Wednesday, May 6, 2026
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महंगाई चरम पर, चर्चा सिर्फ सुशांत-रिया की !

पूरे देश को सुशांत सिंह राजपूत और रिया चक्रवर्ती के भ्रमजाल में फंसाकर महंगाई ने दबे पांव रसोईघर में इस कदर प्रवेश कर लिया कि लोगों की जेबें ढीली होने लगी है। कोरोना से बुरी तरह टूट चुके गरीबों और मध्यम वर्ग को इस महंगाई ने बुरी तरह से तोड़ कर रख दिया है। हैरानी की बात ये है कि सरकार के पास महंगाई पर नियंत्रण करने के लिये कोई योजना नहीं है। महंगाई तो छोड़िये सरकार लगातार गिर रही जीडीपी पर भी खामोशी धारण किये हुए है। कोरोना, महंगाई और जीडीपी को दरकिनार कर देश को बॉलीवुड में डुबोने की साजिश रचने का परिणाम यह है कि महंगाई रूपी डायन ने सभी को गिरफ्त में ले लिया है। सब्जी, फल और दालों के दाम आसमान छू रहे हैं। मंडी से निकलने के बाद सब्जियों और फलों के दामों पर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है।

महंगाई ने उड़ाई नींद, खरीदार घटे

जनवाणी ब्यूरो |

मेरठ: पिछले माह से लेकर अब तक के सफर में सब्जियों व फलों पर भारी उछाल आया है। जिसके चलते आम आदमी की पहुंच से फल एवं सब्जियां काफी हद तक दूर होने लगी है। महंगाई के कारण फलों एवं सब्जियों की खरीदारी में भी काफी हद तक गिरावट आ गई है। वहीं, खरीदारी में गिरावट आने के कारण फल एवं सब्जियों के विक्रे ताओं में भी मायूसी छाई हुई है, वहीं खरीदारों की रसोई का बजट भी बिगड़ा हुआ है।

लॉकडाउन के बाद अब अनलॉक में आम आदमी द्वारा जहां उम्मीद की जा रही थी कि फल और सब्जियों के दामों में कुछ गिरावट आ जाएगी, वहीं फलों और सब्जियों के दामों पर आए भारी उछाल ने लोगों की नींद हराम कर दी है। पिछले माह की अपेक्षा इस माह में फलों एवं सब्जियों पर औसतन 20 से 25 रुपये प्रति किलों की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। फल एवं सब्जी मंडी से लेकर के फुटकर विक्रेताओं व ठैलियों के दामों में भी भारी अंतर देखने को मिल रहा है।

आलू, टमाटर, गोभी, बैंगन, तौरई, लौकी आदि सब्जियों पर छाई महंगाई के कारण लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। वहीं सेब, अंगूर, पपीता, केला, अनानास, संतरा व मौसमी आदि फलों पर महंगाई के चलते आम आदमी ने फलों की खरीदारी भी काफी कम कर दी है।

इस बारे में फलों एवं सब्जियों के विक्रेताओं से बात करने के लिए जब जनवाणी की टीम बाजार में निकली तो सब्जी मंडी और फुटकर दुकानदार व ठैलियां लगाने वाले विक्रेताओं के भाव में भी प्रति किलो भारी अंतर देखने को मिला। जो फल या सब्जी मंडी में 40 से 50 रुपये किलो बताए गए। वही फल या सब्जी फुटकर दुकानदार और ठैलियां लगाने वालों ने 60 से 70 रुपये किलो बिक्री करने की बात कही।

वहीं, गृहिणयों से जब इस बाबत बात की तो उन्होंने सब्जियों व फलों पर छाई महंगाई के कारण खरीदारी में 50 फीसदी कटौती करने की बात कही। फुटकर दुकानदार व ठैलियां लगाने वालों से जब मंडी की अपेक्षा फल और सब्जी 10 से 20 रुपये प्रति किलो अधिक में बिक्री की बाबत सवाल किया तो उनका कहना था कि उन्हें जिस भाव पर सब्जी और फल मंडी से मिल रहे हैं। उसमें अपना थोड़ा बहुत मुनाफा जोड़कर के वो फल एवं सब्जियां आम आदमी को बिक्री कर रहे हैं।

इस भाव बिक्री किये जा रहे फल, प्रति किलो में

02 18

  • सेब 140
  • अमरुद 90
  • अनार 130
  • मौसमी 60
  • केले 60 प्रति दर्जन
  • अनानास 90
  • अंगूर लाल 350
  • संतरा 100
  • अंगूर हरा 250

इस भाव बिक्री की जा रही सब्जियां, प्रति किलो में

01 24

  • आलू 40
  • टमाटर 60
  • प्याज 40
  • लौकी 40
  • गोभी 80
  • टिंडा 80
  • शिमला मिर्च 85
  • धनिया 250
  • बैगन 45

