गंदगी के लगे अंबार, रिश्तेदारों ने भी आना किया बंद
कालोनीवासियों का जीना हुआ मुश्किल, उठ रही बदबू
स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगा रही नगर पालिका
मुख्य संवाददाता |
बागपत: भाजपा सरकार के स्वच्छ भारत मिशन की हकीकत से रूबरू होना है तो बागपत नगर के गायत्रीपुरम मोहल्ले में आ जाइए। यहां कालोनी के प्रवेश में ही कूड़े के अंबार लगे मिलेंगे। अंबार भी ऐसे जो मुख्य मार्ग पर ही लगा दिए गए हैं। यही नहीं वहीं पास में खाली पड़ी जमीन को भी कूड़ाघर बनाने में कसर नहीं छोड़ी जा रही है। जलभराव की समस्या अलग से हैं।
आलम यह है कि कालोनी के बाशिंदे जहां बीमारी की चपेट में आ रहे हैं वहीं कालोनी में रिश्तेदारों ने भी अपनों के यहां आना छोड़ दिया है। कालोनी के लोग खुद इस बात का दावा करते हैं कि कोई उनके यहां आना तक पसंद नहीं कर रहा है। कारण गली में प्रवेश के साथ ही गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। नगर पालिका व प्रशासन से सफाई कराने की खूब गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

कहने को तो स्वच्छ भारत मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर एक रुपया कहीं खर्च नजर नहीं आता है। साफ जाहिर है कि कहीं न कहीं स्वच्छता के नाम पर सिर्फ दिखावा और गोलमाल चल रहा है। हकीकत यह है कि आज भी गलियों में गंदगी के ढेर हैं और स्वच्छ भारत मिशन कूड़े के ढेर के बीच गुम हो गया है। जी हां, बागपत के गायत्रीपुरम मोहल्ले की तस्वीर इस बात की गवाह है कि स्वच्छ भारत मिशन सिर्फ फाइलों में है। धरातल पर कुछ नहीं हो रहा है।
यहां दिल्ली सहारनपुर हाइवे पर राष्ट्रवंदना चौक से महज 50 मीटर की दूरी पर यह मोहल्ला है। इस मोहल्ले में हाइवे से प्रवेश करते ही सफाई व्यवस्था की पोल खुल जाती है। प्रवेश करते ही मुख्य मार्ग पर गंदगी का ढेर नहीं बल्कि अंबार लगे हुए हैं। जिस आधा रास्ता तो कूड़े के अंबार ने ही कब्जा रखा है। इसके बाद बेसहारा पशु उस कूड़े को सड़क तक फैला देते हैं। इससे यहां से आवागमन ही बंद हो जाता है।
मोहल्ले के लोगों का आवागमन तक बंद हो जाता है। या फिर उन्हें गंदगी के बीच से गुजरना पड़ता है। जिस स्थान पर कूड़ा डाला जा रहा है वहीं पास में खाली जगह है जिसे धीरे-धीरे कूड़े का डंपिंग ग्राउंड बनाया जा रहा है। उस खाली जमीन में पानी निकासी नहीं होने से वहां तालाब का रूप भी उसने ले लिया है। जिस कारण उसमें मच्छर पनप रहे हैं। कूड़े के अंबार और जल•ाराव के कारण यहां बीमारी फैल रही है।
मोहल्ले के लोग बीमार पड़ रहे हैं। एक तरफ कोरोना को लेकर साफ-सफाई की अपील की जा रही है और निकायों व प्रशासन की ओर से प्रचार-प्रसार में भी कमी नहीं छोड़ी जा रही है, लेकिन यहां हकीकत से रूबरू कोई नहीं होना चाहता। कोई भी अधिकारी यहां आकर मोहल्ले के लोगों की समस्या देखना नहीं चाहता, जबकि मोहल्ले के लोगों ने नगर पालिका बागपत व प्रशासनिक अधिकारियों से खूब गुहार लगाई है, परंतु किसी ने यहां ध्यान देना जरूरी नहीं समझा है।
आलम यह है कि कालोनी में रहने वाले लोगों के यहां अब तो रिश्तेदारों ने भी आना बंद कर दिया है। कालोनी निवासी सोनिया चौधरी, राहुल पंवार, एडवोकेट देवेंद्र आर्य, राजीव, ब्रहमपाल आदि ने बताया कि यहां से निकलना भी दुभर है। उनके घरों तक बदबू आती है। जब भी कोई रिश्तेदार आता तो गंदगी को देखकर हैरान रह जाता। जिसके बाद अब तो यहां रिश्तेदारों ने आना भी बंद कर दिया है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही यहां सफाई व्यवस्था नहीं की गई तो वह भुख हड़ताल शुरू करेंगे।
कूड़ा उठाने में क्यों हो रही ढिलाई
बागपत नगर पालिका में इन दिनों कूड़े के उठाने को लेकर परेशानी अधिक हो रही है। दावा है कि कूड़ा डालने के लिए जगह नहीं है। सवाल यह है कि जगह नहीं है तो क्या कालोनियों में ही कूडेÞ के अंबार लगे रहेंगे? इसका कोई स्थाई समाधान नहीं निकलेगा? या फिर लोगों को गंदगी के बीच रहने की आदत डालनी होगी? यही नहीं फिर स्वच्छ भारत मिशन का ढोल क्यों पीटा जा रहा है? उसकी हकीकत सरकार तक अधिकारी क्यों नहीं
दिखाते हैं?

