Saturday, May 25, 2024
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विलय से मजबूत होगी बैंकिंग प्रणाली

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Sateesh Singhदेश की सबसे बड़ी आवास वित्त कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी), जो एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) है का एचडीएफसी बैंक में विलय की घोषणा की गई है, लेकिन अभी दोनों कंपनियों के शेयरधारकों, भारतीय रिजर्व बैंक, स्टॉक एक्सचेंजों, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) तथा अन्य नियामकों से मामले में मंजूरी मिलना बाकी है, जिसमें 15 से 18 महीने तक का समय लग सकता है। कंपनी के बोडों ने एचडीएफसी लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों एचडीएफसी इन्वेस्टमेंट और एचडीएफसी होल्डिंग्स को एचडीएफसी बैंक के साथ विलय की मंजूरी दे दी है।

अभी एचडीएफसी लिमिटेड के पास 1.1 करोड़ ग्राहक हैं और 6.23 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है, जबकि एचडीएफसी बैंक के पास 6.8 करोड़ ग्राहक हैं और 19.38 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। विलय के बाद एकीकृत इकाई दुनिया के बड़े बैंकों में से एक हो जाएगा और एक अनुमान के अनुसार इसका मार्केट कैप 20 हजार करोड़ डॉलर का होगा, जो रुपये में 15.12 लाख करोड़ रुपये होगा। हालांकि, विलय के बाद भी इसकी बैलेंस शीट भारतीय स्टेट बैंक से आधी होगी। विलय दो चरणों में होगा।

एचडीएफसी के पूर्ण स्वामित्व वाली इकाइयों एचडीएफसी इन्वेस्टमेंट्स और एचडीएफसी होल्डिंग्स का विलय पहले एचडीएफसी में किया जाएगा। उसके बाद एचडीएफसी का एचडीएफसी बैंक में विलय किया जाएगा। फिलहाल, एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी की सहायक इकाइयों के साथ 21 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। एकीकरण शेयरों में किया जाएगा। एचडीएफसी के 2 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक 25 पूर्ण चुकता शेयरों पर एचडीएफसी बैंक के 1 रुपये अंकित मूल्य वाले 42 शेयर दिए जाएंगे।

विलय के बाद एचडीएफसी बैंक 100 प्रतिशत आम शेयरधारकों की कंपनी बन जाएगी और एचडीएफसी के मौजूदा शेयरधारकों के पास एचडीएफसी बैंक के 41 प्रतिशत शेयर होंगे। विलय का एचडीएफसी के कर्मचारियों पर कोई भी नकारत्मक असर नहीं पड़ेगा।

सवाल का उठना लाजिमी है कि अचानक एचडीएफसी का एचडीएफसी बैंक में विलय की घोषणा क्यों की गई? माना जा रहा है कि विलय की तैयारी पहले से चल रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और बैंकों के संचालन के लिए समान नियम लागू करने के निर्णय की वजह से एचडीएफसी के लिए कंपनी का सुचारू रूप से परिचालन करना और मुनाफा कमाना आसान नहीं रह गया था। ऐसे में एचडीएफसी के पास यही विकल्प बचा था कि या तो वह नुकसान उठाए या फिर विलय का रास्ता चुने।

चूंकि, विलय का विकल्प एचडीएफसी के लिए लाभकारी था, इसलिए, कंपनी के प्रबंधन ने दूसरे रास्ते को चुनना बेहतर समझा। वैश्विक रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स (एसऐंडपी) का कहना है कि एचडीएफसी का एचडीएफसी बैंक में विलय से एकीकृत इकाई की बाजार हिस्सेदारी में बेहतरी आएगी और इसके राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। हालांकि, एसऐंडपी का यह भी कहना है कि सांविधिक रिजर्व की अनिवार्यता और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को उधारी के नियमों से अल्पावधि में एकीकृत इकाई के लाभ पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

एचडीएफसी का करीब 9 प्रतिशत पोर्टफोलियो रियल एस्टेट डेवलपर्स के कर्ज का है, जहां बैंक के बाकी पोर्टफोलियो के मुकाबले परिसंपत्ति गुणवत्ता कमजोर है। फिर भी एसऐंडपी का मानना है कि पर्याप्त पूंजी एवं प्रावधान होने की वजह से एकीकृत इकाई इस पोर्टफोलियो के बढ़े जोखिम का सामना करने में सक्षम होगी। एसऐंडपी का यह भी कहना है कि इस विलय से एकीकृत इकाई की प्रतिस्पर्धी दर पर रकम जुटाने की क्षमता सुधरेगी।

एकीकृत इकाई की आय अगले 5 सालों में और भी बेहतर होगी और इसका कर्ज 42 प्रतिशत बढ़कर 18 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच सकता है। साथ ही, एकीकृत इकाई की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 15 प्रतिशत हो सकती है।
हालांकि, विलय के बाद भी एकीकृत इकाई के लिए एमएससीआई और एफटीएसई जैसे वैश्विक सूचकांकों में शामिल होना संभव नहीं हो सकेगा, क्योंकि वह इसके लिए जरूरी मानकों को हासिल करने में समर्थ नहीं है।

इसकी वजह से विदेशी निवेश मिलने में एकीकृत इकाई को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। गौरतलब है कि एमएससीआई और एफटीएसई के सूचकांकों में शामिल कंपनियों के लिए विदेशी निवेश हासिल करना आसान होता है। विलय की घोषणा के बाद एचडीएफसी बैंक के शेयर में 14.3 प्रतिशत और एचडीएफसी के शेयर में 16.5 प्रतिशत का उछाल आया|

लेकिन जैसे ही बाजार को पता चला कि विलय से विदेशी निवेश में बढ़ोतरी की संभावना कम है तो इसके शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एचडीएफसी के केवल 30 प्रतिशत ग्राहकों के खाते ही एचडीएफसी बैंक में हैं, इसलिए मौजूदा ग्राहकों को अतिरिक्त उत्पाद बेचने की काफी गुंजाइश है। इस विलय के बाद कर्मचारियों के तार्किक इस्तेमाल से भी एकीकृत इकाई को फायदा हो सकता है।

निजी क्षेत्र में बजाज फिनसर्व, ऐक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक पहले ही अपने आकार को बढ़ा चुके हैं, जिससे उनके खुदरा ग्राहकों, उच्च तकनीक डेटा आधारित सेवाएं और भौगोलिक पहुंच में इजाफा हुआ है। उम्मीद है कि विलय के बाद एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक की एकीकृत इकाई को अनेक मोर्चे पर लाभ होगा।


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