Saturday, May 16, 2026
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झूमकर बरसे बदरा, खुल गई पोल

  • बारिश के इम्तिहान में व्यवस्था फेल, चंद मिनटों में जलभराव से बने बाढ़ जैसे हालात
  • सिटी स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पर भारी जलभराव, थमे ट्रेनों के पहिए

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गुरुवार सुबह मूसलाधार बारिश के इम्तिहान में व्यवस्था पूरी तरह से फेल दिखाई दी। जिसमें बारिश के चलते सड़कों पर बाढ़ जैसे हालात दिखाई दिए। लोग बारिश के साथ चोक नालों के दूषित पानी से जो जलभराव हुआ, उसके बीच से होकर गुजरे तो उन्हें बहुत परेशानी उठानी पड़ी। शहर में डीएम, कमिश्नर समेत कुछ आलाधिकारियों के वीआईपी रोड को छोड़ दिया जाये तो कोई ऐसी जगह बची होगी। जहां पर जलभराव न हुआ हो। लोग जलभराव से त्राहिमाम-त्राहिमाम करते नजर आए।

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नगरायुक्त समेत तमाम आलाधिकारी दम भर रहे थे कि बरसात से पूर्व नालों की साफ-सफाई कर व्यवस्था में सुधार किया जायेगा, लेकिन तमाम दावों की हवा निकल गई। ढाई से तीन करोड़ का डीजल खर्च कर नालों की सफाई के लिए वर्षों बाद इस तरह का अभियान चलाया गया था। झमाझम बारिश से वाहनों के पहियों की रफ्तार थम गई और मार्गों पर जाम जैसे हालात बन गए। सड़कों में गड्ढों के बीच से गुजरना राहगीरों के लिए दूभर हो गया।

रेलवे ट्रैक पर भी जलभराव से ट्रेनों के पहियों की रफ्तार भी धीमी हो गई। सिटी स्टेशन पर रेलवे ट्रेक पर जलभराव के कारण ट्रेन भी घंटो तक बाधित रही। घंटाघर से रेलवे रोड तक सड़क पर दो फीट सड़क पर पानी से झील में तब्दील हो गई हो। बागपत रोड, माधवपुरम, लिसाड़ी गेट, खैर नगर, भैंसाली ग्राउंड, कंकरखेड़ा में सड़कों पर भारी जलभराव हुआ।

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रोहटा रोड नारायण गार्डन की सड़कों पर तो तीन से चार फीट तक पानी जमा हो गया। उधर हापुड़ रोड तिरंगा गेट, वार्ड-83 अहमदनगर की गली नंबर-तीन, कैंट क्षेत्र की सड़कों के साथ ही परतापुर क्षेत्र में गगोल रोड पर जगह-जगह जलभराव हो गया। सरकारी एवं अर्द्धसरकारी कार्यालयों में भी अधिकतर यही सूरत-ए-हाल रहा।

सरधना तहसील में सबसे अधिक बारिश 48 मिमी

जनपद की तीनों तहसील में बारिश के रिकॉर्ड को देखा जाए तो सरधना तहसील सबसे ऊपर रही। जिसमें तहसील रिकॉर्ड के अनुसार गुरुवार सुबह सरधना में 48 मिमी बारिश हुई। जबकि मवाना में 35 एवं सदर तहसील में 38 मिमी बारिश दर्ज की गई। मेरठ में पूर्व में 25 जून को भी 38 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन सबसे अधिक सरधना तहसील में बदरा बरसे।

मूसलाधार बारिश में यातायात व्यवस्था छिन्न-भिन्न

गुरुवार सुबह घंटों तक महानगर के विभिन्न इलाकों में तेज बारिश के कारण मार्गों के साथ-साथ सोहराब गेट और भैंसाली बस स्टेशन पर पानी जमा हो गया। ऐसे मौसम के बीच यात्री भी न के बराबर निकले, वहीं जगह-जगह जलभराव को देखते हुए और यात्रियों की कम संख्या को देखते हुए कई मार्गों पर बसों का संचालन लगभग बंद रखा गया। इनमें दिल्ली, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बड़ौत, गढ़ मुक्तेश्वर, बिजनौर, लखनऊ समेत सभी प्रमुख मार्ग शामिल रहे।

इस दौरान कई स्थानों पर बसों के ब्रेकडाउन और छत टपकने की शिकायत भी दर्ज कराई गई। एआरएम मेरठ जगदीश सिंह ने बताया कि मेरठ डिपो से संचालित दिल्ली ऋषिकेश मार्ग की एक बस की छत टपक की शिकायत यात्रियों ने आरएम केके शर्मा से की। जिसके संबंध में एसएम लोकेश राजपूत के जरिये वर्कशॉप के मैकेनिक को दिशा-निर्देश जारी किए गए।

