Wednesday, July 29, 2026
- Advertisement -

Sonu Sood: फिल्मों के खलनायक, असल जिंदगी के हीरो, क्यों हर दिल में बसते हैं सोनू सूद?

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सोनू सूद का जन्म 30 जुलाई 1973 को पंजाब के मोगा में हुआ था। उनके पिता शक्ति सागर सूद एक सफल उद्यमी थे और माता सरोज सूद शिक्षिका थीं। अपनी प्रारंभिक शिक्षा मोगा के एक स्कूल से पूरी करने के बाद उन्होंने नागपुर के यशवंतराव चव्हाण कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (वाईसीसीई) से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में ग्रासिम मिस्टर इंडिया प्रतियोगिता के शीर्ष पांच में जगह बनाने के बाद उनका रुझान मॉडलिंग की ओर हो गया। रूपहले पर्दे का अभिनेता बनने का सपना लिए सोनू सूद मात्र 5,500 रुपए लेकर मुंबई आ गए। उनके शुरुआती संघर्ष के दिन अत्यंत कठिन थे। उन्होंने छह अन्य लोगों के साथ एक छोटा सा कमरा साझा किया और अपनी बुनियादी आर्थिक जरूरतें पूरी करने के लिए 4,500 रुपए प्रतिमाह वेतन वाली एक निजी नौकरी भी की।

उनका पहला मॉडलिंग असाइनमेंट उन्हें मात्र 500 रुपए का पारिश्रमिक दे पाया था, जो उनके आगामी साम्राज्य की एक बेहद मामूली शुरुआत थी। निजी जीवन में वे बेहद अनुशासित हैं। वे शुद्ध शाकाहारी हैं, धूम्रपान एवं शराब से दूर रहते हैं और अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए किक-बॉक्सिंग का कड़ाई से पालन करते हैं। 25 सितंबर 1996 को उन्होंने सोनाली सूद से विवाह किया। उनके दो पुत्र (ईशांत और अयान) हैं।

दक्षिण भारतीय सिनेमा से अपने करियर का आगाज करते हुए सोनू सूद ने 1999 में तमिल फिल्म ‘कल्लाझगर’ से अपनी शुरुआत की। बॉलीवुड में उनका प्रवेश 2002 की फिल्म ‘शहीद-ए-आजम’ से हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने फिल्म उद्योग में अपनी धाक जमा ली।

2008 में तेलुगु फिल्म ‘अरुंधति’ में अघोरा (खलनायक) की भूमिका के लिए उन्हें नंदी पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ खलनायक) और फिल्मफेयर सम्मान मिला। 2010 में हिंदी फिल्म ‘दबंग’ में छेदी सिंह के किरदार के लिए अप्सरा अवॉर्ड और आईफा अवॉर्ड प्राप्त हुए। 2017 में उन्होंने जैकी चैन के साथ ‘कुंग फू योगा’ में मुख्य विलेन रान्डेल की भूमिका निभाकर अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की।

सोनू सूद का सबसे बड़ा और स्थायी योगदान सिनेमा के पर्दे के बाहर रहा है। कोविड-19 संकट के दौरान उनके मानवीय राहत कार्यों को संस्थागत रूप देने के लिए ‘सूद चैरिटी फाउंडेशन’ की स्थापना की गई। महामारी के कारण उत्पन्न हुए भारी रोजगार संकट को देखते हुए उन्होंने ‘प्रवासी रोजगार’ नामक पोर्टल लॉन्च किया। इस पहल की अपार सफलता और संभावनाओं को देखते हुए, इसे बाद में टेमासेक समर्थित गुड वर्कर से 34 मिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ, जिसका दीर्घकालिक लक्ष्य 10 करोड़ भारतीयों को आजीविका और अपस्किलिंग से जोड़ना है।

कोविड के कारण लगे लॉकडाउन में उनके फाउंडेशन ने 90,000 से प्रवासी मजदूरों की घर वापसी कराई, 300 से ज्यादा ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और 300 से ज्यादा हार्ट सर्जरी में सहायता दी। ‘संभवम्’ (मुफ्त आईएएस कोचिंग) और ‘संकल्प’ (कानून प्रवेश) पहल भी चलाईं। इसी समर्पण पर 27 अगस्त 2021 को दिल्ली सरकार ने उन्हें ‘देश के मेंटर’ का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया।

अपने अकल्पनीय अनुभवों को जनमानस से साझा करते हुए दिसंबर 2020 में सोनू सूद ने प्रख्यात पत्रकार मीना के. अय्यर के साथ मिलकर अपनी आत्मकथा ‘आई एम नो मसीहा’ प्रकाशित की। इसके अतिरिक्त, तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में कदम रखते हुए 7 जून 2022 को उन्होंने ‘एक्सप्लर्जर’ नाम की एक विशेष ट्रैवल सोशल मीडिया ऐप भी लॉन्च किया।

सोनू सूद मौजूदा समय में मुख्य रूप से सामाजिक कार्यों, जरूरतमंदों की मदद और अपनी आगामी फिल्मों की तैयारियों में व्यस्त हैं। हाल ही में हुए सीजेपी प्रोटेस्ट के बीच सोनू सूद ने 20 जुलाई को प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा था, “हमारे छात्रों को लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए।”

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा पर करें इन चीजों का दान, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

Sanjay Dutt: परदे के ‘खलनायक’, असल जिंदगी के जांबाज, ऐसा रहा संजय दत्त का सफर

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here