- कार्तिक पूर्णिमा 29 नवंबर को दोपहर 12.48 से 30 नवंबर दोपहर को तीन बजे तक का समय
जनवाणी ब्यूरो |
बिजनौर: कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर दिन सोमवार को है। शास्त्रानुसार कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर ही भगवान विष्णु ने धर्म, वेदों की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था। इस तिथि पर देव दीपावली का पर्व भी मनाया जाता है।
इस दिन ही भगवान विष्णु ने त्रिपुरासुर नामक राक्षक का वध किया था। जिससे देवताओं ने प्रसन्न होकर शिवजी को त्रिपुरारी नाम दिया था। कार्तिक पूर्णिमा का महत्व महाभारत से भी जुड़ा हुआ है। जब कौरव व पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध हुआ था।
तब पांडव अपने संगे संबंधियों की असमय मृत्यु के कारण उनकी आत्मा की शांति के बारे में सोचने लगे। तब भगवान कृ ष्ण ने पांडवों की चिंता को दूर करते हुए कार्तिक शुल्क पक्ष की अष्टमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण देने के लिए परम्परा शुरू हो गई। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिख धर्म के प्रधान गुरु गुरुनानक देव का जन्म हुआ था। इस कारण सिख धर्म के अनुयायी कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाश उत्सव के रुप में मनाते है।
धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा ने बताया कि इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्ध योग व रोहिणी नक्षत्र का संयोग होने से बहुत शुभ योग बन रहा है। इस दिन जब चंद्रमा आकाश में उदित होता है उस समय चंद्रमा ही शिवा, संभूति,संतति प्रीती, अनसूया और क्षमा छ: कृतिकाओं का पूजन करने से भगवान शंकर का अर्र्शीवाद प्राप्त होता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के बाद दीपदान करने से दस यज्ञों के समान फल की प्राप्ति होती है।
इस दिन जप तप व दान का भी विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रहामुुर्हूत में उठकर पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। यदि संभव न हो तो घर पर ही गंगा जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। ब्रह्मा विष्णु और महेश आदि देवताओं ने इसे महापुतिन पर्व की संज्ञा दी है।
इसलिए इसमें किए गए गंगा स्नान, दीपदान, यज्ञ और उपासना आदि का विशेष महत्व होता है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा का प्रारंभ 29 नवंबर को दोपहर 12:48 से होगा व 30 नवंबर को दोपहर तीन बजे तक समापन होगा। इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण होने का भी भ्रम को दूर करते हुए पंडित ललित शर्मा ने बताया कि यह उपछाया ग्रहण है। इन्हे ग्रहण की कोटि में नहीं रखा गया। कार्तिक पूर्णिमा सभी धार्मिक कृत्य जैसे व्रत, उपवास, दान, सत्यनारायण व्रत पूजन आदि का नि:सकोंच करें।