दालों के दाम में आया उछाल, मध्यम वर्ग का बुरा हाल

03 19

लॉकडाउन ने आम लोगों की कमर पहले ही तोड़ दी है। ऐसे में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए घर का खर्च चलाना भी बेहद मुश्किल हो चुका है। वहीं, दूसरी ओर तेजी से बढ़ती महंगाई भी आमजन के लिए काफी परेशानियों का सबब बन रही है। अब दालें भी लोगों की थाली से गायब होने की कगार पर हैं।

दालों की दामों में पिछले एक सप्ताह से काफी बढ़ोतरी हो रही है। जिसमें विक्रेताओं की मानें तो दामों में और भी उछाल देखने को मिल सकता है। जोकि गृहिणयों के लिए भी चिंता का विषय हो सकता है। दरअसल, सब्जियों के रेटों में पहले से ही उछाल देखा जा रहा था।

जिसमें दालें ही मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इस स्थिति में कारगार साबित हो रही थीं। सब्जियों की जगह दालों की खरीदारी ज्यादा देखी जा रही थी, लेकिन अब दालों के दामों में भी उछाल आना शुरू हो गया है। जिससे लोगों के लिए चिंता और भी बढ़ गई है। पहले ही ऐसी विषम परिस्थिति में मध्यमवर्ग का जीवन का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में सरकार को भी महंगाई की ओर ध्यान देना चाहिए। मध्यमवर्गीय परिवारों को कुछ राहत मिले।

दालों में अरहर की दाल के रेट इन दिनों आसमान छू रहे हैं। वहीं, मूंग और उड़द जैसी दालों में भी पांच से सात रुपयों की बढ़ोतरी हुई है। इसके लिए सफेद और काले चनों में 12 से 15 रुपयों की तेजी देखी गई है।

Mukesh Agarwal
दालों के रेट में मामूली बढ़ोतरी पिछले कुछ दिनों में देखी गई है, लेकिन चने के रेटों में काफी उछाल आया है। चने के रेट 12 से 15 रुपये बढ़ाए गए हैं। लॉकडाउन के बाद यह बढ़ोतरी दाल के रेटों में आई है।

                                                                    -मुकेश कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष सदर दाल मंडी व्यापार संघ

महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट

महंगाई के तड़के ने सांझा चूल्हे का बजट बिगाड़ दिया है। जिसके चलते अधिकांश घरों में थाली से जहां सब्जियां दूर होती जा रही हैं, वहीं लगातार बढ़ रहे दालों के दामों से भी गृहिणयां चितिंत है। पहले से ही सब्जियों के आसमान छूने वालों दामों ने महिलाओं की चिंता बढ़ा रखी थी, लेकिन अब तो दालें खाना भी आसान नहीं होगा।

60 से 80 रुपये किलो बिक रहा टमाटर पहले से ही खूब इतरा रहा था, लेकिन अब अरहर और मूंग दाल के दाम भी बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को जहां घर के बजट की चिंता सता रही हैं, वहीं परिवार जनों व बच्चों की सेहत की चिंता भी उन्हें होने लगी है।

क्योंकि महंगाई अगर इस तरह बढ़ती रही तो लोगों को खाने-पीने के सामानों से भी हाथ खींचना होगा। महंगाई को लेकर जब कुछ गृहिणयों से बातचीत की गई तो उन्होंने अपनी परेशानी कुछ इस प्रकार बयां की।

Arti
आरती

तक्षशिला निवासी आरती का कहना है कि कोई भी सरकार आ जाए, लेकिन महंगाई कम नहीं होती है। कोरोना ने तो महंगाई और भी ऊपर पहुंचा दिया है। जहां सब्जियों के दाम आसमान छू रहे थे, वहीं अब दालों के दाम भी बढ़ गए हैं। ऐसे में बच्चों को क्या खिलाए क्या नहीं इसकी चिंता सताती रहती है।

Ruchi
रुचि गर्ग

सूरजकुंड निवासी रुचि गर्ग का कहना है कि आलू, हरी सब्जी,फल सब महंगे हो गए हैं। इसलिए व्यंजन की जगह अब तो केवल सादा खाने से ही काम चल रहा है। मगर, कोरोना के चलते बच्चों को भी पौष्टिक आहार देने की जरूरत हैं। सभी सामानों के दाम आसमान छू रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से ही महंगाई की सबसे ज्यादा मार पड़ रही है।

Sushma
सुषमा

सुषमा का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से दालों के दामों में 10 से 15 रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है। सब्जियां पहले ही महंगी थी। ऐसे में बच्चों को क्या खिलाए। आम आदमी क्या करे समझ नहीं आ रहा है, लेकिन लॉकडाउन के बाद से तो महंगाई ने कमर ही तोड़कर रख दी है। अब की बार कुछ ज्यादा ही महंगाई हो गई, लेकिन सरकार है कि कुछ समझने को तैयार ही नहीं है।

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