Monday, May 18, 2026
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विधानसभा चुनाव जीतकर सरधना को भूले अतुल प्रधान

  • सरधना के लोगों से लंबे समय से बनाए हुए हैं दूरी
  • मेयर और सांसद के चुनाव के चक्कर में अनाथ कर दिया सरधना

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: सरधना विधानसभा की जनता ने जितने लाड के साथ सपा प्रत्याशी अतुल प्रधान को विधायक बनाया था। उससे कहीं ज्यादा यहां की आवाम आज अपने विधायक से नाराज है। क्योंकि चुनाव जीतने के बाद विधायक अतुल प्रधान सरधना को भूल चुके हैं। सरधना वालों की सेवा करने के बजाए अन्य जिलों की राजनीति में मशगूल हैं। पहले पत्नी को मेयर का चुनाव लड़ाने के चक्कर में लगे रहे।

अब लोकसभा चुनाव में सांसद का टिकट पाने का ख्वाब पूरे करने के लिए उठा पटक में समय निकाल दिया। जिस तरह अतुल प्रधान ने सांसद का टिकट पाने के लिए जोर लगाया है। उससे साफ हो गया है कि सरधना की आवाज की वोट लेकर विधायक बनकर उनकी सेवा करना मात्र उनका उद्Þदेश्य नहीं है। इस पद को सीढ़ी बनाकर राजनीति शिखर पहुंचना उनका लक्ष्य है। फिलहाल सरधना की जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है।

वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी के रूप में अतुल प्रधान सरधना सीट पर चुनाव लड़ा था। उनके सामने भाजपा के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम तीसरी बार किस्मत आजमा रहे थे। कांटे की टक्कर के बीच सरधना विधानसभा क्षेत्र की जनता ने अतुल प्रधान को वोट के रूप में जमकर प्यार बरसाया था। चुनाव के समय अतुल प्रधान ने भी दावा किया था कि उनका मकसद क्षेत्र की जनता की सेवा करना है। इस विश्वास के साथ जनता ने उन्हें 118573 वोट देकर करीब 18 हजार से अधिक वोट से जीत दिलाई थी।

जनता को उम्मीद थी कि अतुल प्रधान उनके परिवार का हिस्सा बनकर रहेंगे। मगर समय के साथ जनता का यह भ्रम टूट गया। चुनाव जीतने के बाद अतुल प्रधान सरधना की जनता को भुला बैठे हैं। सरधना में विधायक बने अतुल प्रधान लंबे समय से नजर नहीं आए हैं। उनको वोट देने वाली जनता इंतजार करती रह जाती है। मगर विधायक के दीदार नहीं हो पा रहे हैं। एक तरह से सरधना को विधायक ने लावारिस कर दिया है।

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क्षेत्र की सेवा करने के बजाए अन्य चुनाव की भूख मिटाने में लग गए। पहले अपनी पत्नी सीमा प्रधान को मेयर का चुनाव लड़ाने में समय व ताकत झौंक दी। इसके बाद अब सांसद का टिकट पाने के लिए लखनऊ मेरठ एक कर दिया। हालांकि टिकट की दावेदारी के बाद से ही सरधना के लोग मायूस होने लगे थे।

उन्हें खुद अहसास होने लगा कि सरधना सीट अतुल प्रधान के लिए महज राजनीति की एक सीढ़ी है। उनको राजनीति में और आगे जाना है। हालांकि समय के साथ सपा मुखिया ने टिकट बदल दिया। मगर यह बात तो साफ हो गई कि टिकट की दावेदारी ने सरधना की आवाम का भ्रम जरूर तोड़ दिया है। फिलहाल सरधना विधानसभा की जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। क्योंकि उन्हें अपने विधायक के दर्शन नसीब नहीं हो रहे हैं।

सरधना वासियों की क्या गलती?

अतुल प्रधान सरधना सीट पर तीन बार चुनाव लडेÞ। दो बार जनता ने उन्हें नकार दिया। इसके बाद भी वह लगातार सरधना के लोगों के बीच बने रहे। हर छोड़ बड़े मुद्दे और खुशी-गम में शामिल होने पहुंचे। तीसरे चुनाव में उन्होंने इस बात का भी हवाला दिया कि लगातार हारने के बाद भी वह जनता के बीच में रहे। हिम्मत नहीं हारे। क्योंकि उनका मकसद सरधना वालों की सेवा करना है। इस पूरे संघर्ष और वादों को देखते हुए जनता ने अतुल प्रधान को विधायक की कुर्सी पर बैठाया। मगर विधायकी मिलने के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया। अब विधायक अतुल प्रधान सरधना में इक्का दुक्का बार ही झांकने आते हैं। जो सरधना सीट पर उनकी राजनीति के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

समर्थकों को सुननी पड़ रही

विधायक अतुल प्रधान द्वारा सरधना से दूरी बनाने का नुकसान उनके समर्थकों को भुगतना पड़ रहा है। जो लोग घर घर जाकर अतुल प्रधान के लिए वोट मांगने निकले थे। आज वोट देने वाले उन्हें जिम्मेदारों से सवाल कर रहे हैं। उन्हें से पूछा जा रहा है कि विधायक जी कहां हैं। मगर उनके पास भी कोई जवाब नहीं है।

जांच में 22 में से 13 नामांकन पत्र हुए निरस्त

शुक्रवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान 22 में से 13 पर्चे निरस्त कर दिए गए। जिसके बाद भाजपा के अरुण चन्द्रप्रकाश गाविल, सपा की सुनीता वर्मा और बसपा के देवव्रत त्यागी समेत कुल नौ प्रत्याशी मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट के लिए चुनाव मैदान में रह गए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा के निर्देशन में सहायक निर्वाचन अधिकारी/नगर मजिस्ट्रेट अनिल कुमार ने अपनी टीम के साथ नामांकन पत्रों की जांच का कार्य प्रत्याशियों की मौजूदगी में शुरू किया।

जिसमें राजेश गिरी, जयपाल सिंह उर्फ जेपी सिंह, अतुल, धर्मवीर, सोनू कुमार, रामशरण सैनी, प्रमोद कुमार, राकेश उप्पल, धर्मराज छावरिया, मोहम्मद रिजवान, भूपेंद्र सिंह और मयंक कुमार के कुल 13 नामांकन पत्र विभिन्न कमियों से निरस्त कर दिए गए हैं।

अब मुख्य मुकाबले में शामिल भारतीय जनता पार्टी से अरुण चन्द्रप्रकाश गोविल, समाजवादी पार्टी से सुनीता वर्मा बहुजन समाज पार्टी से देवव्रत त्यागी, आबिद हुसैन, अफजल, लियाकत, हिमांशु कुमार, भूपेंद्र, राजेश गिरी समेत कुल नौ प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं। सहायक निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि आठ अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। इसके उपरांत चुनाव चिन्हों का विधिवत रूप से आवंटन किया जाएगा।

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