Tuesday, October 19, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsShamliपुरातत्व विभाग की टीम ने खेड़ी खुशनाम में की जांच

पुरातत्व विभाग की टीम ने खेड़ी खुशनाम में की जांच

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  • खेत से सोने-चांदी के सिक्के निकलने का मामला
  • टीम के मांगने पर किसी ने भी नहीं दिए टीम को सिक्के
  • पुलिस ने करीब दर्जनभर ग्रामीणों को पूछताछ को बुलाया

जनवाणी संवाददाता |

ऊन: क्षेत्र के गांव खेड़ी खुशनाम में खेत में मिट्टी खनन के दौरान निकले धातु के सिक्कों की जांच के लिए पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान टीम ने जहां खेत मिट्टी और अन्य पहलुओं की जांच की, वहीं खेत स्वामी एवं ग्रामीणों से पूछताछ की लेकिन ग्रामीणों ने सिक्के मिलने की बात नहीं स्वीकारी।

पुरातत्व विभाग की टीम ने ग्रामीणों से सिक्के मांगे लेकिन ग्रामीणों ने सिक्के न होने की बात कहीं जिसके बाद उप जिलाधिकारी व खनन निरीक्षक ने अवैध खनन करने के आरोप में कार्रवाई की बात की चेतावनी दी। दूसरी ओर, पुलिस ने पूछताछ के लिए क्षेत्र के करीब एक दर्जन लोगों को बुलाया है।

तहसील ऊन के गांव खेड़ी खुशनाम में दो दिन पहले खेत में अवैध मिट्टी खनन के दौरान धातु के सिक्के मिले थे। मीडिया में खबर प्रकाशित होते ही प्रशासन व पुरातत्व विभाग की टीम हरकत में आई। बुधवार को पुरातत्व विभाग की टीम सुपरिंटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट, मेरठ मंडल, डीबी गुरनायक के नेतृत्व में गांव खेडी खुशनाम में उस खेत में जांच करने पहुंची, जहां से मिट्टी खनन के दौरान धातु के सिक्के मिले थे।

खेत की जांच के दौरान टीम के साथ उप जिलाधिकारी मणि अरोरा, खनन निरीक्षक व एसओ झिंझाना के नेतृत्व में पुलिस बल ने खेत स्वामी ओमी उर्फ जितेंद्र पुत्र जग्गा से धातु के सिक्कों के बारे में जानकारी ली है। खेत स्वामी ने बताया कि कुछ सिक्के उन्होंने बच्चों को उठाते देखा था जिन्हें बच्चे अपने घर ले गए।

उसके बाद टीम ने जेसीबी चालक परवेज को मौके पर बुलाकर पूछताछ की लेकिन उसने सिक्के के बारे में जानकारी न होना बताया। इस पर उप जिलाधिकारी ने अवैध खनन करने के आरोप में कार्रवाई करने की चेतावनी दी। साथ ही, एसओ झिंझाना ने करीब एक दर्जन लोगों को सिक्कों की जानकारी करने के लिए थाने पर पूछताछ को बुलाया है।

पुरातत्व टीम ने बताया कि खेत को देखकर ऐसा लगता है कि यहां पर खजाना को छिपाया गया है। ऐसा कोई ऐसा प्रमाण नहीं मिला है जिससे खुदाई की जा सके। उन्होंने ग्रामीणों से सिक्के देने का अनुरोध किया लेकिन ग्रामीणों ने सिक्के पास न होने की बात कही। अधीक्षण पुरातत्वविद का कहना है कि खेत कोई पुरातत्वस्थल नहीं है। यहां कभी कोई गांव बसा होगा।

जनवाणी की खबर पर लगी मोहर

पुरातत्व विभाग की टीम को चौसाना के एक व्यक्ति द्वारा एक सिलवर कॉइन उपलब्ध कराया गया है जिसको पुरातात्विक विभाग के अधिकारियों ने फोटो लिया और अध्ययन के बाद कहा कि सिक्का 1320-1350 सन् के बीच का हो सकता है। सिक्के को तुगलक काल का बताया गया है। बता दें कि दैनिक जनवाणी अपने समाचार के माध्यम से सिक्कों को तुगलक कालका बताया गया था। पुरातत्व विभाग की टीम ने भी सिक्कों को तुगलक काल का माना है। टीम ने लिखा पढ़ी कर सिक्के को मालिक को सुपूर्द कर दिया।

खुदाई की जगह पुरातत्व टीम ने किया निरीक्षण

गांव खेड़ी खुशनाम में जिस खेत में खजाना निकलने की बात सामने आई थी, उसको देखने के लिये पुरातत्व विभाग की टीम खेत में पहुंची और काटे गए पेड़ों की जड़ों का गंभीरता के साथ निरीक्षण किया। टीम ने कुछ मिट्टी के टुकडे् उठाकर भी देखे लेकिन कुछ हासिल नहीं हो सका।

खजाने वाली जगह पर बसा होगा गांव

खनन निरीक्षक व पुरातत्व टीम ने बताया कि जिस जगह पर खजाना निकलने की बात सामने आई है वहां पर कभी गांव बसा होगा। लोग पूर्व काल में भविष्य व कर बचाने के लिये धन को दबा देते थे।

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