Tuesday, June 25, 2024
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नहीं मिली बेल, सपा विधायक को भेजा जेल

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  • कहचरी परिसर पुलिस छावनी में तब्दील, जमकर हंगामा
  • बाराबंकी से गिरफ्तार कर रफीक अंसारी को देर शाम लाए पेश किया कोर्ट में

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: 100 से ज्यादा एनबीडब्लू के चलते वांछित चल रहे मेरठ शहर विधानसभा सीट से सपा के विधायक रफीक अंसारी को सोमवार को बाराबंकी से गिरफ्तार कर मेरठ पहुंची पुलिस ने देर शाम उन्हें एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश किया। जहां मेडिकल ग्राउंड पर उनकी ओर से बेल की अर्जी लगायी गयी थी, लेकिन अर्जी खारिज कर कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया। इससे पूर्व मेरठ पहुंचने पर सपा विधायक को डाक्टरी के लिए पहले भारी सुरक्षा के साथ डाक्टरी कराने को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें कचहरी स्थित एमपी-एमएलए की कोर्ट में पेश किया गया।

विधायक को रात करीब नौ बजे पुलिस की गाड़ी से कचहरी लाया गया। वहां लाकर न्यायधीश नदीम अनवार की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में रफीक अंसारी की ओर से गगन राणा, फहील अलवी आदि ने बेल की प्रार्थना की। कोर्ट को बताया गया कि रफीक अंसारी दिल के गंभीर किस्म के मरीज हैं, लेकिन कोर्ट ने बेल की अर्जी को खारिज कर दिया और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कोर्ट ने चौधरी चरण सिंह जिला कारागार के अधीक्षक को जेल मेन्युअल के तहत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के भी आदेश दिए हैं।

उम्मीद की जा रही थी कि गिरफ्तार रफीक अंसारी को शाम चार बजे तक पुलिस टीम मेरठ लेकर पहुंच जाएगी, लेकिन एसपी सिटी ने बताया कि जिस गाड़ी से सपा विधायक को लेकर पुलिस टीम मेरठ के लिए चली थी वो मार्ग में किसी स्थान पर खराब हो गयी थी। बाद में गाड़ी को दुरुस्त कराया गया। तब कहीं जाकर पुलिस टीम मेरठ के लिए रवाना हुई। उधर, पैरोकारों ने मेरठ में अपनी तैयारी शुरू कर दी है। गिरफ्तार विधायक के मेरठ पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि रफीक अंसारी को कोर्ट में चल रहे दोनों मामलों में लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ी है।

ये दोनों मामले नदीम अनवार की ही कोर्ट में चल रहे हैं। पहला मामला जिसमें गैर जमानती वारंट जारी होने से जुड़ा है। हालांकि साल 2013 में तत्कालीन यूपी सरकार ने सभी केस वापस ले लिए थे, लेकिन उसके बाद भी जो कार्रवाई की जानी चाहिए थी उसको निपटाने में लापरवाही बरती गयी। दूसरे पक्ष ने आपत्ति दाखिल कर दी। जिससे उनका केस चलता रहा। दूसरा मामला 307 थाना नौचंदी का था।

उसमें भी पुलिस के स्तर से एफआर लगा दी गयी थी, लेकिन बाद की कार्रवाई को लेकर बरती गयी लापरवाही ने सीखचों के पीछे पहुंचा दिया। रफीक अंसारी की गिरफ्तारी की सूचना पर बड़ी संख्या में समर्थक जमा हो गए थे। इनमें जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी, संगठन के महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी के अलावा सैकड़ों समर्थक भी मौजूद रहे। उन्होंने जबरदस्त नारेबाजी व हंगामा किया, लेकिन किसी भी हालात से निपटने को व्यापक पुलिस फोर्स का इंतजाम किया गया था।

कई टीमें कर रही थी तलाश

हाईकोर्ट इलाहाबाद से गैर जमानती वारंट के मामले में पुलिस की कई टीमें उन्हें तलाश कर रही थीं। पहले खबर आयी कि लखनऊ से गिरफ्तार किया गया, लेकिन एसपी सिटी ने बाराबंकी से गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन पर आरोप है कि 101 गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद वह कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, एमपी-एमएलए मेरठ की कोर्ट से आईपीसी की धारा 147, 436 और 427 के तहत विचाराधीन आपराधिक मुकदमे में विधायक रफीक अंसारी के खिलाफ जारी वारंट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

दरअसल, मुकदमे में सितंबर 1995 में 35-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 22 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। उसके बाद याची के खिलाफ एक पूरक आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया, जिस पर संबंधित कोर्ट ने अगस्त 1997 में संज्ञान लिया था। उन्हें तलब किया, लेकिन रफीक अंसारी पेश नहीं हुए थे। 12 दिसंबर 1997 को गैर-जमानती वारंट जारी हो गया था। इसके बाद से अब तक 101 गैर-जमानती वारंट जारी हुए धारा 82 सीआरपीसी के तहत कुर्की प्रक्रिया के बावजूद रफीक अंसारी अदालत में पेश नहीं हुए

और हाईकोर्ट चले गए। उनके वकील ने तर्क दिया था कि 22 आरोपियों को 15 मई 1997 के फैसले में बरी कर दिया गया। ऐसे में विधायक के खिलाफ कार्रवाई रद्द होनी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर बताया गया है कि कोर्ट ने इस मामले में डीजीपी को निर्देश दिए थे कि रफीक अंसारी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी किए गए गैर-जमानती वारंट की तामील सुनिश्चित करें।

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