Sunday, March 15, 2026
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अकाल मृत्यु से बचाता है भैयादूज का त्योहार

  • हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है भैया दूज का पर्व

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक करके उनके सुखमय जीवन, उज्जवल भविष्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपने कर्तव्य के निर्वहन का संकल्प लेते हैं। मान्यता है कि इस दिन भाई का तिलक करने से उन्हें अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।

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इस साल होने वाला भैया दूज पर कब का मुहूर्त और योग संबंधित बारे में जनवाणी ने भारत ज्योतिष शोध संस्था के एस्ट्रो साइंटिस्ट भारत ज्ञान भूषण से बात की जिस पर उन्होंने बताया कि 14 नवम्बर को कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया दोपहर 2:38 मिनट से प्रारम्भ होगी तथा 15 नवम्बर 2023 को 1 बज कर 49 मिनट तक रहेगी। इस प्रकार सूर्योदनी भैया दूज का पर्व 15 नवम्बर यानि आज मनाया जाएगा।

भैया दूज में बनने वाले योग की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इस बार भैया दूज ज्येष्ठा नक्षत्र, अतिगंड योग, कौलव करण में है तथा साथ ही विश्वकर्मा दिवस निर्माणकारी प्रगति का प्रतीक भी बन जाता है। शुक्ल पक्ष की द्वितीया का चन्द्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजे चन्द्रमा के समान उच्च का प्रभाव देने वाला हो जाता है। और साथ ही इस बार विशेष योग लिए है भैया दूज निश्चित रूप से यह भैया दूज दीर्घ जीवन के लिए सशक्त योग लिए हुए है,

इसमें सुख ऐश्वर्य जीवन में भोगते हुए मोक्ष तक के योग बनने की स्तिथि बनी हुई है। जिन्होंने दिमागी परेशानी को कंट्रोल कर लिया वे शरीर के स्वास्थ्य को भी बढ़ा सकेंगे, संतान व शिक्षा का लाभ बेशक देर से मिले लेकिन दीर्घगामी लाभ अवश्य है। इसलिए अच्छे प्रभाव के लिए भाई यम तथा बहन यमुना को याद करते हुए उनको पूजित करें तथा उनसे वरदान लें।

शुभ तिलक समय

  • प्रात: लाभामृत योग 06:43 से 09:24 तक
  • प्रात: शुभ योग 10:44 से 12:05 तक

भैया दूज पूजा का महत्व

सूर्य देव के पुत्र यमराज तथा पुत्री यमुना भाई-बहन के आपसी प्रेम से उत्पन्न हुआ भैया दूज का त्योहार। यम द्वितीया पर ही यमराज अपनी बहन यमुना के घर बहन के विवाह के उपरान्त जब पहली बार गये और वहां बहन के हाथ का बना भोजन किया तब यमुना बहन ने अपने यमराज भाई से यह वर मांगा कि आज के दिन जो भाई इस पृथ्वी पर अपनी बहन के घर जा कर भोजन करे तो उसको आकाल मृत्यु कभी प्राप्त न हो

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इसी उपलक्ष में बहन अपने भाई को तिलक करती है तथा भाई बहन को सप्रेम उपहार देता है। इसलिए जिनकी सगी बहन न हो तो रिश्ते की बहन के यहां जायें और यदि ऐसा सम्भव न हो तो यमुना आदि किसी भी नदी किनारे नदी को बहन मानते हुए वहां पर भोजन करे और उस नदी को भावना पूर्वक उपहार अर्पित करे तो उस व्यक्ति को धन, यश, आयु, धर्म और सुख की प्राप्ति के योग बनते हैं।

आज के दिन विश्वकर्मा पूजन का भी है विशेष महत्व

विश्वकर्मा ब्रह्मा जी के सातवें पुत्र हैं तथा मान्यतानुसार इस दिन विश्वकर्मा का पूजन करने से करियर में सफलता प्राप्त होती हर और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अत: विश्वकर्मा पूजन वास्तुकारों, भवन निर्मिताओं के लिए तो विशेष है ही साथ ही किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य में लगे व्यक्तियों के लिए इसलिए विशेष हो जाता है कि विश्वकर्मा के पूजन से आधुनिक विज्ञान के साथ साथ पराविज्ञान का लाभ भी ले पाते है।

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