जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत, भरोसेमंद और जुझारू खिलाड़ियों में शुमार अजिंक्य रहाणे ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। करीब दो दशक तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करने वाले इस अनुभवी बल्लेबाज ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए अपने सफर को याद किया और कहा कि उनके लिए हमेशा देश और टीम सबसे पहले रहे। रहाणे के इस फैसले ने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को भावुक कर दिया।
‘हर शुरुआत का एक अंत होता है’
अपने संन्यास की घोषणा करते हुए रहाणे ने कहा, “जिंदगी की सच्चाई यही है कि हर शुरुआत का एक अंत होता है। जब वह समय आता है तो उसका सम्मान करते हुए आगे बढ़ जाना चाहिए। बल्लेबाजी में मैंने हमेशा सही टाइमिंग पर भरोसा किया और आज मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का यही सही समय है।”
डोंबिवली से टीम इंडिया तक का प्रेरणादायक सफर
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए रहाणे ने बताया कि डोंबिवली से शुरू हुआ उनका सफर सिर्फ एक सपना पूरा करने के लिए था। उन्होंने कहा, “एक छोटे से लड़के के रूप में मैंने केवल अभ्यास करने के लिए सफर शुरू किया था। मैंने इस खेल को अपना सब कुछ दिया। हर दिन, हर पारी और बल्लेबाजी का हर मौका भारत की कैप पहनने के सपने से जुड़ा था।”
‘देश और टीम हमेशा खुद से ऊपर रहे’
रहाणे ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में एक ही सिद्धांत अपनाया— देश और टीम को हमेशा खुद से ऊपर रखना। उनके अनुसार, उन्होंने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ क्रिकेट खेला और हमेशा यह विश्वास रखा कि यदि नीयत साफ हो तो खेल भी आपका साथ देता है।
20 साल के सफर पर गर्व
अपने लंबे क्रिकेट करियर को याद करते हुए रहाणे ने कहा कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू से लेकर आज तक भारतीय क्रिकेट ने अभूतपूर्व तरक्की की है और पिछले 20 वर्षों तक इस सफर का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा, “भारतीय क्रिकेटर के रूप में मेरा अध्याय भले ही समाप्त हो रहा हो, लेकिन क्रिकेट के साथ मेरा रिश्ता कभी खत्म नहीं होगा। अब मैं अगली पीढ़ी की मदद करने और इस खेल से मिले मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित हूं।”
जीत-हार से कहीं बड़ी रहीं यादें
रहाणे ने अपने करियर को यादगार बताते हुए कहा कि मुंबई के एक युवा खिलाड़ी से भारत का प्रतिनिधित्व करने तक का सफर उनके लिए सम्मान की बात रहा। उन्होंने कहा कि जीत और हार खेल का हिस्सा रहीं, लेकिन क्रिकेट खेलने का आनंद, अलग-अलग टीमों के साथ बिताए पल और जिंदगीभर की यादें ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि हैं।
परिवार, साथियों और प्रशंसकों का जताया आभार
अपने विदाई संदेश में रहाणे ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई), मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए), अपने सभी साथियों, कोचों, आईपीएल फ्रेंचाइजियों, पत्नी राधिका, परिवार, दोस्तों और हर उस व्यक्ति का धन्यवाद किया जिसने उनके सफर में साथ दिया।
‘मैं आपके दिलों में कभी नहीं हारा’
अपने संदेश के अंत में रहाणे ने प्रशंसकों के लिए भावुक शब्द कहे। उन्होंने कहा, “‘अजिंक्य’ का अर्थ होता है ‘अजेय’, लेकिन क्रिकेट ने मुझे कई बार हारना सिखाया। एक खिलाड़ी के रूप में हम जितनी बार सफल होते हैं, उससे कहीं ज्यादा बार असफल होते हैं। मेरी टीम भी हारी, मुझसे भी गलतियां हुईं, लेकिन एक जगह मैं कभी नहीं हारा और वह आपके दिल थे। आपने हमेशा मुझे अपनाया। आपके प्यार, भरोसे और समर्थन के लिए दिल से धन्यवाद। कैप नंबर 278… अब यहीं तक।”
मेलबर्न की वह शतकीय पारी हमेशा रहेगी यादगार
अजिंक्य रहाणे के करियर का सबसे सुनहरा अध्याय 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी रही। विराट कोहली की गैरमौजूदगी में उन्होंने चोटों से जूझ रही भारतीय टीम की कप्तानी संभाली और मेलबर्न टेस्ट में शानदार शतक लगाकर टीम की ऐतिहासिक वापसी कराई।
उनकी कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार टेस्ट सीरीज में से एक अपने नाम की। यह जीत भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम पलों में हमेशा याद की जाएगी और रहाणे का योगदान भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

