मुजफ्फरनगर के मेरठ रोड पर अपनी दूसरी पत्नी की मोहब्बत में ‘कहकशा’ निर्माण कराया था। उस दौर में शहर में यह पहली अत्याधुनिक कोठी थी। दो मंजिला कोठी में आम आदमी का प्रवेश संभव नहीं था। उन्होंने लिखा है कि लियाकत अली खां की यह बेगम गैर मुसलिम परिवार से थीं। लियाकत के साथ वह भी पाक चली गईं। बाद में सरकार ने बंगले को शरणार्थी संपत्ति घोषित कर दिया। कुछ समय एडीएम फैंथम भी इसमें रहे।
कौन थी शैला आइरिन पंत शैला आइरिन पंत ब्रिटिश सेना के मेजर जनरल हेक्टर पंत की पुत्री थी।

37 11

हेक्टर पंत वैसे तो कुमाउंनी ब्राहमण थे, परन्तु उन्होंने परिवार समेत 1887 में अपना धर्म परिवर्तन कर लिया था तथा वह ईसाई बन गये थे। आइरिन पंत उत्तराखंड के अल्मोडा की रहने वाली थी। यह 1927 में लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के लिए गई थी और यहीं से उन्होंने स्नातक किया। जब वह यहां से स्नातक कर रही थी, तो उनके स्कूल में एक ड्रामा आयोजित किया गया था, जिसके लिए स्कूल प्रबन्धन ने विद्यार्थियोंं को बेचने के लिए टिकट दिये थे। आइरिन को भी टिकट बेचने थे। जब वह टिकट बेच रही थी, तो उनकी मुलाकात लियाकत अली खां से हो गई थी, जिन्होंने इनके सभी टिकट खरीद लिये थे और यही से लियाकत व आइरिन की प्रेम कहानी की शुरूआत हुई थी, जो बाद में शादी में बदल गई थी।

39 8

कौन थे लियाकत अली खां

लियाकत अली खां नवाब करनाल थे। ब्रिटिश हुकूमत के अधीन सरकार में वर्ष 1946 में लियाकत को भारत का पहला वित्त मंत्री बनाया गया था। वर्ष 1932 से 1940 तक उनका संयुक्त प्रांत विधान परिषद में मुजफ्फरनगर क्षेत्र से प्रतिनिधित्व रहा। 1895 में करनाल (हरियाणा) में जन्मे लियाकत को यह इलाका जमींदारी में मिला। एएमयू से बीएससी और कानून की डिग्री के बाद उन्होंने आॅक्सफोर्ड से एलएलएम किया। कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना से लियाकत की नजदीकी ने उन्हें पाक का प्रधानमंत्री बनवा दिया था। 16 अक्टूबर 1951 को प्रधानमंत्री लियाकत की रावलपिंडी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

‘कहकशां’ में दिखाई देती है ब्रिटिश काल की संरचना

पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खां के मुजफ्फरनगर स्थित बंगले ‘कहकशां’ में ब्रिटिश काल की संरचना दिखाई देती है। ‘कहकशां’ एक सफेद बंगला है, जिसमें मैनीक्योर लॉन, पेड़ों की पंक्तियाँ और मुजफ्फरनगर के कंपनी बाग क्षेत्र में स्थित लोहे के ग्रिल हैं। यह बंगला वर्तमान में मुजफ्फरनगर के पुरकाजी क्षेत्र के एक परिवार के संरक्षण में है, जो दावा करते हैं कि उनके पूर्वजों ने लियाकत अली खान के परिवार से इसे खरीदा था। यह परिवार इस बंगले के एक हिस्से में एक पब्लिक स्कूल चलाता है। यह हिस्सा केवल छात्रों और कभी-कभी उनके माता-पिता के लिए ही सुलभ है। इस बंगले के फोटो खींचने या वीडियो बनाने पर आपत्ति जताई जाती है और सुरक्षा गार्ड इस ऐतिहासिक इमारत की फोटोग्राफी नहीं करने देते हैं।

मेहमाननवाजी का भी गवाह रहा है यह बंगला

1947 से पहले लियाकत अली खान के परिवार द्वारा कहकशां में मेहमान नवाजी की जाती थी। मुजफ्फरनगर के बुजुर्ग नागरिकों का दावा है कि लियाकत अली खान अपने परिवार के साथ बंगले से कुछ सौ मीटर की दूरी पर दूसरे घर में रहते थे। वह घर वर्तमान में एक सरकारी कार्यालय और आवासीय क्वार्टर में तब्दील हो चुका है। यह बंगला मुख्य रूप से नवाबों के रूप में परिवार का एक मनोरंजक केंद्र था और साल के अधिकांश भाग में उनके लिए बुलाए जाने वाले आगंतुक वहां रहते थे। लियाकत एक प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखते थे, जिनका ब्रिटिश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मजबूत संबंध था, जो अक्सर उनकी बड़ी हवेली जाते थे।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

JOB: ग्रेजुएट्स के लिए सरकारी नौकरी, एनआईएसीएल अप्रेंटिस भर्ती शुरू

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: देश के एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय...

NEET: टेलीग्राम बैन विवाद, केजरीवाल बोले- “सरकार की मंशा पेपर लीक रोकने की नहीं”

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: नीट री-एग्जाम से पहले केंद्र...

UGC NET जून 2026: एनटीए ने जारी किए एडमिट कार्ड, यहां देखें डिटेल्स

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...
spot_imgspot_img