Wednesday, March 18, 2026
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बोट बाइक के 150 करोड़ के घोटाले का आरोपी एयरपोर्ट से गिरफ्तार

  • घोटाले को अंजाम देकर भाग गया था दुबई, साथ के कई आरोपी जेल में हैं बंद

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्रदेश में तहलका मचाने वाला 3500 करोड़ के बाइक बोट घोटाले में में ईओडब्ल्यू मेरठ को एक और सफलता मिली है। ईओडब्ल्यू ने दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से कंपनी में 150 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी दिनेश पांडेय को गिरफ्तार कर लिया। दिनेश दुबई में रह रहा था। उसके भारत आते ही उसे धर दबोचा गया।

ईओडब्ल्यू ने उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी। जिससे बाइक बोट में और खुलासे हो सकें। ईओडब्लयू इस केस में अधिकांश मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। दिनेश ने निवेशकों के करीब 150 करोड़ रुपये अपनी कंपनियों में खपाए।

ये था पूरा मामला

बाइक बोट स्कीम चलाने वाली कंपनी गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के खिलाफ दिल्ली में भी एफआईआर दर्ज हो गई है। एफआईआर के मुताबिक, 42 हजार करोड़ रुपये के इस घोटाले में लाखों लोगों के साथ ठगी की गई थी। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में बीएसपी नेता संजय भाटी सहित डेढ़ दर्जन आरोपियों का नाम लिखा गया था। अभी भी फर्जीवाड़े की रकम के बारे में ठीक-ठीक नहीं बताया जा सकता, क्योंकि पुलिस जांच कर रही है।

दर्ज हुई इस एफआईआर के लिए पुलिस को हजारों शिकायतें मिली थीं। पुलिस के मुताबिक, कंपनी ने बाइक बोट स्कीम में लोगों से पैसा लगवाकर उनको अच्छा रिटर्न देने का वादा किया था। शुरूआत के एक दो महीने में रिटर्न आए भी थे, लेकिन बाद में कंपनी ने रिटर्न देने से मना कर दिया। जब लोगों ने कंपनी में जाकर पड़ताल की, तो कंपनी की तरफ से उनको धमकाया गया। पीडितों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है।

ईओडब्ल्यू को कई अन्य शिकायतें भी मिली थी। कई सेना के जवानों के साथ भी ठगी की बात सामने आई है, लेकिन ईओडब्ल्यू तथ्यों को वेरिफाई कर रही है। संजय भाटी नोएडा में बीएसपी का नेता है और एक विधायक का करीबी भी। उसने साल 2010 में कंपनी शुरू की और साल 2018 में बाइक बोट नाम की स्कीम लांच की। ऐप बेस्ड टैक्सियों की तर्ज पर शुरू हुई इस स्कीम में बाइक टैक्सी मिलती थी।

कंपनी के पास हजारों बाइक थी, लेकिन एक भी बाइक खुद संजय भाटी के पैसे से नहीं आई थी बल्कि ऐसे ही भोले भाले लोगों को रिटर्न का लालच देकर पैसा लिया जाता और फिर उसी से बाइक खरीद ली जाती। लोगों को आश्वासन दिया जाता था कि एक बाइक की कीमत करीब 62 हजार रुपये देने होंगे और साल भर करीब 10 हजार रुपये का रिटर्न मिलेगा। इस तरह सिर्फ एक साल में पैसा लगभग डबल।

लोगों ने इस स्कीम को हाथों हाथ लिया और बड़े शहरों के अलावा करीब 50 शहरों में बाइक बोट की बाइक सड़कों पर दिखने लगीं। एक अनुमान की मानें तो इस स्कीम में दो लाख से अधिक लोगों को ठगा गया। मेरठ ईओडब्लयू में पहले से ही कंपनी के खिलाफ बाइक बोट फर्जीवाड़ा के एफआईआर दर्ज है।

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