Monday, May 4, 2026
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साल भर से नहीं खुले स्पोर्ट्स हॉस्टल

  • कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में हैं तीन स्पोर्ट्स हॉस्टल
  • बॉक्सिंग हॉस्टल के खिलाड़ियों का रहा दबदबा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना काल में जहां स्कूल कॉले समेत स्पोर्ट्स संस्थान और मैदानों को बंद किया गया हैं। वहीं, स्पोर्ट्स हॉस्टल भी अभी तक नहीं खुल सके हैं। जिससे खिलाड़ियों का तो नुकसान हो रहा है। वहीं, हॉस्टल भी अभी तक सूने दिखाई दे रहे हैं। कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम स्थित तीनों स्पोर्ट्स हॉस्टल एक साल से भी अधिक समय से नहीं खुल सके हैं। सरकार के निर्देशानुसार हॉस्टलों को अभी तक बंद किया गया है।

कोरोना काल में एहतियातन सभी खेल संस्थानों और मैदानों को बंद किया जा चुका है। वहीं, इसी वजह से स्पोर्ट्स हॉस्टल में रहने वाले खिलाड़ियों को भी पहले ही उनके घर भेजा जा चुका है। जिसके चलते खिलाड़ियों से खचाखच भरे रहने वाले हॉस्टल इन दिनों सूने पड़े हैं।

गौरतलब है कि कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में तीन स्पोर्ट्स हॉस्टल हैं। स्टेडियम में बॉक्सिंग, कुश्ती और क्रिकेट के हॉस्टल हैं। जिनमें प्रदेश भर के खिलाड़ियों का प्रवेश लेने के लिए प्रतिस्पर्धा लगी रहती है। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं है। स्पोर्ट्स हॉस्टल के सभी खिलाड़ियों को पिछले वर्ष ही घर लौटने के लिए बोल दिया गया था। जिससे हॉस्टल अब खाली ही नजर आते हैं।

शासन द्वारा कोरोना काल के बीच स्कूलों को तो खोला गया था। लेकिन स्पोर्ट्स हॉस्टल के लिए कोई गाईडलाइंस जारी नहीं की गई थी। वहीं इस संबंध में क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी आले हैदर का कहना है कि सभी स्पोर्ट्स हॉस्टल को सरकार के दिए हुए निर्देशों के अनुसार बंद किया गया है। पिछले साल के बाद से ही हॉस्टल नहीं खोले गए। सभी खिलाड़ियों को भी उनके घर वापिस भेज दिया गया था। निर्देश जारी होने के बाद ही हॉस्टल खोले जाएंगे।

इस बार नहीं हुई प्रवेश प्रक्रिया

प्रत्येक सत्र के शुरुआत में स्पोर्ट्स हॉस्टल के लिए प्रवेश प्रक्रिया की जाती है। लेकिन इस बार सत्र के शुरुआत में प्रवेश प्रक्रिया ही नहीं की गई। यानि हॉस्टल पिछले एक साल से सूने पड़े हुए हैं। वहीं, गौरतलब है कि स्टेडियम के बॉक्सिंग हॉस्टल अपने खिलाड़ियों के लिए भी जाना जाता है। स्टेडियम के कई मुक्केबाज नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर अपनी छाप छोड़ चुके हैं।

वहीं, इन दिनों हॉस्टल में एक भी खिलाड़ी नहीं है। जिसके चलते स्टेडियम बंद होने के पहले तक भी बॉक्सिंग के कुछ ही लोकल खिलाड़ी अभ्यास करते नजर आते थे। बॉक्सरों की संख्या भी स्टेडियम से इन दिनों घटती जा रही है। जबकि किसी समय में यहां का शीर्ष खेल बॉक्सिंग को ही माना जाता था। इसके परिणाम भी यह हैं कि पिछले डेढ़ वर्ष में एक भी स्टेट लेवल बॉक्सिंग प्रतियोगिता तक आयोजित नहीं हो सकी है। उधर, कुश्ती हॉस्टल के खिलाड़ी भी मैट पर अभ्यास करते नजर आते थे, लेकिन कुश्ती हॉस्टल के खिलाड़ियों को भी पिछले वर्ष घर वापस भेज दिया गया था।

खत्म हुए स्टेडियम से क्रिकेट

कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम से क्रिकेट का वजूद मिटता जा रहा है। किसी समय में यहां पर कई बड़े मैच भी हुए हैं। जिसमें अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने भी अपने प्रदर्शन का जलवा दिखाया है। लेकिन अब यहां के क्रिकेट हॉस्टल के खिलाड़ियों को अभ्यास करने का भी अभाव झेलना पड़ता है।

हॉस्टल खुले होने पर भी यहां के खिलाड़ियों की संख्या दस 15 के बीच ही नजर आती है। वहीं, मैच के नाम पर खिलाड़ियों को दूसरे मैदानों का सहारा लेना पड़ता है। जबकि शासन द्वारा क्रिकेट कोचों की व्यवस्था भी स्टेडियम में की गई है।

हर वर्ष जारी होता है हॉस्टल के लिए बजट

स्पोर्ट्स हॉस्टल के लिए हर सत्र में शासन द्वारा बजट जारी किया जाता है। खेल बजट में स्पोर्ट्स हॉस्टल के लिए विशेष धनराशि जारी की जाती है। जो कि इस साल भी जारी की गई थी, लेकिन हॉस्टल्स को खोला ही नहीं गया। जिस समय सभी स्कूलों को भी गाइडलाइंस के चलते खोल दिया गया था। उस समय भी हॉस्टल की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।


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