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एआरएम जगदीश सिंह के अनुसार बसों के छत को लेकर एक सबसे बड़ी समस्या यह सामने आती है कि सामान्य दिनों में बस की छत टपक रही है कि नहीं इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। एआरएम भैंसाली अरविंद कुमार ने स्टेशन प्रभारियों के माध्यम से चालकों परिचालकों के लिए एक गाइडलाइन जारी की। सोहराब गेट डिपो से रोडवेज की बसों का संचालन बहुत कम रहा।

श्यामा-श्याम कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी परिकर त्यागी के अनुसार बगल से बहने वाले नाले की सफाई न होने के कारण नाले का ओवरफ्लो पानी डिपो तक में घुस आया। सीएनजी से संचालित होने वाली 13 बसों के महत्वपूर्ण पुर्जे रेड्यूसर डैमेज हो गए। सीएनजी बसों का संचालन देख रहे एआरएम सचिन सक्सेना ने बताया कि दोपहर करीब 2:30 बजे पानी उतर जाने के बाद सीएनजी की कुछ बसों को मार्गों पर भेजा जा सका है।

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इतना ही नहीं, बारिश की अधिकता ने लोहिया नगर स्थित चार्जिंग स्टेशन को भी क्षति पहुंचाई है। ट्रांसफार्मर के उपकरणों में फाल्ट आ जाने के कारण दिन भर बसों को चार्ज करने का काम नहीं किया जा सका। संचालन प्रभारी एआरएम विपिन सक्सेना ने बताया कि फाल्ट के कारण अधिकांश इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रभावित रहा है।

औद्योगिक क्षेत्र में जलभराव से भारी नुकसान

गुरुवार सुबह हुई भारी बारिश के चलते दिल्ली रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों में पानी भर गया। इस स्थिति के चलते कई फैक्ट्रियों में कच्चा और तैयार माल भी भीग कर खराब हो गया। उद्यमियों ने इसके लिए नगर निगम को जिम्मेदार ठहराते हुए आक्रोश प्रकट किया। आईआईए के पूर्व चेयरमैन सुमनेश अग्रवाल ने बताया कि उद्योगपुरम और दिल्ली रोड के औद्योगिक इलाकों में कई जगह जलभराव के हालात बने। उनकी फैक्ट्री प्रीमियर लेगगार्डमें भी पानी भर गया। वहां तैयार उत्पाद पानी में भीग कर खराब हो गए।

एमईएस बिजलीघर में पानी भरने से छह घंटे आपूर्ति बाधित

बरसात के मौसम में आम जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति नहीं मिल रही है। गुरुवार सुबह ढाई घंटे हुई झमाझम बरसात ने बिजली विभाग की पोल खोलकर रख दी। रुड़की रोड स्थित एमईएस बिजली घर में बरसात का पानी जमा होने से छह घंटे तक विद्युत आपूर्ति बाधित रही। इस वजह से करीब पचास हजार की आबादी को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। विभाग ने ड्रायर लगाकर बिजली घर के उपकरणों को सुखाया जिसके बाद आपूर्ति शुरू हो सकी।

गुरुवार सुबह छह बजे से हुई झमाझम बरसात का रूड़की रोड स्थित एमईएस बिजली पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा। इस दौरान बीसी लाइन, माल रोड, बीआई लाइन, सेना के विभाग, अधिकारियों के बंग्लों समेत लालकुर्ती थाना, मैदा मोहल्ला, जामुन मोहल्ला, बकरी मोहल्ला, घोसी मोहल्ला, हडिंया मोहल्ला व तोपखाना में छह घंटे से ज्यादा आपूर्ति बाधित रही। इस दौरान पचास हजार से एक लाख की आबादी पीने के पानी तक को तरस गई। ओवरहैंड पानी की टंकियों से आपूर्ति नहीं हो सकी।

power cut

जबकि घरों में लगे इनवर्टरों की बैट्रियां भी डिस्चार्ज हो गई। सुबह सात बजे से ही बिजली घर में बरसात का पानी भरने लगा था जो बरसात खत्म होने तक जारी रहा। साढ़े 10 बजे बरसात कम तो हुई, लेकिन तबतक बिजलीघर में लगे विद्युत उपकरण पानी में डूब गये। विभाग द्वारा पंप व ड्रायर लगवाकर उपकरणों के चारों ओर भरे पानी को निकलवाया गया। जबकि बरसात के पानी की वजह से नमी का शिकार हुए उपकरणों को सुखाने में भी लंबा समय लगा। कई बार चिंगारियां भी निकली।

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