Thursday, March 19, 2026
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रालोद के ’भाईचारा सम्मेलन’ में टूटता दिखा ’भाईचारा’

  • नवाजिश आलम व अमीर आलम से नाराज दिखे जाट समाज के लोग
  • सम्मेलन से किया किनारा, मुस्लिम समाज के लोगों की रही भागेदारी
  • रालोद मुखिया की कौशिशों के बावजूद नहीं मिट पा रही दूरियां

बासित सैफी |

बुढ़ाना/मुज़फ्फरनगर: राष्ट्रीय लोकदल के भाईचारा सम्मेलन में आपसी भाईचारा टूटता हुआ नजर आया। रालोद द्वारा बुढ़ाना में आयोजित किये गये भाईचारा सम्मेलन में बुढाना के पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान व उनके पिता की मौजूदगी जाट समाज के लोगों को रास नहीं आई और उन्होंने इस सम्मेलन से किनारा कर लिया। इस सम्मलेन में 80 प्रतिशत भागेदारी केवल मुस्लिम समाज के लोगों की रही।

गौरतलब है कि 2013 में जब मुजफ्फरनगर में साम्प्रदायिक दंगे हुए थे, उस समय नवाजिश आलम खान सपा से विधायक थे और प्रदेश में सपा की ही सरकार थी। इस समय नवाजिश आलम खान व उनके पिता अमीर आलम खान पर दंगों में जाट समाज के लोगों के खिलाफ कार्रवाई कराये जाने के आरोप लगे थे।

हालांकि दंगों के बाद मुस्लिम समाज व जाट समाज के लोगों के बीच एक खाई पैदा हो गई थी। रालोद मुखिया अजित सिंह ने इस खाई को पाटने के लिए भरसक प्रयास किये थे और वह एक हद तक कामयाब भी हो गये थे। इन्हीं प्रयासों की बदौलत एक बार फिर दोनों समाज के लोग एक-दूसरे पर विश्वास कर रहे हैं और एक मंच पर एकत्रित भी हो रहे हैं।

सोमवार को कस्बे के फैज गार्डन में रालोद ने भाईचारा सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन का आयोजन पूर्व विधायक नवाजिश आलम व पूर्व प्रमुख विनोद मलिक ने किया। दोनों ने ही अपने-अपने समर्थकों से इस सम्मेलन को सफल बनाने का आह्वान किया था।

दोनों के समर्थक बड़ी संख्या में इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। जाट समाज के लोगों ने जब इस सम्मेलन की कमांड पूर्व विधायक नवाजिश आलम व उनके पिता के हाथों में देखी, तो उन्होंने इस सम्मेलन से किनारा करना शुरू कर दिया और सम्मेलन समाप्त होने तक जाट समाज के लोग इस सम्मेलन में ना के बराबर रह गये थे।

हालांकि मुस्लिम समाज के लोग इस सम्मेलन में बढ-चढ़कर हिस्सेदारी करते दिखाई दिये। भाईचारा जोड़ने के लिए बुलाये गये सम्मेलन ने अहसास करा दिया है कि जाट समाज के लोगों के दिलों में नवाजिश आलम खान को लेकर नाराजगी है, जो अभी तक दूर नहीं हुई है। जाट समाज की यह नाराजगी आने वाले विधानसभा चुनाव में मुश्किलें खड़ी कर सकती है, जिसका फायदा एक बार फिर भाजपा उठा सकती है।

बुढाना से नवाजिश कर रहे टिकट की दावेदारी

रालोद के टिकट पर नवाजिश आलम खान 2022 के विधानसभा चुनाव में दावेदारी कर रहे हैं। जिस तरह से जाट समाज में नवाजिश को लेकर नाराजगी है, उससे इस सीट पर उनका चुनाव लडकर जीत पाना आसान नहीं हो पायेगा। बता दें कि बुढाना विधानसभा सीट का इतिहास रहा है कि यहां पर जाट-मुस्लिम के गठजोड़ के चलते चुनाव जीता जाता है, परन्तु नवाजिश को लेकर यह गठजोड़ बनता नजर नहीं आ रहा है, ऐसे में रालोद को सोचना होगा कि इस नाराजगी को कैसे दूर कराया जाये।

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